गोवर्धन पूजा आज, जानें कब है पूजा का शुभ मुहूर्त और क्या है सही तरीका

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/08 02:59

जयपुर। कल पूरे देशभर में दीपावली का त्यौहार धूमधाम से मनाया गया, और आज गोवर्धन पूजा की जाएगी। गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन की जाती है। इस दिन खासतौर पर भगवान कृष्‍ण, गोवर्द्धन पर्वत और गायों की पूजा का विधान है। इस दिन की पूजा एक खास तरीके से की जाती है। इसे 'अन्नकूट पूजा' भी कहा जाता है। इस दिन लोग किसी जगह इक्कठे होकर गोबर से गोवर्धन पर्वत, गायों, ग्वालों आदि की आकृति बनाकर पूजा-अर्चना करते हैं। हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार मान्‍यता है कि इसी दिन भगवान कृष्‍ण ने देव राज इन्‍द्र के घमंड को चूर-चूर कर गोवर्द्धन पर्वत की पूजा की थी। 

शुभ मुहूर्त 

गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को की जाती है। इसलिए जरुरी है कि इसका प्रारंभ और समाप्‍त का समय जान लिया जाए। 
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर 2018 को रात 09 बजकर 31 मिनट से। 
प्रतिपदा तिथि समाप्‍त: 8 नवंबर 2018 को रात 09 बजकर 07 मिनट तक। 
गोवर्द्धन पूजा का प्रात: काल मुहूर्त: 08 नवंबर 2018 को सुबह 06 बजकर 39 मिनट से 08 बजकर 52 मिनट तक। 
गोवर्द्धन पूजा का सांयकालीन मुहूर्त: 08 नवंबर 2018 को दोपहर 03 बजकर 28 मिनट से शाम 05 बजकर 41 मिनट तक।   

जानें पूजा की पूर्ण विधि 

इस दिन गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है, जिसके बाद उसे फूलों से सजाया जाता है और सूरज ढलने के बाद इसकी पूजा की जाती है। पूजा में धूप, दीप, दूध नैवेद्य, जल, फल, खील, बताशे आदि का इस्तेमाल किया जाता है। 

- गोदवर्द्धन पूजा वाले दिन सुबह जल्दी यानि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शरीर पर तेल लगाने के बाद स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें। 
- ईष्‍ट देवता का ध्‍यान करते हुए घर के मुख्‍य दरवाजे के सामने गाय के गोबर से गोवर्द्धन पर्वत की आकृति बनाएं। 
- अब इस पर्वत को पौधों, पेड़ की शाखाओं और फूलों से सजाएं। इन सब में ध्यान देने वाली बात यह है कि गोवर्द्धन पर अपामार्ग की टहनियां जरूर लगाएं। 
- अब पर्वत पर रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें। 
- अब हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हुए कहें: 
गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक।
विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव: ।।

बता दें कि अगर आपके घर में गायें हैं तो उन्‍हें भी नहला कर उनका श्रृंगार करें। फिर उन्‍हें रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें। आप चाहें तो अपने आसपास की गायों की भी पूजा कर सकते हैं। अगर गाय नहीं है तो फिर उनका चित्र बनाकर भी पूजा की जा सकती है। अब गायों को नैवेद्य अर्पित करें इस मंत्र का उच्‍चारण करें 
लक्ष्मीर्या लोक पालानाम् धेनुरूपेण संस्थिता।
घृतं वहति यज्ञार्थे मम पापं व्यपोहतु।।

इसके बाद गोवर्द्धन पर्वत और गायों को भोग लगाकर आरती उतारें। जरुरी बात यह कि जिन गायों की आपने पूजा की है शाम के समय उनसे गोबर के गोवर्द्धन पर्वत का मर्दन कराएं। यानी कि अपने द्वारा बनाए गए पर्वत पर पूजित गायों को चलवाएं. फिर उस गोबर से घर-आंगन लीपें। पूजा के बाद पर्वत की सात परिक्रमाएं करें। 

मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि गोवर्धन पर्व के दिन मथुरा में स्थित गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन इंद्र, वरुण, अग्नि और भगवान विष्‍णु की पूजा और हवन भी किया जाता है। 
 

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