आम राजस्थानी पर बढ़ा सरकारी कर्ज, हर व्यक्ति हो गया अब 40 हजार का कर्जदार

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/18 11:47

जयपुर: राज्य सरकार के खजाने में सर्वाधिक योगदान देने वाले विभागों सहित सरकारी कोष के प्रबंधन को लेकर राज्य के महालेखा परीक्षक ने आज राजस्व क्षेत्र और राज्य वित्त से संबंधित दो रिपोर्ट विधानसभा में पेश की है. रिपोर्ट की शुरुआत राजकोषीय घाटे पर की गई टिप्पणी से की गई है. इसमें राजकोषीय घाटा तीन फीसदी के निर्धारित लक्ष्य की तुलना में बढ़कर 3.02 फीसदी होने व राजस्व घाटे में लगातार बढ़ोतरी पर चिंता जताई गई. राज्य विधानसभा में रिपोर्ट पेश करने के बाद राज्य के महालेखा परीक्षक कार्यालय में AG अधिकारियों ने रिपोर्ट का विवरण पत्रकारों के साथ साझा किया. 

वित्तीय वर्ष 2017-18 में 18 हजार 535 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा: 
राज्य के महालेखा परीक्षक कार्यालय के वरिष्ठ उप महा लेखाकार दीन दयाल वर्मा ने पत्रकारों को बताया कि दोनों ही रिपोर्ट में AG कार्यालय के अधिकारियों ने सरकारी के वित्तीय खर्च व प्रबंधन को करीब से टटोलने की कोशिश की है. सीमित संसाधनों के कारण AG ने विभिन्न क्षेत्रों की नमूना जांच की, जिसमें अनेक गड़बड़ियां मिली है. इन्हें दुरुस्त करने के लिए सरकार से सिफारिश की गई है. वित्तीय वर्ष 2017-18 में 18 हजार 535 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा रहा. रिपोर्ट में फिस्कल लाइब्लिटी की बढ़ोतरी पर भी चिंता जताई गई और बताया कि वर्ष 2013-14 में यह राशि एक लाख 29 हजार 910 करोड रुपए के स्तर से बढ़कर दो लाख 81 हजार 182 करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया. खास बात यह भी रही कि वित्तीय वर्ष 2016-17 की तुलना में यह राशि दस फीसदी बढ़ी. सरकारी राजस्व आय में वृद्धि के साथ सरकारी खर्च में हुई बेतहाशा वृद्धि पर भी महालेखाकार कार्यालय ने टिप्पणी की है. इस मौके पर वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी शैलेन्द्र शर्मा, सतीश रावत, बद्री लाल आदि भी मौजूद रहे और रिपोर्ट के बारे में विस्तार से पत्रकारों को जानकारी दी. 

127 प्रकरणों में ई-पंजीयन में गलत सूचनाएं: 
AG अधिकारियों ने बताया कि मुद्रांक कर व पंजीयन शुल्क से जुड़े मामलों में भी अनेक जगह लापरवाही पकड़ में आई है. जिला स्तरीय समिति की बैठकों व इनकी और से वास्तविक बाजार दर के अंतर को दूर करने लिए होने वाले अंतर को दूर करने में पर्याप्त प्रयास नहीं हुए. ई-पंजीयन के माध्यम से देय मुद्रांक कर की गणना में 1.80 करोड़ का कम कर आरोपित हुआ. इसी तरह सहकारी आवास समितियां पंजीयन अधिनियम व राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम के प्रावधानों की गड़बड़ियां भी पकड़ में आई. सहकारी समितियों की ओर से अपंजीकृत दस्तावेज पर हुई भूमि खरीद में 2.94 करोड़ की राजस्व छीजत पकड़ में आई. इसी तरह 127 प्रकरणों में ई-पंजीयन में गलत सूचनाएं इन्द्राज कर 10.77 करोड़ रुपए का कम आरोपण अथवा अनारोपण भी AG अधिकारियों की पकड़ में आया. AG रिपोर्ट में GST कानून के प्रावधानों के बारे में लापरवाही से हुई सरकारी राजस्व की क्षति, ITC का दुरुपयोग, अपील निस्तारण की प्रणाली जांच में गड़बडी़, केप्टिव पावर प्लांटों पर विद्युत शुल्क आरोपण व संग्रहण की खामियों और राजकीय भूमि पर अतिक्रमण को लेकर टिप्पणियां की है. 

...विमल कोठारी, फर्स्ट इण्डिया न्यूज, जयपुर
 

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