VIDEO: गुर्जर आरक्षण विधेयक को बचाने की संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार की !

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/03 05:38

जयपुर। गुर्जर सहित पांच जातियों को 5 फीसदी आरक्षण देने वाले विधेयक को निरंतर बनाए रखने के लिए पैरवी की जिम्मेदारी गुर्जर समाज ने सरकार पर छोड़ दी है। विधेयक को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान एक ओर जहां गुर्जर संघर्ष समिति की ओर से पैरवी से इंकार किया गया है, वहीं गुर्जर समाज से जुड़े एक अन्य अधिवक्ता ने पक्षकार बनने के लिए अर्जी पेश की, जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया है। 

गुर्जर आरक्षण विधेयक को चुनौती देने वाली जनहित याचिका में एक नया पेंच फस गया है। गुर्जर संघर्ष समिति से अलग गुर्जर समाज से जुड़े एक अधिवक्ता ने इस मामले में पक्षकार बनने की अर्जी लगाई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने एडवोकेट रजनीश गुर्जर की इस अर्जी को मंजूर करते हुए पक्षकार बनाने की इजाजत दे दी है, तो वहीं दूसरी ओर गुर्जर संघर्ष समिति के महासचिव ने पक्षकार बने अधिवक्ता को समाज से होने से इंकार किया है। समिति के महासचिव एडवोकेट शेलेन्द्र गुर्जर ने कहा कि विधेयक को बचाने की जिम्मेदारी सरकार है और समाज इस मामले में पैरवी नहीं करेगा। 

राजस्थान पिछड़ा वर्ग संशोधन विधेयक 2019 के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे याचिकाकर्ता अरविंद शर्मा की ओर से भी कोर्ट में रिजोईंडर पेश किया गया है। याचिका में सरकार की ओर से पेश किये गये जवाब में भी कई कानूनी पेंच है। याचिका में कई जगह गुर्जर आरक्षण के लिए एमबीसी तो, कई जगह एसबीसी शब्द का प्रयोग किया गया है। सरकार ने अपने जवाब में कहा कि जस्टिस गर्ग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ये आरक्षण दिया गया है। वहीं याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिनव शर्मा ने कहा कि जिस रिपोर्ट को अदालत खारिज कर चुकी है, उस रिपोर्ट की खामियों को दूर करने के गर्ग कमेटी बनाई गई थी। 

बहरहाल हाईकोर्ट ने अरविंद शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की स्टे एप्लीकेशन पर सुनवाई के लिए 22 अप्रैल की तारीख तय की है। गुर्जर समाज द्वारा पैरवी से इंकार करने से अब संपूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार पर आ गई है। 

... संवाददाता निजाम कण्टालिया की रिपोर्ट 


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