प्रदेश में पेयजल को लेकर गंभीर नहीं सरकार, हाईकोर्ट ने लगाया 50 हजार रुपए का हर्जाना

Nizam Kantaliya Published Date 2019/05/20 05:36

जयपुर: प्रदेश में पेयजल की समस्या के निस्तारण और पेजयल उपलब्ध कराने को लेकर दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर 50 हजार का जुर्माना लगाया है. याचिकाकर्ता की ओर से प्रदेश में वाटर पॉलिसी सहित कई बिंदुओं को लेकर दिसंबर 2017 में एक प्रार्थना पत्र पेश किय गया था.

राज्य सरकार ने 16 माह बाद भी नहीं दिया जवाब:
दरअसल हाईकोर्ट में पिछली 10 सुनवाई में सरकार ने 9 बार जवाब के लिए समय मांगा. जिस पर नाराजगी जताते हुए जस्टिस मोहम्मद रफीक की खण्डपीठ ने ये जुर्माना लगाया है. गौरतलब है कि महेश पारीक की ओर से दायर किये गये प्रार्थना पत्र में राज्य सरकार से पानी को लेकर पॉलिसी बनाने, अन्य राज्यों की तर्ज पर वाटर रिसॉर्सेज एक्ट लाने की मांग की गई थी. राजस्थान हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार को गुजरात और महाराष्ट की तर्ज पर पॉलिसी तैयार करने को कहा था, लेकिन राज्य सरकार 16 माह बाद भी इस प्रार्थना पत्र का कोई जवाब पेश नही कर पाई. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने पेयजल से जुड़े गंभीर मुद्दे पर सरकार के रवैये को लेकर सवाल खड़े किये.

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