सरकार बताए राज्य में कौन से निजी अस्पताल कर रहे निशुल्क इलाज- हाईकोर्ट

सरकार बताए राज्य में कौन से निजी अस्पताल कर रहे निशुल्क इलाज- हाईकोर्ट

जयपुर: राज्य सरकार से चिकित्सा सेवाओं के नाम पर रियायती दरों पर जमीन लेने वाले निजी अस्पतालों द्वारा कोरोना महामारी के दौरान निशुल्क इलाज नही करने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी है. जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति ने सख्त टिप्पणी करते हुए सरकार से पूछा है कि राज्य सरकार को यह बताना चाहिए कि रियायती दर पर जमीन लेने वाले कौन से अस्पताल कोरोना मरीजों को फ्री इलाज कर रहे हैं और वहां पर कितने बिस्तर है कितने मरीज भर्ती हैं ताकि पीड़ित वहां पर इलाज के लिए जा सके.

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धरम सज्जन ट्रस्ट की ओर से जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए  मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है और सरकार क्या कर रही है. गौरतलब है कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दायर एक अन्य जनहित याचिका में 30 मई को जारी एडवाईजरी पेश कि थी. इस एडवाईजरी के तहत निजी और चैरिटेबल अस्पतालों को कोरोना मरीजों का निशुल्क इलाज के निर्देश दिये गये थे. याचिका में  सरकार की इस एडवाईजरी में सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए अस्पतालों को नैतिकता के आधार पर कोरोना मरीजों का मुफ्त इलाज करने को गलत बताया है क्योकि ये कानूनी रुप से बाध्यकारी नहीं है.

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याचिका में राज्य के निजी अस्पतालों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गयी है. राज्य में कोरोना के इलाज के लिए राज्य में कुल 55 अस्पताल चिन्हित किए हैं और इनमें से आधे अस्पताल निजी हैं. लेकिन, इनमें उन अस्पतालों को अलग से चिन्हित नहीं किया है जिन्होंने सरकार से रियायती दरों पर जमीन ली है और मेडिकल यत्रों व मशीनरी पर आज भी सब्सिडी ले रहे हैं. किसी को यह पता नहीं है कि कौन कौन से अस्पताल फ्री इलाज करेंगे वहां बैड की स्थिति क्या है यह पूरी जानकारी ऑनलाइन करने की गुहार लगायी है. मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ ने समान मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के चलते मामले की सुनवाई 15 जुलाई की तारीख तय की है. 

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