जयपुर राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा-प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर आमजन संस्कारित होगा

राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा-प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर आमजन संस्कारित होगा

राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा-प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर आमजन संस्कारित होगा

जयपुर: राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है की बहुविषयी शिक्षा, संपूर्ण विकास, जड़ से जग तक और मानव से मानवता तक की बात राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में समावेशित है. नई शिक्षा नीति में आधुनिक शिक्षा से प्राचीन भारतीय ज्ञान को जोड़ने से आमजन संस्कारित होगा. शिक्षा के साथ संस्कार का होना जरूरी है. विश्व धरोहर के लिए देश की समृद्ध विरासतों को न केवल भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित किया जाना जरूरी है, बल्कि हमारी शिक्षा प्रणाली के जरिए इन्हें बढ़ाना और इन्हें नए तरीके से उपयोग में लाना भी जरूरी है.

भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ाने वाली है नई शिक्षा नीति:
125 वर्षों के बाद भारतीयता पर यह शिक्षा नीति बनी है, जो आज के संदर्भ में ज्ञान की प्राचीन परंपरा को बताएगी. राज्यपाल ने नई शिक्षा नीति को भारतीयता और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ाने वाली बताया है. राज्यपाल ने ये विचार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अंतर विश्वविद्यालयी अध्यापक शिक्षा केंद्र द्वारा आयोजित वेबिनार के दौरान व्यक्त किए. वेबिनार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: प्राचीन ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक शिक्षा विषय पर आयोजित की गई. राजभवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वेबिनार को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत की सोच व्यापक रही है.

प्राचीन काल में शिक्षा का मूल उद्देश्य रहा है ज्ञान की प्राप्ति:
विश्व गुरु का स्थान भारत ने ज्ञान से ही प्राप्त किया था. भारत की ज्ञान परंपरा इतनी समृद्ध है कि वह पुस्तकों के जलाने और पुस्तकालयों को समाप्त करने से भी समाप्त नहीं हो पाई. प्राचीन काल में शिक्षा का मूल उद्देश्य ज्ञान की प्राप्ति रहा है. प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा की आवश्यकता को पूरा विश्व महसूस करता रहा है. हमारा देश उच्च मानवीय मूल्यों और विशिष्ट वैज्ञानिक परंपराओं का देश रहा है. भारत की संस्कृति रही है कि भारत ने दुनिया को अलग-अलग देश के रूप में नहीं बल्कि एक परिवार के रूप में माना है. इस सदी के उत्तरार्द्ध से पश्चिमी सभ्यता वाले देश भारतीय संस्कृति और सभ्यता को अपनाने और जानने पर जोर देने लगे हैं. हमें और हमारी भावी पीढ़ियों को भारत के प्राचीन मूल्यों को यथोचित महत्व देना होगा. समारोह को रजनीश कुमार शुक्ल, सच्चिदानंद जोशी विनोद कुमार त्रिपाठी और आरपी शुक्ल ने भी संबोधित किया.

...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की रिपोर्ट

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