VIDEO: भगवान महावीर कैंसर अस्पताल को बड़ी राहत

Abhishek Shrivastava Published Date 2019/04/09 09:58

जयपुर। प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार ने राजधानी के भगवान महावीर कैंसर अस्पताल को बड़ा अभयदान दे दिया है। सरकार में उच्च स्तर पर मिले निर्देश के बाद जयपुर विकास प्राधिकरण ने अस्पताल परिसर के सारे निर्माण को नियमित कर दिया है। क्या है पूरा मामला, खास रिपोर्ट:

महज 1 रुपए की टोकन मनी पर आवंटित 27 हजार वर्ग मीटर भूमि पर बने भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल के संचालन में अनियमित्ताओं और अवैध निर्माण का मामला पिछले करीब 6 साल से चल रहा है। प्रदेश की पिछली भाजपा सरकार के समय मामले में शिकायत राज्यपाल,लोकायुक्त और मुख्यमंत्री कार्यालय और नगरीय विकास विभागत तक पहुंच चुकी थी। शिकायत पर चिकित्सा विभाग और फिर बाद में जेडीए की अधिकारियों की टीम ने मामले की जांच कर अलग-अलग रिपोर्ट सरकार को दी। 

आखिर क्या है पूरा मामला:

—25 अप्रेल 2013 को मामले में जांच के लिए चिकित्सा विभाग की ने एक कमेटी का गठन किया
—9 मई 2014 को जेडीए ने जोन स्तरीय कमेटी का गठन किया
—दोनों कमेटियों ने आवंटन की शर्तों के उल्लंघन व अवैध निर्माण की शिकायत को सही माना
—17 मार्च 2017 और फिर 31 मई 2017 को जोन स्तरीय कमेटियां बनाकर मौका मुआयना कराया गया
—सभी कमेटियों की जांच में अस्पताल परिसर में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण पाया गया
—अस्पताल की आईपीडी ब्लॉक की ऊपरी दो मंजिलें पूरी तरह अवैध पाई गई
—धर्मशाला के लिए आवंटित भूमि पर बिना स्वीकृति तहखाने सहित सात मंजिला अवैध इमारत बना ली गई
—चिकित्सा सुविधा की भूमि पर पांच मंजिला अवैध इमारत बना ली गई
—स्टाफ के आवास की भूमि पर भी पांच मंजिला अवैध इमारत बनाई गई
—600 वर्गमीटर भूमि पर बिना स्वीकृति इमारत बना ली गई है
—8 सितम्बर 2017 को जेडीए ने खुद अवैध निर्माण हटाने का होटल प्रबंधन को नोटिस दिया
—लेकिन हॉस्पिटल प्रबंधन ने अवैध निर्माण नहीं हटाया
—इसके बावजूद जेडीए अधिकारियों ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की

प्रदेश में अशोक गहलोत सरकार बनने के बाद महावीर कैंसर अस्पताल के अवैध निर्माण को नियमित करने की कवायद शुरू हो गई। राज्य सरकार में उच्च स्तर पर मिले निर्देशों के बाद जयपुर विकास प्राधिकरण की भवन मानचित्र समिति की हाल ही हुई बैठक में अस्पताल के अवैध निर्माण को नियमित करने का फैसला कर दिया गया। 

जेडीए ने मामले में क्या फैसला किया:

—जेडीए ने फिलहाल अस्पताल परिसर में किए अवैध निर्माण को ही नियमित किया है
—इसमें आईपीडी ब्लॉक की ऊपरी दो मंजिलें,ओपीडी ब्लॉक में अन्य निर्माण और स्टाफ क्वाटर्स की भूमि का निर्माण शामिल है
—अवैध निर्माण नियमन के लिए बतौर शुल्क अस्पताल प्रबंधन को करीब ढाई करोड़ रुपए जेडीए को चुकाने होंगे
—12 साल से बकाया 21 लाख 64 हजार रुपए का भवन अनुज्ञा शुल्क भी चुकाना होगा 
—9 मई 2007 को जेडीए ने यह राशि लेने के लिए अस्पताल प्रबंधन को डिमांड नोटिस दिया था
—अस्पताल प्रबंधन का था तर्क, धर्मार्थ चला रहे हैं अस्पताल इसलिए नहीं बनता कोई शुल्क

राज्य सरकार के निर्देश पर जेडीए ने फिलहाल अस्पताल परिसर के अवैध निर्माण नियमित किए हैं। जबकि अस्पताल प्रबंधन को आवंटित अस्पताल परिसर से लगती अन्य जमीनों पर भी कई अवैध निर्माण किए गए हैं। जानकारों की मानें तो दूसरे चरण में इन निर्माणों का भी नियमन कर दिया जाएगा। 

... संवाददाता अभिषेक श्रीवास्तव की रिपोर्ट 


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