घोड़ी पर सवार होकर दुल्हन पहुंची दूल्हे के घर, कस्बे में बना चर्चा का विषय

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/27 11:52

टोडाभीम(करौली)। बचपन से लोग यही देखते आ रहे है कि शादी के वक्त दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर शादी करने जाता है लेकिन करौली जिले के टोडाभीम उपखंड मुख्यालय पर इस परम्परा को तोड़ते एक दुल्हन खुद घोड़ी पर चढ़ी और धूमधाम से बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची । 

ये हैरान कर देने वाला मामला टोडाभीम उपखंड मुख्यालय पर राजाजी के गढ़ पर स्थित उमा शंकर श्रीमाली के पुत्र ऋषभ कुमार की शादी समारोह का है जहां जोधपुर निवासी दुल्हन दिव्या जोशी ने उस रुढीवादी सोच और सदियों से चली आ रही परम्परा को तोड़ते हुए समाज में महिलाओ के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ एक नई मिसाल कायम की है । लड़की के इस कदम से लडके और लडकियों के बीच भेदभाव खत्म कर लडकियों को किसी क्षेत्र में कम नहीं समझाने की मिशाल है ।

श्रीमाली समाज की परंपरा के अनुसार टोडाभीम में उमाशंकर भट्ट के पुत्र ऋषभ भट्ट के साथ शादी हो रही है जिसमें जोधपुर महामंदिर निवासी रमेश जी जोशी की लड़की दिव्या यहां शादी के लिए सह परिवार आई है उसमें लड़की पहले दोपहर में घोड़े पर चढ़कर के अपने ससुराल जाती है वहां पर उसका स्वागत सास द्वारा किया जाता है  तथा उसे बरी का बेस देते हैं जो रात्रि में शादी के समय वह पहनती है तत्पश्चात लड़की घोड़े से रवाना होकर वापस जहां से दुल्हन रवाना होती है वहां पर वापस जाती है और शाम को इस परंपरा को आगे जारी रखते हुए दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर के जानीवासे पहुंचता है तथा वहां पर दुल्हन की माता उसका स्वागत करते हुए उसका गुसल मुसल से तथा और भी अन्य प्रकार की परंपराओं का निर्वाह करते हुए उसको अंदर प्रवेश करवाती है तत्पश्चात दुल्हन की माता काकी दूल्हे की मां और दूल्हे की भाभी यह चारों आपस में फेरे खाते हैं जिस प्रकार दूल्हा दुल्हन के रखती है उसी प्रकार समधन समधन के गजरा बनती है उसके पश्चात  पंडित जी दूल्हा दुल्हन के फेरे करवाते हैं तथा इसमें चार फेरे दूल्हे दुल्हन  मंडप की परिक्रमा करके  खाते हैं उसके बाद में वहां से उठकर के फोटोग्राफ इन का कार्य करते हैं और उसके बाद में तत्पश्चात रात्रि को दूल्हा-दुल्हन  मंडप में बैठते हैं चावल घी शक्कर एक थाल में रख कर के  दोनों साथ में खाना खाते खिलाते हैं  एवं उसके पश्चात दूल्हा दुल्हन को गोद में उठाकर के 4 फेरे उस मंडप लगाते  हैं ।

घोड़ी पर बारात ले जाने के बारे में पूछा तो लड़की का कहना था कि ये कदम लडके और लडकियों के बीच भेदभाव करने के लिए उठाया है लडकियों को किसी क्षेत्र में कम नहीं समझाना चाहिए । इसी बीच लोग टकटकी लगाये दुल्हे को तलाश रहे थे लेकिन दुल्हे ने भी अपनी दुल्हन के इस फैसले का सम्मान किया ये मामला पुरे कस्बे में चर्चा का विषय बना रहा । बारात में घोड़ी पर सवार लड़की को देखकर हर किसी को अचंभा जरुर हो रहा था लेकिन एक तरफ लडकियों के लिए एक नई सोच बन रही थी दूसरी ओर उन्हें लेकर एक नया नजरिया उनके आने वाले कल को संवारने की तैयारी में जुटा गया था । 

इस प्रकार से यह शादी संपन्न होती है श्रीमाली समाज का यह रीति रिवाज हजारों वर्ष पुराना है और इसको सभी श्रीमाली समाज के व्यक्ति फॉलो करते हैं ताकि यह परंपरा बनी रहे ।                                                             
 भगवान सहाय जांगिड़ फर्स्ट इंडिया न्यूज टोडाभीम

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