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शीतलहर के प्रकोप से फसलों को बचाने के लिए कृषि विभाग ने जारी किेए दिशा निर्देश

शीतलहर के प्रकोप से फसलों को बचाने के लिए कृषि विभाग ने जारी किेए दिशा निर्देश

प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ जिले में पड़ रहे पाले और शीतलहर के प्रकोप से फसलों को बचाने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। विभागीय अधिकारियों ने किसानों को खेतों के आसपास घास जलाने और सल्फ्यूरिक एसिड के छिड़काव की सलाह दी है ।

प्रतापगढ़ जिले में पिछले 7 दिनों से शीतलहर और पाला पड़ने से किसानों की फसलों में काफी नुकसान हुआ है । मक्का, सरसों और दलहन की फसलों में काफी नुकसान हो चुका है कई इलाकों से मुआवजे की मांग भी उठने लगी है शीत लहर का प्रकोप अभी भी जारी है कृषि विभाग ने फसलों के बचाव के लिए किसानों को सलाह दी है । 

कृषि विभाग के सहायक उप निदेशक अशोक मीणा के मुताबिक जिले में पढ़ रहे पाले और शीतलहर से सबसे ज्यादा नुकसान तिलहन और सरसों की फसलों को हो रहा है जिससे उपज काफी कम होने की संभावना है मीणा ने बताया कि किसानों को पाला पड़ने की पूर्व जानकारी मिले इसके लिए भी विभाग प्रश्न कर रहा है मीणा ने बताया कि दोपहर बाद जब अच्छी धूप खिली हुई हो और उसके बाद ठंडी हवाएं चलने लगे तो इसका मतलब पाला पड़ने की 100% संभावनाएं रहती है इससे निजात पाने के लिए किसानों को शाम को अपने खेतों के आसपास 10 से 20 मीटर की दूरी के अंतराल में घास फूस के ढेर जलाकर धुआं करना चाहिए जिससे वहां पर तापमान में बढ़ोतरी हो और पानी के नुकसान से बचा जा सके। 

इसके अलावा पॉइंट वन ग्राम सल्फ्यूरिक एसिड का घोल बनाकर भी खेतों में छिड़काव किया जाए तो काफी हद तक पानी और शीतलहर से फसलों को होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है सिंचाई करके भी किसान फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं मीणा के मुताबिक यदि किसान इस तरह के उपाय नहीं करते हैं तो फसलों को काफी नुकसान होगा और उपज भी प्रभावित होगी । 

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जैसलमेर: पाकिस्तान के रास्ते भारत आया टिड्डी दल फसलों को काफी नुकसान पहुंचा रहा है. खासतौर पर राजस्थान के कई जिलों में इनका असर सबसे ज्यादा है. कई किलोमीटर लंबे टिड्डी दल राजस्थान के आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में बार-बार हमला कर रहे हैं. टिड्डी दल के हमले से अब पाकिस्तान बॉर्डर से लगे राजस्थान के जिलों में किसानों पर आफत आ गई है. अब अगस्त में एक बार फिर पाकिस्तान के रास्ते कारोड़ों टिड्डियों का दल भारत में आ सकता है. राजस्थान कृषि विभाग के अनुसार जुलाई और अगस्त में टिड्डी दल के हमलों में बढ़ोतरी हो सकती है. मानसून का सीजन शुरू हो चुका है, और बारिश में टिड्डियां ज्यादा अंडे देती हैं. 

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अब तक 2 लाख हैक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी:  
टिड्डी दलों के हमले से अब तक 2 लाख हैक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है. राजस्थान के कृषि विशेषज्ञों की मानें तो अब हमले ज्यादा बड़े और लगातार होंगे. इन हमलों से यदि प्रदेश की 10 प्रतिशत फसल भी बर्बाद हुई तो नुकसान का आंकड़ा लगभग 4 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है. कृषि विशेषज्ञों एवं अधिकारियों की आशंका और अब तक हुए हमलों को ध्यान में रखते हुए टिड्डियों पर नियंत्रण के लिए कारगर कदम उठाए जा रहे हैं. केंद्र सरकार ने हेलीकॉप्टर से कीटनाशक स्प्रे कराने का प्रबंध किया है. वहीं राज्य सरकार जमीनी स्तर पर कीटनाशक का स्प्रे कराने के साथ ही अन्य आवश्यक कदम उठा रही है. फायर ब्रिगेड, ड्रोन व ट्रेक्टर का सहारा लेकर इन पर नियंत्रण का प्रयास किया जा रहा है. 

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टिड्डी नष्ट करने के लिये हेलिकॉप्टर की मदद ली गई:
जैसलमेर में टिड्डी नियंत्रण अधिकारी राजेश कुमार व कृषि उपनिदेशक राधेश्याम नारवाल ने बताया कि जैसलमेर जिले में आज  टिड्डी नष्ट करने के लिये हेलिकॉप्टर की मदद ली गई. जैसलमेर जिले के धनाना क्षेत्र में 140 आर.डी क्षेत्र में हेलिकॉप्टर से कीटनाशक का स्प्रे कर 50 से ज्यादा हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण किया गया. इसके साथ ही जिले में रविवार को कुल 351 हेक्टेयर क्षेत्र मे टिड्डी नियंत्रण किया गया जिनमें पोकरण, डेलासर, एकां, अमीरों की बस्ती प्रमुख रूप से शामिल है. उन्होंने बताया कि जैसलमेर में 908 हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण की कार्यवाही की गई. जिले के मुल्ताना, फतेहगढ़, बांधा, ओला, सोढ़ाकर पोकरण, दूधिया आदि क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर, ड्रोन, व्हीकल माउंटेन स्प्रेयर के जरिए टिड्डी नियंत्रण किया गया. 

सीमा पार से आई टिड्डियों पर 'एयर स्ट्राइक' जारी

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जैसलमेर: पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान से आने वाले टिड्डी दलों पर जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर से धावा जारी है. जैसलमेर जिले में टिड्डी नियंत्रण में अब हैलिकॉप्टर की मदद भी ली जा रही है. रविवार को जिले के 140 आरडी क्षेत्र में  हैलिकॉप्टर से कीटनाशक का स्प्रे कर टिड्डी नियंत्रण किया गया. टिड्डियों के पड़ाव की सूचना विभाग को मिलने के बाद किसानों की फसलों व अन्य वनस्पति के लिए आतंक का सबब बने इन अवांछित मेहमानों पर एयर स्ट्राइक की जा रही है.

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हेलीकॉप्टर में पेस्टिसाइड और जरूरी पानी का बंदोबस्त किया गया: 
जिले में निजी कंपनी के एक हेलीकॉप्टर ने शनिवार सुबह जैसलमेर के पुलिस लाइन मैदान में बने हेलीपैड से उड़ान भरी. इससे पहले वहां हेलीकॉप्टर में पेस्टिसाइड और जरूरी पानी का बंदोबस्त किया गया. टिड्डी नियंत्रण अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि जिले के विभिन्न स्थानों पर कुल 351 हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण कार्य किया गया. इसमें अमीरों की बस्ती में 25 हैक्टेयर, 138 से 162 आरडी में 80 हैक्टेयर, डेलासर में 60 हैक्टेयर तथा एका, पोकरण में 150 हैक्टेयर में नियंत्रण किया गया. इसी प्रकार ड्रोन से 36 हैक्टेयर में टिड्डी नियंत्रण किया गया. इनमें डेलासर में 20 हैक्टेयर तथा एका, पोकरण में 16 हैक्टेयर क्षेत्र में ड्रोन से टिड्डी नियंत्रण कार्य को अंजाम दिया गया. 

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टिड्डी कोरोना की तरह महामारी केंद्र सरकार को गंभीर होने जरूरत : मंत्री शाले मोहम्मद

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जैसलमेर: अल्पसंख्यक मामलात, वक्फ एवं जन अभियोग निराकरण मंत्री शाले मोहम्मद ने ग्रामीणों से कहा है कि सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ पाकर अपनी तकदीर संवारें और गांवों की तस्वीर बदलें. इसके लिए यह जरूरी है कि ग्रामीण पूरी तरह जागरुक रहकर इन योजनाओं की जानकारी पाएं और अपने काम की गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भरता पाते हुए खुशहाली लाएं.

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ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों का अवलोकन किया:  
अल्पसंख्यक मामलात मंत्री ने जैसलमेर जिले के विभिन्न सीमावर्ती और नहरी क्षेत्रों का दौरे में ग्रामीणों को यह बात कही.कैबिनेट मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों का अवलोकन किया और जन सुनवाई करते हुए ग्रामीणों की समस्याओं को सुना तथा इनके समाधान के लिए आश्वासन दिया. उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में महात्मा गांधी नरेगा योजना में समय पर भुगतान के साथ ही जरूरतमन्दों के लिए पर्याप्त काम खोलकर ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराने के निर्देश दिए.

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राज्य सरकार लगातार किसानों से साथ खड़ी:
वहीं मंत्री शाले मोहम्मद ने कहा की कोरोना की तरह टिड्डी भी बहुत बढ़ी आफ़ात है इसको लेकर राज्य सरकार लगातार किसानों से साथ खड़ी है.  किसानों की आवाज केंद्र की तरफ पंहुचा रही है लेकिन केंद्र सरकार को राजस्थान में और संसाधन जुटाने की आवश्यकता है ताकि यह टिड्डी कंट्रोल यही किया जाए ताकि भारत वर्ष में यह टिड्डी न फैले. वहीं उन्होंने कहा की केंद्र के मंत्री केवल आरोप लगाते है करते कुछ नहीं, इसलिए कुछ काम करे. 

पाकिस्तान से आने वाली टिड्डी पर होगी एयर स्ट्राइक, सीमा पर तैनात किया हेलीकॉप्टर

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जैसलमेर: पिछले साल राजस्थान ही नहीं बल्कि कई राज्यों में तबाही की स्याह दास्तां लिखने के बाद पिछले करीब दो माह में पाकिस्तान से टिड्डियों के लाखों की तादाद में आए झुंड भारत मे घुस कर एक दर्जन राज्यों में फसलों को बर्बाद करने में लगे हैं. इनके आंतक के खात्मे के लिए सरकार अब जमीन के बजाए आसमान से करने जा रही है. किसानों पर कहर बरपा रहे हवाई आतंक पर अब एयर स्ट्राइक के जरिए ही काबू पाने की तैयारी है. टिड्डियों पर अब हेलिकॉप्टर के जरिए कीटनाशक का छिड़काव किया जाएगा. टिड्डियों के खात्मे के लिए माउटेंड स्प्रेयर ट्रैक्टर, ड्रोन के बाद अब हेलीकॉप्टर की मदद ली जा रही है. इसके केहर आज एक हेलीकॉप्टर जैसलमेर पुलिस लाइन मैदान हेलीपेड पर उतरा जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्रों में हेलीकाप्टर से छिड़काव किया. 

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60 दिन में इसकी 100 घंटे की उड़ान अनिवार्य:  
निजी हेलिकॉप्टर एक बार में महज 250 लीटर कीटनाशक का स्प्रे सिर्फ 50 हेक्टेयर क्षेत्र में ही कर सकता है. इसमें पायलट के नीचे दोनों तरफ स्प्रे करने की सुविधा है. कंपनी से हुए करार के तहत 60 दिन में इसकी 100 घंटे की उड़ान अनिवार्य है. इससे पहले एक हेलिकॉप्टर बाड़मेर के उत्तरलाई एयरबेस पर तैनात है. वहीं आज जैसलमेर में हेलीकाप्टर को तैनात किया गया है. जरूरत के आधार पर इसे बाड़मेर के साथ ही जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर और नागौर जिलों में टिड्‌डी नियंत्रण के लिए काम में लिया जाएगा.

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40 मिनट में 750 हेक्टेयर क्षेत्र में 800 लीटर कीटनाशक का छिड़काव: 
वहीं दूसरी तरफ टिडि्डयों के सफाया के लिए अब इंडियन एयरफोर्स मदद के लिए आगे आया है. एयरफोर्स ने अपने तीन एमआई-17 हेलिकॉप्टरों को मॉडिफाइड कर टिड्‌डी पर स्प्रे करने को तैयार कर दिया है. ये हेलिकॉप्टार महज 40 मिनट में 750 हेक्टेयर क्षेत्र में 800 लीटर कीटनाशक का छिड़काव कर देगा. इन तीन में से एक हेलिकॉप्टर को जोधपुर एयरबेस पर तैनात किया जाएगा. यहां टिड्‌डी दलों के भारतीय सीमा में प्रवेश करते ही ये हेलिकॉप्टर हमला करने को उड़ान भरेगा. आज शाम तक जैसलमेर पहुंच जायेंगे.  

ऋणी किसानों के लिए फसल बीमा योजना स्वैच्छिक

ऋणी किसानों के लिए फसल बीमा योजना स्वैच्छिक

जयपुर: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ-2020 में ऋणी काश्तकारों के लिए भी स्वैच्छिक रहेगी. फसल बीमा से अलग रहने के इच्छुक ऋणी किसान को आगामी 8 जुलाई तक संबंधित बैंक शाखा में आवेदन करना होगा. कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने बताया कि फसल बीमा योजना में खरीफ-2020 से केन्द्र सरकार की ओर से कई बदलाव किए गए हैं. 

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किसानों के लिए फसल बीमा स्वैच्छिक किया गया: 
इसके तहत वित्तीय संस्थान से फसली ऋण लेने वाले किसानों के लिए फसल बीमा स्वैच्छिक किया गया है. फसली ऋण लेने वाले किसानों को 8 जुलाई तक संबंधित बैंक में जाकर फसल बीमा से पृथक रखने के लिए निर्धारित प्रपत्र में लिखित में आवेदन करना होगा. आवेदन पत्र बैंक शाखाओं में उपलब्ध है. कटारिया ने बताया कि केन्द्र सरकार ने किसानों के लिए फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 15 जुलाई निर्धारित की है. 

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टिड्डी दलों ने चट की कपास और मूंगफली की पूरी फसल, किसानों ने जमीन पर लेटकर जताया विरोध, मुआवजे की मांग की

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सरदारशहर: सरदारशहर तहसील में पिछले एक हफ्ते में बड़ी संख्या में आये टिड्डी दलों ने नरमा, कपास और मूंगफली की फसलों को पूरी तरह चट कर दिया है. जिसके चलते मानो किसानों की कमर टूट गई हो. टिड्डी दल के आने की पहले से सूचना होने के बावजूद भी प्रशासन की ओर से इनको रोकने की किसी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं की गई, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है. इसी कड़ी में अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसान एसडीएम ऑफिस पहुंचे. 

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किसानों ने जताया विरोध:
आक्रोशित किसान उपखंड अधिकारी कार्यालय में जमीन पर लेट गए और अपना विरोध प्रकट किया. किसानों ने उपखंड अधिकारी रीना छिंपा को ज्ञापन सौंपकर टीडी दल से फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा दिलवाने और लगातार आ रहे टीडी दल पर नियंत्रण करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा. अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश महामंत्री छगनलाल चौधरी ने बताया की बड़ी संख्या में आ रहे टीडी दल को मारने के लिए ट्रैक्टर या यहां पर उपलब्ध उपकरण निष्क्रिय साबित हो रहे हैं अगर इन टिड्डी दलो को मारना है तो हेलीकॉप्टर या हवाई जहाज के जरिए इनको मारा जा सकता है इसलिए सरकार को जल्द से जल्द हवाई मार्ग से इन टिड्डी दलों को नष्ट करना चाहिए.

पहले मौसम की मार से तबाह हुई थी फसलें:
किसानों ने बताया कि किसान पहले से दुखी है पहले बिन मौसम हुई ओलावृष्टि और फिर कोरोना के चलते मजदूर नहीं मिलने से किसानों को भारी नुकसान हुआ और फिर जब किसानों की फसल पक चुकी थी उस समय बिन मौसम हुई बारिश ने भी किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है और अब टिड्डी दलों ने किसानों की नरमे कपास और मूंगफली की फसल को 100 प्रतिशत नष्ट कर दिया है. गौरतलब है कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में किसानों ने अपने अन्य के भंडार खोल दिए थे जिससे राज्य सरकार व केंद्र सरकार को बहुत बड़ा संबल प्राप्त हुआ था लेकिन अब किसानों पर टिड्डी रूपी महा संकट आ खड़ा हुआ है जिस की ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए जिससे किसान आगे आने वाली सावनी की फसल को बुवाई कर सके.

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करौली जिले में टिड्डी पर नियंत्रण के लिए कृषि विभाग द्वारा चलाया जा रहा अभियान

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करौली: जिले में टिड्डी पर नियंत्रण के लिए कृषि विभाग द्वारा अभियान चलाया जा रहा है. अभियान के तहत देर रात सपोटरा तहसील के गोविंदपुरा व सलेमपुर क्षेत्र में पेड़, झाड़ीयों व अन्य स्थानों पर दमकल की मदद से दवा का स्प्रे किया गया. जिससे क्षेत्र में 90% से अधिक टिड्डी खत्म हो गई. अभियान के दौरान कृषि उपनिदेशक रामलाल जाट सहित कृषि विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे. 

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किसानों को ध्वनि यंत्र बजाकर भगाने की सलाह दी जा रही:
कृषि उपनिदेशक बीडी शर्मा ने बताया कि जिले में टिड्डी के प्रकोप से निपटने के लिए रणनीति बनाकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है. अभियान के तहत दमकल, ट्रैक्टर व अन्य उपकरणों के माध्यम से उनके विश्राम स्थल पर दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है. साथ ही दिन में किसानों को ध्वनि यंत्र बजाकर भगाने की सलाह दी जा रही है. जिसके चलते जिले में टिड्डी द्वारा फसल और पेड़ों को नुकसान ना के बराबर हुआ है. देर रात गोविंदपुरा सलेमपुर क्षेत्र में चलाए गए अभियान के दौरान 2 किलोमीटर सर्किल क्षेत्र में दवाओं का छिड़काव कर टिड्डियों को खत्म किया गया. दवाओं के छिड़काव के कारण क्षेत्र में जमीन पर टिड्डियों की चादर सी बिछ गई. 

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सहकारी समितियों में कोल्ड़ स्टोरेज, गोदाम एवं प्रोसेसिंग यूनिट की होगी स्थापना

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जयपुर: क्रय-विक्रय सहकारी समितियों एवं ग्राम सेवा सहकारी समितियों में कोल्ड स्टोरेज, गोदाम निर्माण, प्रोसेसिंग यूनिट सहित कृषि से जुड़ी अन्य गतिविधियों के लिए संयत्रों की स्थापना की जाएगी. समिति एवं क्षेत्रवार स्थितियों का आंकलन कर उपयोगिता के आधार पर प्रस्ताव प्राप्त किये जाएंगे. कृषि गतिविधियों की चेन सप्लाई सिस्टम को विकसित करने की दिशा में जो भागने बड़ा कदम उठाया है. 

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सभी सहकारी समितियों का 31 जुलाई तक डेटा होगा ऑनलाइन: 
आज पंत कृषि भवन में कृषि प्रसंस्करण, खरीफ फसली ऋण, उपज रहन ऋण योजना, एमएसपी पर सरसों एवं चना खरीद सहित अन्य बिन्दुओं पर जिला स्तर पर पदस्थापित अधिकारियो से वीडियो कान्फ्रेंसिग की गई. सहकारिता एवं कृषि विभाग के प्रमुख सचिव नरेश पाल गंगवार ने वीसी के जरिए कार्य योजना पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि राजस्थान सहकारी अधिनियम 2001, राजस्थान सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1958 तथा स्पोर्ट्स एक्ट के तहत पंजीकृत संस्थाओं का डेटा 31 जलाई तक ऑनलाइन कर दिया जाये. जिससे पारदर्शिता के साथ सूचनाऐं आमजन को मिल सके एवं बेहतर मॉनिटरिंग भी संभव हो सके. 

20 लाख किसानों को 6 हजार करोड़ का सहकारी फसली ऋण वितरित:
उन्होंने निर्देश दिए कि जिला उप रजिस्ट्रार प्राथमिकता के साथ इस कार्य को पूरा करें. फसली ऋण वितरण में ऑनलाइन प्रणाली अपनाने से अच्छे रिजल्ट आए है. इस प्रणाली के कारण दो माह में ही लगभग 20 लाख किसानों को 6 हजार 18 करोड़ रूपये का खरीफ फसली ऋण का वितरण किसानों को हो चुका है. उन्होंने निर्देश दिए कि नए किसानों को भी फसली ऋण प्रदान किया जाये तथा जो जिले अपने यहां फसली ऋण के लिए और नए किसानों को जोड़ना चाहते है. वे प्रस्ताव भेजें तो उन्हें अनुमति प्रदान की जाएगी. प्रमुख सचिव नरेश पाल गंगवार ने 50 प्रतिशत से कम ऋण वितरण वाले 5 जिलों के प्रबंध निदेशकों को सख्त लहजे में कहा कि 30 जून तक परफोमेंस सुधारे अन्यथा अनुशासत्मक कार्यवाही के लिए तैयार रहे. उन्होंने कहा कि फसली ऋण वितरण के दौरान कोविड़-19 गाइडलाइन का पालन करे. उन्होंने उपज रहन ऋण योजना में पात्र सहकारी समितियों को सक्रिय करें तथा योजना से और किसानों को जोडे.

एमएसपी पर चना खरीद के भारत सरकार द्वारा आवंटित लक्ष्य को पूरा करें: 
उन्होंने निर्देश दिए कि 30 जून तक पात्र समिति कम से कम एक किसान को उपज रहन ऋण प्रदान करे ताकि आने वाली सीजन में किसानों को लाभ मिल सके. उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों को गौण मंडी का दर्जा देने से किसानों एवं समितियों को फायदा हुआ है. इसे स्थायित्व दिया जाए. योजनाओं की जिलेवार बेहतर मॉनिटंरिग के लिए विभाग में पदस्थापित अधिकारियों को रिव्यू के लिए जिलों में भेजा जाएगा. उन्होंने खण्डीय अतिरिक्त रजिस्ट्रार को भी निर्देश दिए कि जिला अनुसार रिव्यू करें. गंगवार ने कहा कि एमएसपी पर चना खरीद के भारत सरकार द्वारा आवंटित लक्ष्य को पूरा करें ताकि अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिल सके. 

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बाजार में सरसों के भाव एमएसपी से ऊपर होने की वजह से खरीद केन्द्रों पर आवक कम: 
राजफैड की प्रबंध निदेशक सुषमा अरोड़ा ने कहा कि 2 लाख 91 हजार 936 किसानों से सरसों एवं चना की 7 लाख 36 हजार 186 मीट्रिक टन उपज खरीदी गई है. जिसकी राशि 3 हजार 452 करोड़ रूपये है. उन्होंने कहां कि बाजार में सरसों के भाव एमएसपी से ऊपर होने की वजह से खरीद केन्द्रों पर आवक कम है. जबकि चना की आवक ज्यादा है. उन्होंने निर्देश दिए कि उपज का समय पर उठाव करें एवं ईडब्लयूआर समय पर जनरेट करें. एफएक्यू मानक से खरीद नही होने पर संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. जो भी सहकारी समितियां अपने कार्य क्षेत्र में किसी प्रकार का नवाचार करना चाहती है या कृषि एवं कृषि उत्पादन से जुडी गतिविधियों के लिए चेन सप्लाई सिस्टम विकसित करना चाहती हैं तो इससे संबंधित प्रस्ताव विभाग को शीघ्र भिजवायें ताकि सरकार द्वारा जुडी योजनाओं का लाभ इन्हे मिल सके.

       

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