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आधी आबादी की अधूरी उम्मीदें, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर फर्स्ट इंडिया की स्पेशल रिपोर्ट

आधी आबादी की अधूरी उम्मीदें, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर फर्स्ट इंडिया की स्पेशल रिपोर्ट

जयपुर: दुनियाभर में हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों के साथ विश्व शांति को बढ़ावा देना है. हर साल एक खास थीम पर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन  किया जाता है.  अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पहली थीम 'सेलीब्रेटिंग द पास्ट, प्लानिंग फ़ॉर द फ्यूचर' थी. इस बार की थीम है- मैं जनरेशन इक्वेलिटी: महिलाओं के अधिकारों को महसूस कर रही हूं ..

सन 1909 में सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका द्वारा पहली बार पूरे अमेरिका में 28 फरवरी को महिला दिवस मनाया गया. सन 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल द्वारा कोपनहेगन में महिला दिवस की स्थापना हुई और 1911 में ऑस्ट्रि‍या, डेनमार्क, जर्मनी और स्विटजरलैंड में लाखों महिलाओं द्वारा रैली निकाली गई थी. जिसका मकसद नौकरी में भेदभाव खत्म करने से लेकर, सरकारी संस्थानों में समान अधिकार के साथ मताधिकार जैसे कई अहम मुद्दे थे.

1913-14 प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, रूसी महिलाओं द्वारा पहली बार शांति की स्थापना के लिए फरवरी माह के अंतिम रविवार को महिला दिवस मनाया गया..यूरोप भर में भी युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन हुए. 1917 तक विश्व युद्ध में रूस के 2 लाख से ज्यादा सैनिक मारे गए, रूसी महिलाओं ने फिर रोटी और शांति के लिए इस दिन हड़ताल की. हालांकि राजनेता इस आंदोलन के खिलाफ थे, फिर भी महिलाओं ने एक नहीं सुनी और अपना आंदोलन जारी रखा और इसके फलस्वरूप रूस के जार को अपनी गद्दी छोड़नी पड़ी साथ ही सरकार को महिलाओं को वोट देने के अधिकार की घोषणा भी करनी पड़ी.

International Women's Day: प्रदेश की महिलाओं को गहलोत सरकार की सौगात, नि:शुल्क बस यात्रा की सौगात

महिलाओं के प्रति हम सबकी सोच और नजरिये में पिछले कुछ दशकों में गजब का सकारात्मक बदलाव आया है. पर इन बदलावों का मलतब यह नहीं है कि पुरुष और महिलाएं बराबरी पर पहुंच गए हैं. समानता की यह लड़ाई अभी काफी लंबी चलनी है. दुनिया के कई देशों में आज भी महिलाएं अपने हक और अधिकार की लड़ाई लड़ रही हैं। इनमें अपना देश भारत भी शामिल है. इससे बड़ा दुख तो यह है कि आज भी अधिकांश महिलाएं अपने अधिकारों और हक के बारे में सही तरीके से जानती तक नहीं हैं, जबकि होना तो यह चाहिए कि महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में पूरी जानकारी रहनी चाहिए. महिला दिवस के मौके पर आइए जानें कि भारतीय संविधान भारत की महिलाओं को क्या-क्या अधिकार देता है.

गोपनीयता का अधिकार:
आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत बलात्कार की शिकार महिला जिला मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज करवा सकती है और जब मामले की सुनवाई चल रही हो तो वहां किसी और व्यक्ति को उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है. वैकल्पिक रूप से वह एक ऐसे सुविधाजनक स्थान पर केवल एक पुलिस अधिकारी और महिला कांस्टेबल के साथ बयान रिकॉर्ड कर सकती है, जो भीड़ भरा नहीं हो और जहां किसी चौथे व्यक्ति के बयान को सुनने की आशंका न हो. पुलिस अधिकारियों के लिए एक महिला की निजता को बनाए रखना जरूरी है. यह भी जरूरी है कि बलात्कार पीड़िता का नाम और पहचान सार्वजनिक ना होने पाए.

नि:शुल्क कानूनी सहायता का अधिकार
अमूमन भारत में जब भी महिला अकेले पुलिस स्टेशन में अपना बयान दर्ज कराने जाती है तो उसके बयान को तोड़- मरोड़ कर लिखे जाने का खतरा रहता है. कई ऐसे मामले भी देखने को मिले हैं, जिनमें उसे अपमान झेलना पड़ा और शिकायत को दर्ज करने से मना कर दिया गया. एक महिला होने के नाते आपको यह पता होना चाहिए कि आपको भी कानूनी मदद लेने का अधिकार है और आप इसकी मांग कर सकती हैं. यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह आपको मुफ्त में कानूनी सहायता मुहैया करवाए.

देर से भी शिकायत दर्ज करने का अधिकार:
बलात्कार या छेड़छाड़ की घटना के काफी समय बीत जाने के बावजूद पुलिस एफआईआर दर्ज करने से इंकार नहीं कर सकती है. बलात्कार किसी भी महिला के लिए एक भयावह घटना है, इसलिए उसका सदमे में जाना और तुरंत इसकी रिपोर्ट ना लिखवाना एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है. वह अपनी सुरक्षा और प्रतिष्ठा के लिए डर सकती है. इन बातों को ध्यान में रखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि बलात्कार या छेड़छाड़ की घटना होने और शिकायत दर्ज करने के बीच काफी वक्त बीत जाने के बाद भी एक महिला अपने खिलाफ यौन अपराध का मामला दर्ज करा सकती है.

सुरक्षित कार्यस्थल का अधिकार:
अधिक से अधिक महिलाओं के सार्वजनिक क्षेत्र में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु यह सबसे अधिक प्रासंगिक कानूनों में से एक है. प्रत्येक ऑफिस में एक यौन उत्पीड़न शिकायत समिति बनाना नियोक्ता का कर्तव्य है. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी एक दिशा-निर्देश के अनुसार यह भी जरूरी है कि समिति का नेतृत्व एक महिला करे और सदस्यों के तौर पर उसमें पचास फीसदी महिलाएं ही शामिल हों. साथ ही, समिति के सदस्यों में से एक महिला कल्याण समूह से भी हो. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप एक स्थायी कर्मचारी हैं या नहीं.

यहां तक कि एक इंटर्न, पार्ट-टाइम कर्मचारी, ऑफिस में आने वाली कोई महिला या ऑफिस में साक्षात्कार के लिए गई महिला का भी उत्पीड़न किया गया है तो वह भी इस समिति के समक्ष शिकायत दर्ज करवा सकती है. ऑफिस में उत्पीड़न की शिकार महिला घटना के तीन महीने के भीतर इस समिति को लिखित शिकायत दे सकती है. यदि आपकी कंपनी में दस या अधिक कर्मचारी हैं और उनमें से केवल एक महिला है तो भी आपकी कंपनी के लिए इस समिति का गठन करना आवश्यक है. हालांकि, ऐसी किसी दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थिति में, जहां यह समिति मौजूद नहीं है या आपको लगता है कि समिति आपका बचाव नहीं करेगी तो आप सीधे जिला स्तर पर मौजूद स्थानीय शिकायत समिति से संपर्क कर सकती हैं। जरूरी नहीं कि यह शिकायत आप ही करें. आपकी ओर से कोई दूसरा व्यक्ति भी यह शिकायत कर सकता है.

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जीरो एफआईआर का अधिकार
एक महिला को ईमेल या पंजीकृत डाक के माध्यम से शिकायत दर्ज करने का विशेष अधिकार है. यदि किसी कारणवश वह पुलिस स्टेशन नहीं जा सकती है, तो वह एक पंजीकृत डाक के माध्यम से लिखित शिकायत भेज सकती है, जो पुलिस उपायुक्त या पुलिस आयुक्त के स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को संबोधित की गई हो. इसके अलावा, एक बलात्कार पीड़िता जीरो एफआईआर के तहत किसी भी पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज कर सकती है। कोई भी पुलिस स्टेशन इस बहाने से एफआईआर दर्ज करने से इंकार नहीं कर सकता है कि वह क्षेत्र उनके दायरे में नहीं आता.

घरेलू हिंसा से सुरक्षा का अधिकार:
शादी नहीं टूटनी चाहिए, यह विचार भारतीय महिलाओं के जेहन में इतना जड़ें जमा चुका है कि वे अकसर बिना आवाज उठाए घरेलू हिंसा झेलती रहती हैं. आईपीसी की धारा 498-ए दहेज संबंधित हत्या की निंदा करती है. इसके अलावा दहेज अधिनियम 1961 की धारा 3 और 4 में न केवल दहेज देने या लेने, बल्कि दहेज मांगने के लिए भी दंड का प्रावधान है. इस धारा के तहत एक बार इस पर दर्ज की गई एफआईआर इसे गैर-जमानती अपराध बना देती है. शारीरिक, मौखिक, आर्थिक, यौन संबंधी या अन्य किसी प्रकार का दुर्व्यवहार धारा 498-एक के तहत आता है. आईपीसी की इस धारा के अलावा, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 भी महिलाओं को उचित स्वास्थ्य देखभाल, कानूनी मदद, परामर्श और आश्रय गृह संबंधित मामलों में मदद करता है.

इंटरनेट पर सुरक्षा का अधिकार
आपकी सहमति के बिना आपकी तस्वीर या वीडियो, इंटरनेट पर अपलोड करना अपराध है. किसी भी माध्यम से इंटरनेट या व्हाट्सएप पर साझा की गई आपत्तिजनक या खराब तस्वीरें या वीडियोज किसी भी महिला के लिए बुरे सपने से कम नहीं है. आपको उस वेबसाइट से सीधे संपर्क करने की आवश्यकता है, जिसने आपकी तस्वीर या वीडियो को प्रकाशित किया है. ये वेबसाइट कानून के अधीन हैं और इनका अनुपालन करने के लिए बाध्य भी. आप न्यायालय से एक इंजेक्शन आदेश प्राप्त करने का विकल्प भी चुन सकती हैं, ताकि आगे आपकी तस्वीरों और वीडियो को प्रकाशित न किया जाए. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 67 और 66-ई बिना किसी भी व्यक्ति की अनुमति के उसके निजी क्षणों की तस्वीर को खींचने, प्रकाशित या प्रसारित करने को निषेध करती  है. आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम 2013 की धारा 354-सी के तहत किसी महिला की निजी तस्वीर को बिना अनुमति के खींचना या साझा करना अपराध माना जाता है.

समान वेतन का अधिकार
समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 समान कार्य के लिए पुरुष और महिला को समान भुगतान का प्रावधान करता है। यह भर्ती व सेवा शर्तों में महिलाओं के खिलाफ लिंग के आधार पर भेदभाव को रोकता है।

कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार
मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 मानवीयता और चिकित्सा के आधार पर पंजीकृत चिकित्सकों को गर्भपात का अधिकार प्रदान करता है। लिंग चयन प्रतिबंध अधिनियम,1994 गर्भधारण से पहले या उसके बाद लिंग चयन पर प्रतिबंध लगाता है। यही कानून कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए प्रसव से पहले लिंग निर्धारण से जुड़े टेस्ट पर भी प्रतिबंध लगाता है। भू्रण हत्या को रोकने में यह कानून उपयोगी है।

भारतीय संविधान के कई प्रावधान विशेषकर महिलाओं के लिए बनाए गए हैं। इस बात की जानकारी महिलाओं को अवश्य होना चाहिए।
अनुच्छेद 14 - कानूनी समानता का अधिकार
अनुच्छेद 15 (3)-  में जाति, धर्म, लिंग एवं जन्म स्थान आदि के आधार पर भेदभाव न करना
अनुच्छेद 16 (1)- लोक सेवाओं में बिना भेदभाव के अवसर की समानता
अनुच्छेद 19 (1- समान रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 21- स्त्री एवं पुरुष दोनों को प्राण एवं दैहिक स्वाधीनता से वंचित न करना, अनुच्छेद 23-24 - शोषण के विरुद्ध अधिकार समान रूप से प्राप्त
अनुच्छेद 25-28- धार्मिक स्वतंत्रता दोनों को समान रूप से प्रदत्त
अनुच्छेद 29-30 -शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार
अनुच्छेद 32-संवैधानिक उपचारों का अधिकार
अनुच्छेद 39 (घ)-पुरुषों एवं स्त्रियों दोनों को समान कार्य के लिए समान वेतन का अधिकार
अनुच्छेद 40 -पंचायती राज्य संस्थाओं में 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से आरक्षण की व्यवस्था
अनुच्छेद 41-बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी और अन्य अनर्ह अभाव की दशाओं में सहायता पाने का अधिकार
अनुच्छेद 42- महिलाओं हेतु प्रसूति सहायता प्राप्ति की व्यवस्था
अनुच्छेद 47 - पोषाहार, जीवन स्तर एवं लोक स्वास्थ्य में सुधार करना सरकार का दायित्व है
अनुच्छेद 51 (क) (ड)-भारत के सभी लोग ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हों,
अनुच्छेद 33 (क) - प्रस्तावित 84वें संविधान संशोधन के जरिए लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था
अनुच्छेद 332 (क) - प्रस्तावित 84वें संविधान संशोधन के जरिए राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था है।

- गर्भावस्था में ही मादा भ्रूण को नष्ट करने के उद्देश्य से लिंग परीक्षण को रोकने हेतु प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 निर्मित कर क्रियान्वित किया गया। इसका उल्लंघन करने वालों को 10-15 हजार रुपए का जुर्माना तथा 3-5 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
-दहेज जैसे सामाजिक अभिशाप से महिला को बचाने के उद्देश्य से 1961 में 'दहेज निषेध अधिनियम' बनाकर क्रियान्वित किया गया। वर्ष 1986 में इसे भी संशोधित कर समयानुकूल बनाया गया।
-विभिन्न संस्थाओं में कार्यरत महिलाओं के स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रसूति अवकाश की विशेष व्यवस्था, संविधान के अनुच्छेद 42 के अनुकूल करने के लिए 1961 में प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम पारित किया गया। इसके तहत पूर्व में 90 दिनों का प्रसूति अवकाश मिलता था। अब 135 दिनों का अवकाश मिलने लगा है।

देश में इन अधिकारो के बावजूद पिछले तीन दशक के तीन केस ऐसे है...जिनके चलते आज फिर से देश में महिलाओं के अधिकारों और उनकी पालना के लिए सख्ती की मांग उठने लगी है..

केस 01
1991 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत तथा महिला-बाल विकास विभाग ने बाल विवाह रोकने के लिए अभियान चलाया था। साथिन के रूप में कार्यरत भंवरी भी अभियान से जुड़ी थी। उसने गांव में एक साल की बच्ची का विवाह रुकवाया। दबंगों को यह सहन नहीं हुआ तो उन्होंने सार्वजनिक तौर पर भंवरी को अपमानित करने के लिए 22 सितंबर, 1992 को सामूहिक दुष्कर्म किया। निचली अदालत ने सभी आरोपियों को बरी किया, कारण चौंकाने वाले थे। कोर्ट ने कहा था कि गांव का मुखिया दुष्कर्म नहीं कर सकता। अलग-अलग जाति के पुरुष गैंग रेप में शामिल नहीं हो सकते। एक पुरुष किसी रिश्तेदार के सामने रेप नहीं कर सकता (ये दलील चाचा-भतीजे की जोड़ी के संदर्भ में दी गई थी)। भंवरी केस में पुलिस और प्रशासन के रवैये के खिलाफ राज्य के विशाखा, महिला पुनर्वास समूह, आरवीएचए, जागोरी और काली फॉर वुमन संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। कार्यस्थल पर महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा को लेकर सख्त निर्देश जारी करने सहित 5 मांगें की। 13 अगस्त 1997 काे सुप्रीम कोर्ट ने विशाखा गाइडलाइन जारी की। भंवरी से हुए दुष्कर्म को भी कार्यस्थल पर यौन हिंसा माना।


भंवरी के ये तीन जख्म, आज भी ताजा

1 आरोपी 5 थे, 4 की मौत : भंवरी से दुष्कर्म मामले में पिछले 25 साल में हाईकोर्ट में सिर्फ एक बार सुनवाई हुई है। फैसला आने से पहले 5 में से 4 आरोपियों की मौत हो चुकी है।
2 गांव में बहिष्कार : भंवरी को गांव के किसी सामाजिक आयोजन और शादी-ब्याह में आज तक कोई न्योता नहीं दिया जाता।

3 भेदभाव की शिकार : बीसलपुर पेयजल योजना के तहत भटेरी गांव में हाल ही पाइप लाइन डाली गई है लेकिन भंवरी के कारण पूरे मोहल्ले को वंचित करवा दिया गया।

साल 1997 में सुप्रीम ने कोर्ट विशाखा गाइडलाइंस जारी किए जिसके तहत वर्क प्लेस पर यौन उत्पीड़न से महिलाओं की सुरक्षा के लिए नियम कायदे बनाए गए.

2013 में संसद ने विशाखा जजमेंट की बुनियाद पर दफ्तरों में महिलाओं के संरक्षण के लिए एक कानून पारित किया.

केस 02

निर्भया केस आज और कल

16 दिसंबर 2012 की रात को दिल्ली में ऐसा अनर्थ हुआ कि पूरा देश महिलाओं की सुरक्षा के लिए सड़क पर आ गया. आज निर्भया केस को 7 साल से ज्यादा वक्त हो चुका है लेकिन आज भी देश का हर व्यक्ति दोषियों की फांसी का इंतजार कर रहा है. .

इस घटना के बाद देशभर में आंदोलन की आग फैल गई. पूरा देश बलात्कारियों के लिए मृत्युदंड की मांग करने लगा. संसद में इसे लेकर जमकर हंगाम हुआ. दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा था कि उनमें इतनी हिम्मत नहीं कि वो पीड़ित लड़की को देखने जा सकें..सिंगापुर के माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल में 29 दिसंबर 2016 को निर्भया ने रात के करीब सवा दो बजे दम तोड़ दिया था.पुलिस ने मामले में 80 लोगों को गवाह बनाया था. सुनवाई हो रही थी. मगर इसी बीच 11 मार्च, 2013 को आरोपी बस चालक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली....एक नाबालिग को सुधार के लिए भेज दिया गया और बाकी चार आरोपियों ने अदालत की कार्यवाही का जिस तरह से प्रयोग किया है उससे महिला वर्ग में विश्वास पैदा होने की जगह एक अजीब से कश्मकश ने ली है....

केस 3
उत्तर प्रदेश के उन्नाव शहर में 4 जून 2017 को 17 वर्षीय लड़की का कथित सामूहिक बलात्कार हुआ । इसे ही उन्नाव बलात्कार मामला के रूप में संदर्भित किया जाता है। मामले में अब तक दो अलग-अलग आरोप पत्र दायर किए गए हैं। दोनो मामलो में कुलदीप सिंह के अलावा उनके भाई, तीन पुलिसकर्मियों और पाँच अन्य लोगों के खिलाफ दायर किये गये....केस की सुनवाई के दौरान ही पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो जाती है....ट्रक की टक्क्रर में पीड़िता घायल हो जाती है और उसके दो परिजनो की मौत हो जाती है...पीड़िता को अपनी मदद के लिए देश के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मदद मांगनी पड़ती है....हाल ही में इस केस के मुख्य आरोपी सेंगर को सजा दी गयी है

दुष्कर्म पीड़िताओं के लिए जिंदगी का सबसे बुरा वक्त दुष्कर्म होना होता है लेकिन इससे बदतर एक दुष्कर्म पीड़िता के लिए मुश्किले तब कई गुना बढ जाती है जब उसे जबरन दुष्कर्म से पैदा हुए भ्रूण अपनी कोख में जन्म देने के लिए बाध्य किया जाता है.ये भले ही कानूनी रूप में ही सही लेकिन कोई भी दुष्कर्म पीड़िता नही चाहती कि उसका ये दर्द ताउम्र उसके साथ रहे. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर अलग अलग हाईकोर्ट ने ऐसे मामलो में थोडी पहल की है लेकिन अभी भी ये नाकाफी है.लेकिन उम्मीद हमेशा बनाए रखनी चाहिए.

अभी तक हम समझा ही नही पाए, प्रजनन के अधिकार
देश में जब हम प्रजनन अधिकारों की बात करते हैं तब पाते हैं कि इसका चुनाव करना महिला के पास कम ही होता है। आश्चर्य है कि 21 वीं शताब्दी में भी हम महिलाओं को मानवता का फल दिलाने में सक्षम नहीं हो सके. देश में आज भी बच्चे पैदा करना, गर्भपात कराना या गर्भधारण रोकना एक महिला तय नही कर सकती.आज भी इन अधिकारो के लिए महिलाओं का संघर्ष जारी है.प्रजनन का अधिकार वास्तव में मानवाधिकार है और यह इंसान के मान-सम्मान पर आधारित है। जब हम प्रजनन अधिकारों की बात करते हैं तब इससे महिलाओं का एक अन्य अधिकार जुड़ता है और वह है सेक्सुअल अधिकार. भारत में परिवार में कब बच्चा हो यह पति की पसंद या बुजुर्गों के कहने पर होता है. साथ ही यह भी कि लड़का हो या लड़की. उन्होंने कहा कि जब हम समानता की बात करते हैं तब महिला को अपने पार्टनर के साथ मिलकर फैसला लेने का अधिकार होना चाहिए.
 
हमारे देश में प्राचीन काल में महिलाओं की स्थिति वर्तमान से ज्यादा बेहतर रही है...शास्त्रों में उनका दर्जा उच्च रहा. प्राचीन काल में महिलाओं को ये अधिकार था कि वे स्वयंवर के जरिए खुद का साथी चुने..यहां तक कि कुंती  

महिलाओं के प्रजनन के अधिकार

- इन अधिकारो के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार
-मां बनने का अधिकार-अकेले मां बनना या परिवार में रहने का अधिकार
-यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच,
- गर्भनिरोधक की संपूर्ण जानकारी और उपलब्धता
-कब और किसे शादी करनी है चुनने का अधिकार
-बच्चे कब और कितने चाहते हैं ये तय करने का अधिकार।
-जबरन गर्भधारण के गर्भपात का अधिकार
-जीवन जीने का अधिकार, स्वास्थ्य का अधिकार, निजता का अधिकार

विश्व
-विश्व में प्रतिदिन गर्भावस्था और प्रसव के चलते 800 महिलाओं की मौत होती है
-प्रतिवर्ष 15 से 19 वर्ष की उम्र की 1.6 करोड़ युवतियों के प्रसव हो रहे है
- 15 वर्ष से कम उम्र की करीब 10 लाख लड़कियों के प्रसव होते है
-प्रतिवर्ष 4.5 करोड़ गर्भपात किये जाते है जिसमें से 1.9 करोड़ असुरक्षित गर्भपात होते है
-40 प्रतिशत गर्भपात के मामले में 25 वर्ष से कम उम्र की महिलाओे के होते है
- असुरक्षित गर्भपात से प्रतिवर्ष 68 हजार से अधिक महिलाओं की मौते होती है

भारत
-प्रत्येक 12 मिनट में 1 महिला की मौत असुरक्षित गर्भपात की वजह से होती है
-33 प्रतिशत गर्भपात की घटनाए बिना योजना के होती है
-ग्रामीण क्षेत्रो में गर्भनिरोधक के उपाय कम प्रयोग करने के चलते ग्रामीण क्षेत्र ज्यादा प्रभावित है
- सख्त कानून के बावजूद देश में बाल विवाह होना महिला अधिकारो के हनन का सबसे बड़ा कारण है
- पुत्र प्राप्ति के लिए जबरन गर्भधारण करना और पुत्री होने की स्थिती में जबरन गर्भपात कराना भी एक बड़ी वजह।

क्या हो सकता है..

-ग्रामीण क्षेत्र में प्री नेटल क्लीनिक/ गल्र्स क्लीनिक स्थापित करना.
- विवाहित महिलाओं को जबर्दस्ती गर्भावस्था होने पर पति की मंजूरी के बिना अपनी गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए.
-राज्य सरकारे गर्भवती महिलाओं को स्तनपान की अवधि तक मुफ्त दवाएं प्रदान करे.
-असुरक्षित गर्भपात की निरंतर जाँच की जानी चाहिए.
- जागरूकता के लिए शिक्षा में यौन शिक्षा के अध्याय शामिल करना.
-न्यायपालिका, परिवार और सरकार को संवेदनशील बनाए रखने के लिए निरंतर कार्यक्रम.
-परिवार में हर महिला अपने बच्चो को शुरूआत से ही महिलाओं का सम्मान करने के लिए प्रोत्साहित करे.

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आईपीएस लांबा द्वारा आसाराम पर लिखी किताब पर लगी रोक हटी, दिल्ली हाईकोर्ट ने डीजे कोर्ट के एकतरफा फैसले को किया रद्द

आईपीएस लांबा द्वारा आसाराम पर लिखी किताब पर लगी रोक हटी, दिल्ली हाईकोर्ट ने डीजे कोर्ट के एकतरफा फैसले को किया रद्द

जयपुर: आईपीएस अजयपाल लांबा द्वारा बहुचर्चित आसाराम केस पर लिखी पुस्तक गनिंग आफ गॉडमेन पर लगी रोक दिल्ली हाईकोर्ट ने हटा दी है.दिल्ली हाईकोर्ट ने हार्पर कॉलिंस पब्लिकेशन को आसाराम पर किताब छापने की छूट देते हुए निचली अदालत के आदेश केा रद्द कर दिया है.गौरतलब है कि 9 अगस्त को दिल्ली की एक डीजे कोर्ट ने आसाराम मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में अपील लंबित रहने के चलते पुस्तक के प्रकाशन पर रोक लगा दी थी.जिसे हार्पर कॉलिंस की ओर से अपील दायर कर हाईकोर्ट में चुनौति दी गई. 

जस्टिस नाजिमि वजीरि की एकलपीठ ने दिए आदेश:
जस्टिस नाजिमी वजिरी की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद कुछ शर्तो के साथ पुस्तक के प्रकाशन की अनुमति दी है.प्रकाशन के दौरान हार्पर कॉलिंस को एक फ्लायर छापना होगा, जिस पर लिखा होगा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ संचिता गुप्ता की अपील राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित है, और किताब की प्रतियों को बेचते हुए यह जानकारी वाला फ्लायर किताब में आगे या पीछे के कवर के पीछे लगाना होगा.आनलाइन प्रति पर इलेक्ट्रोनिक माध्यम से ये सूचना देनी होगी.

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IPS अजयपाल लाम्बा द्वारा लिखी गई है पुस्तक:
गौरतलब है कि गनिंग फॉर द गॉडमैन द ट्रू स्टोरी बिहाइंड आसाराम बापू कन्विक्शन जयपुर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अजय लांबा और संजीव माथुर ने लिखी है. इस किताब का विमोचन 5 सितंबर को होना था. लेकिन इससे पूर्व ही 4 सितंबर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने यौन शोषण के पुस्तक को सुनवाई की अगली तारीख तक प्रकाशित करने पर रोक लगा दी थी.अतिरिक्त जिला न्यायाधीश आरएस मीणा ने याचिकाकर्ता संचित गुप्ता की ओर से दायर किये गये सूट पर ये आदेश दिये थे.

दीया मिर्जा बोलीं, मैंने​ जिदंगी में कभी ड्रग नहीं ली, मेरी छवि को खराब करने की कोशिश 

दीया मिर्जा बोलीं, मैंने​ जिदंगी में कभी ड्रग नहीं ली, मेरी छवि को खराब करने की कोशिश 

मुंबई: बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा ने कहा कि मैंने जिंदगी में कभी ड्रग नहीं ली है. जो भी खबरें चल रही है पूरी तरह से झूठी है. इसके आधार पर मेरी छवि खराब करने की कोशिश हो रही है. मैं कानूनी लड़ाई लड़ूंगी. आपको बता दें कि ड्रग्स मामले में नाम आने पर अभिनेत्री दीया मिर्जा ने यह सफाई दी है. उन्होंने एक के बाद एक 3 ट्वीट्स किए.

दीया मिर्जा ने इस खबर को किया खारिज:
अभिनेत्री दीया मिर्जा ने कहा कि मैं इस खबर को सिरे से खारिज करती हूं. क्योंकि यह गलत, निराधार और गलत इरादों के साथ किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस तरह की तुच्छ रिपोर्टिंग से मेरी प्रतिष्ठा पर सीधा प्रभाव पड़ता है. मेरे करियर को नुकसान पहुंचा रहा है, जो मैंने सालों तक मेहनत करके बनाया है. दीया मिर्जा ने कहा कि मैंने अपने जीवन में कभी भी न तो ड्रग्स खरीदी है और न ही इसका सेवन किया है. मैं कानूनी रास्ता अपनाऊंगी. मेरे साथ खड़े लोगों का धन्यवाद.

दीपिका पादुकोण का नाम भी आ चुका है सामने:
इससे पहले ड्रग्स मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का नाम भी नाम सामने आ चुका है. खबरों की माने तो दीपिका के ड्रग्स कनेक्शन के बाद अब उनकी चैट भी सामने आ चुकी है, जिसके बाद माना जा रहा है कि अब दीपिका की मुश्किले भी बढ़ सकती हैं. आपको बता दें कि एनसीबी हर रोज ड्रग्स मामले में नए नए खुलासे कर रही है.

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रिया ने लिया था 25 लोगों का नाम :
ड्रग्स मामले में अभिनेत्री सारा अली खान, श्रद्धा कपूर, रकुल प्रीत सिंह से भी पूछताछ हो सकती है. अभिनेत्रियों को एनसीबी की ओर से उन्हें समन भेजा जा सकता है. दरअसल, एनसीबी का दावा है कि सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती ने इन चारों एक्ट्रेस का नाम लिया था. रिया चक्रवर्ती ने एसीबी से पूछताछ के दौरान फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े 25 लोगों को नाम लिया था. ऐसे में अब एनसीबी इस मामले को पूरी तरह से सुलझाने के लिए जांच में जुटी गई है. दरअसल, एनसीबी का दावा है कि सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती ने इन चारों एक्ट्रेस का नाम लिया था.

कल से चलेगी उत्तर-पश्चिम रेलवे की पहली क्लोन ट्रेन, आश्रम एक्सप्रेस से करीब डेढ़ घंटे पूर्व होगी संचालित

कल से चलेगी उत्तर-पश्चिम रेलवे की पहली क्लोन ट्रेन, आश्रम एक्सप्रेस से करीब डेढ़ घंटे पूर्व होगी संचालित

जयपुर: उत्तर-पश्चिम रेलवे की पहली क्लोन ट्रेन बुधवार से शुरू होगी. अहमदाबाद से दिल्ली के बीच में यह सुपरफास्ट स्पेशल क्लोन ट्रेन सप्ताह में 2 दिन संचालित होगी. अहमदाबाद से ट्रेन रविवार और बुधवार को चलेगी. जबकि दिल्ली से ट्रेन सोमवार और गुरुवार को संचालित होगी. हालांकि रेलवे प्रशासन ने इसे यात्रियों के लिए सुविधाजनक और बेहतर ट्रेन बताया है. लेकिन ट्रेन पहले ही फेरे में यात्रियों के लिए थोड़ी महंगी साबित हो रही है. आमतौर पर क्लोन ट्रेन का कंसेप्ट यह होता है, कि जिस ट्रेन में वेटिंग ज्यादा होती है. उसके वेटिंग वाले यात्रियों को बुकिंग के समय यात्रियों से विकल्प लेकर क्लोनट्रेन में एकोमोडेट किया जाता है. लेकिन इस ट्रेन में यात्रियों को अलग से टिकट बुक करनी होगी.

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हालांकि ट्रेन का किराया होगा आश्रम एक्सप्रेस से ज्यादा:
हालांकि जिस राजधानी ट्रेन का क्लोन ट्रेन इसे बताया जा रहा है, उसमें पहले से ही सीटें खाली चल रही हैं. राजधानी के अपेक्षाकृत आश्रम एक्सप्रेस में वेटिंग ज्यादा है. उदाहरण के लिए 24 सितंबर को जयपुर से अहमदाबाद जाने वाली राजधानी ट्रेन में थर्ड एसी में मात्र 2 वेटिंग है, जबकि आश्रम एक्सप्रेस में वेटिंग 15 तक पहुंची हुई है. वहीं यात्रियों की सुविधा के लिए चलाई गई क्लोन ट्रेन में भी वेटिंग 10 पहुंच रही है. आश्रम एक्सप्रेस में थर्ड एसी का किराया 1005 रुपए है, जबकि क्लोन ट्रेन में किराया 1145 रुपए रखा गया है.

यह रहेगा क्लोन ट्रेन का शेड्यूल
- अहमदाबाद-दिल्ली-अहमदाबाद द्वि-सप्ताहिक सुपरफास्ट स्पेशल क्लोन ट्रेन
- ट्रेन 09415 अहमदाबाद-दिल्ली सुपरफास्ट स्पेशल 23 सितंबर से होगी शुरू
- प्रत्येक रविवार और बुधवार को अहमदाबाद से शाम 5:40 बजे रवाना होगी
- रात 2:55 बजे जयपुर पहुंचकर 3:05 बजे दिल्ली के लिए रवाना होगी
- ट्रेन 09416 दिल्ली-अहमदाबाद सुपरफास्ट 24 सितंबर से शुरू होगी
- प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को दिल्ली से दोपहर 2:20 बजे रवाना होगी
- शाम 7 बजे जयपुर पहुंचकर 7:10 बजे अहमदाबाद के लिए जाएगी
- ट्रेन में 12 थर्ड एसी और 4 स्लीपर क्लास कोच लगेंगे

...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की रिपोर्ट

Rajasthan Corona Update: पिछले 24 घंटे में 15 मौत, 1912 नए पॉजिटिव केस, जयपुर में मिले 398 नए संक्रमित 

Rajasthan Corona Update: पिछले 24 घंटे में 15 मौत, 1912 नए पॉजिटिव केस, जयपुर में मिले 398 नए संक्रमित 

जयपुर: राजस्थान में लगातार कोरोना वायरस के मामले बढ़ते जा रहे है. पिछले 24 घंटे में 15 मरीजों की मौत हो गई. जबकि 1912 नए पॉजिटिव केस सामने आये है. अजमेर में एक, अलवर में एक, बांसवाड़ा में एक, बाड़मेर में एक,भरतपुर में एक, चित्तौडगढ़ में एक, डूंगरपुर में एक, जयपुर में दो, जैसलमेर में एक, जोधपुर में एक, पाली में एक, सीकर में एक, टोंक में एक और उदयपुर में एक मरीज की मौत हो गई. प्रदेश में कोरोना की चपेट में आने से अब तक 1367 मरीजों की मौत हो चुकी है. वहीं कुल पॉजिटिव मरीजों की संख्या 1 लाख 18 हजार 793 पहुंच गई है.

जयपुर में मिले सर्वाधिक 398 संक्रमित:
जयपुर में सर्वाधिक 398 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले है. अजमेर 88, अलवर 93, बांसवाड़ा 10, बारां 10, बाड़मेर 16, भरतपुर 34 पॉजिटिव, भीलवाड़ा 83, बीकानेर 67, बूंदी 8, चित्तौडगढ़ 26, चूरू 35, दौसा 32 पॉजिटिव, धौलपुर 11, डूंगरपुर 57, श्रीगंगानगर 29, हनुमानगढ़ 22, जयपुर 398 पॉजिटिव, जैसलमेर 9, जालोर 92, झालावाड़ 20, झुंझुनूं 35 ,जोधपुर 303 पॉजिटिव, करौली 18, कोटा 43, नागौर 52, पाली 83, प्रतापगढ़ 6, राजसमंद 31 पॉजिटिव, सवाई माधोपुर 15, सीकर 18, सिरोही 35,  टोंक 31, उदयपुर 102 पॉजिटिव सामने आये है. 

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पॉजिटिव से नेगेटिव हुए कुल मरीज 98812:
राजस्थान में कुल 98 हजार 812 लोग इलाज के बाद पॉजिटिव से नेगेटिव हुए है. वहीं अब तक 97 हजार 448 लोग अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए है. कुल 18 हजार 614 मरीज अस्पताल में उपचाररत है. कुल कोरोना पॉजिटिव प्रवासियों की संख्या 9 हजार 968 पहुंच गई है.

नदी में नहाने गए दो किशोरों की डूबने से हुई मौत, पुलिस ने कई घंटों की  मशक्कत के बाद शवों को निकाला बाहर 

नदी में नहाने गए दो किशोरों की डूबने से हुई मौत, पुलिस ने कई घंटों की  मशक्कत के बाद शवों को निकाला बाहर 

सिरोही: प्रदेश सिरोही जिले के मंडार थाना क्षेत्र के जामठा गांव मके पास चलने वाली नदी में नहाने गए दो किशोरों की डूबने से मौत हो गई. सूचना मिलने पर रेवदर डिप्टी नरेन्द्रसिंह देवड़ा और मंडार थानाधिकारी भंवरलाल चौधरी मौके पर पहुंचे, और खुद ही दोनों अधिकारियों ने वर्दी उतार कर नदी में गोता लगाकर कई घण्टों की मशक्कत के बाद दोनों शवों को बाहर निकाला.

पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंपा:
शवों को मंडार अस्पताल की मोर्चरी में लाया, जहां उनका पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिए.दोनों ही मृतक किशोर आपस में मामा बुआ के बेटे भाई हैं.जामठा निवासी मकाराम ने पुलिस को रिपोर्ट देकर बताया कि नदी में बजरी खनन के लिए लीज धारक ने नदी में जेसीबी व पोकलैंड मशीनें लगाकर करीब 40 फिट गहरे खड्डे खोद रखे हैं.जिसमें नदी का पानी जमा होने से उसके पोते व नाती की मौत हो गई हैं.

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ग्रामीणों का आरोप: 
उन्होंने इन दोनों किशोरों की मौत का जिम्मेदार खनिज विभाग सिरोही व लीज धारक को ठहराते हुए उन पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करवाने की गुहार लगाई हैं.वहीं जामठा गांव के ग्रामीणों ने भी इस हादसे के लिए बजरी खनन कर्ताओं व खनिज विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए कई आरोप लगाए हैं.

राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा-प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर आमजन संस्कारित होगा

राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा-प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर आमजन संस्कारित होगा

जयपुर: राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है की बहुविषयी शिक्षा, संपूर्ण विकास, जड़ से जग तक और मानव से मानवता तक की बात राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में समावेशित है. नई शिक्षा नीति में आधुनिक शिक्षा से प्राचीन भारतीय ज्ञान को जोड़ने से आमजन संस्कारित होगा. शिक्षा के साथ संस्कार का होना जरूरी है. विश्व धरोहर के लिए देश की समृद्ध विरासतों को न केवल भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित किया जाना जरूरी है, बल्कि हमारी शिक्षा प्रणाली के जरिए इन्हें बढ़ाना और इन्हें नए तरीके से उपयोग में लाना भी जरूरी है.

भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ाने वाली है नई शिक्षा नीति:
125 वर्षों के बाद भारतीयता पर यह शिक्षा नीति बनी है, जो आज के संदर्भ में ज्ञान की प्राचीन परंपरा को बताएगी. राज्यपाल ने नई शिक्षा नीति को भारतीयता और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ाने वाली बताया है. राज्यपाल ने ये विचार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अंतर विश्वविद्यालयी अध्यापक शिक्षा केंद्र द्वारा आयोजित वेबिनार के दौरान व्यक्त किए. वेबिनार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: प्राचीन ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक शिक्षा विषय पर आयोजित की गई. राजभवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वेबिनार को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत की सोच व्यापक रही है.

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प्राचीन काल में शिक्षा का मूल उद्देश्य रहा है ज्ञान की प्राप्ति:
विश्व गुरु का स्थान भारत ने ज्ञान से ही प्राप्त किया था. भारत की ज्ञान परंपरा इतनी समृद्ध है कि वह पुस्तकों के जलाने और पुस्तकालयों को समाप्त करने से भी समाप्त नहीं हो पाई. प्राचीन काल में शिक्षा का मूल उद्देश्य ज्ञान की प्राप्ति रहा है. प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा की आवश्यकता को पूरा विश्व महसूस करता रहा है. हमारा देश उच्च मानवीय मूल्यों और विशिष्ट वैज्ञानिक परंपराओं का देश रहा है. भारत की संस्कृति रही है कि भारत ने दुनिया को अलग-अलग देश के रूप में नहीं बल्कि एक परिवार के रूप में माना है. इस सदी के उत्तरार्द्ध से पश्चिमी सभ्यता वाले देश भारतीय संस्कृति और सभ्यता को अपनाने और जानने पर जोर देने लगे हैं. हमें और हमारी भावी पीढ़ियों को भारत के प्राचीन मूल्यों को यथोचित महत्व देना होगा. समारोह को रजनीश कुमार शुक्ल, सच्चिदानंद जोशी विनोद कुमार त्रिपाठी और आरपी शुक्ल ने भी संबोधित किया.

...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की रिपोर्ट