जन्माष्टमी की शुभकामनाएं-देशभर में उल्लास का माहौल, PM मोदी और राष्ट्रपति ने दी बधाई

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/24 10:50

जयपुर  जन्‍माष्‍टमी आज देश भर में धूमधाम से मनाई जा रही है. श्रीकृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी (Janmashtami) का पूरे भारत में विशेष महत्‍व है. कृष्ण के भक्त देश ही नहीं दुनिया भर में हैं.वैसे पिछले कई दिनों से कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी (Krishna Janmashtami) की तिथि को लेकर लोग असमंजस में थे क्‍योंकि अष्‍टमी त‍िथि 23 अगस्‍त जबकि रोहिणी नक्षत्र 24 अगस्‍त को पड़ रहा था. लेकिन फिर धीरे-धीरे साफ हो गया कि व्रत वाली जन्‍माष्‍टमी 23 अगस्‍त को ही मनाई जानी चाहिए.ऐसे में आज मंदिरों से लेकर घरों तक में श्रीकृष्‍ण जन्‍मोत्‍सव की धूम है जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के हर हिस्से में कृष्ण जन्माष्टमी धूम धाम से मनाई जा रही है.इस बार जन्माष्टमी पर वैसी ही ग्रह स्थिति है, जैसी श्री कृष्ण के जन्म के समय बनी थी. देश के अलग-अलग हिस्सों में भगवान कृष्ण की झांकियां सजाई जा रही हैं. साथ ही इस अवसर पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी देशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं.

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने ट्वीट किया, जन्माष्टमी के अवसर पर सभी देशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं. भगवान श्री कृष्ण ने 'निष्‍काम कर्म' अर्थात् फल की इच्छा किए बिना कर्म करने का संदेश दिया है. मेरी कामना है कि यह त्योहार सबके जीवन में हर्ष-उल्लास और उमंग लाएं.कृष्ण जन्मोत्सव के इस मौके पर मनोरंजन, खेल, राजनीति हर वर्ग के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. हालांकि देश में यह त्योहार 23 और 24 दोनों दिन मनाया जा रहा है. . 

भविष्य पुराण के अनुसार द्वापर युग में जब भगवान कृष्ण का मथुरा में कंस के कारागार में अवतार हुआ उस समय रोहिणी नाम का नक्षत्र था, वृष राशि के उच्च राशि में चंद्रमा सिंह राशि में सूर्य देव विचरण कर रहे थे, भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष, अष्टमी तिथि को निशीथ बेला में मध्य रात्रि में भगवान का जन्म हुआ थ. आज वही रोहिणी नक्षत्र पुन: जन्म के समय आ गया है। ग्रह स्थिति भी उसी प्रकार की आ गई है

पूजा का विधान
कृष्ण जन्माष्टमी तिथि को प्रात: काल ब्रह्म मुहूर्त में जाग कर स्नान आदि से निवृत्त होकर जन्मोत्सव व्रत करूंगा इस तरह से संकल्प करके पूजन की सभी सामग्री एकत्र करें अपने घर में झांकियां भी बनाएं, रोली चावल, नाना प्रकार के पुष्प, खीरा, पांच प्रकार के फल, केले के पत्ते खिलौने, खरबूजे की मिर्गी और गोला का पाग बनाएं, पंजीरी, पंचामृत बनाएं, पान, सुपारी, धूप-दीप नैवेद्य प्रस्तुत करें। व्रत के दिन बार-बार जलपान नहीं करें, तांबूल (पान) भक्षण नहीं करें, झूठ नहीं बोलें, नाखून नहीं काटें, दिन में शयन नहीं करें, किसी की निंदा नहीं करें। जब रात का 12:00 बजने का समय आए, उससे पूर्व एक खीरे में भगवान श्रीकृष्ण को बैठाए
वेद मंत्र, पद्य आदि बोलते हुए भगवान का 12:00 बजे जन्म करें और पंचामृत में स्नान कराएं

अभिषेक के समय इस मंत्र का जाप करते रहें
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:
ॐ कृं कृष्णाय नम:

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