अंधेरे में आधा जयपुर, मेयर विष्णु लाटा ने लिखा जेडीए की पोल खोलता पत्र

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/07 03:26

जयपुर। जिन अधिकारियों के पास राजधानी को सुंदर और विकसित करने की जिम्मेदारी है। वह अधिकारी किस तरह शहर के साथ मजाक कर रहे हैं इसकी पोल खुल गई है...मेयर विष्णु लाटा के एक लेटर से खुलासा हुआ है कि जयपुर में इस समय 3000 से अधिक रोड लाइट्स खराब पड़ी हैं। जानिए इस रिपोर्ट में-

अंधेरे में आधा जयपुर-

जयपुर में बीते कुछ सालों से स्मार्ट सिटी कॉन्सपेट खूब चर्चा में है...चाहे जेडीए हो या नगर निगम या फिर स्मार्ट सिटी लिमिटेड सभी संस्थान अलग अलग तरीको और कामों से जयपुर को स्मार्ट सिटी बनाने का दावा करते रहे हैं,लेकिन अभी भी राजस्थान की राजधानी को स्मार्ट नहीं मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है। मेयर विष्णु लाटा ने जेडीसी को एक लेटर लिखा है इस लेटर से स्मार्ट सिटी के दावों की तो पोल खुली ही है। जेडीए के अधिकारी और इंजीनियर किस लापरवाही और मिलीभगत से काम कर रहे हैं यह भी साफ़ हुआ है। शहर में इस समय 3000 से अधिक रोड लाईट्स जल ही नहीं रही हैं।

जी हाँ आंकड़ा देख कर चौंकिए मत... इस आंकड़े का मतलब है कि आधा जयपुर तो अंधेरे में है। जेडीए के क्षेत्रधिकार में लंबे समय से ख़राब पड़ी रोड लाइटों की सूची मेयर ने जेडीसी को भेजी है। रोड लाईट्स को सही करने को लेकर आमतौर पर निगम और जेडीए आमने सामने होते रहे हैं यही कारण है कि मेयर ने इस बार किस इलाके में कितनी लाईट्स खराब है इसकी सूची ही जेडीए को भेज दी है। इतनी बड़ी तादाद में रोड लाइटस खराब होने से जेडीए की पूरी व्यवस्था ही कटघरे में आ गई है। क्योंकि जेडीए जब इतनी राशि खर्च कर रोड लाईट्स लगवाता है तो इतने कम समय में ही रोड लाईट्स खराब क्यों हो रही हैं। 

इतना ही नहीं जेडीए की विधुत शाखा में इंजीनियरों की भरमार है इसके बाद भी इतनी रोड लाईट्स खराब होना बताता है कि अधिकारियों की प्राथमिकता में जनता की सुविधा है ही नही...ऐसा नहीं है कि जेडीए को इन खराब रोड लाईट्स के बारे में जानकारी मेयर के लेटर से ही मिली हो, क्योंकि हर रोज परेशान लोग लाइटस को सही करने के लिए जेडीए में शिकायत करते हैं, लेकिन कभी निगम पर तो कभी दूसरे विभागों पर जिम्मेदारी डाल कर जेडीए लोगों को गुमराह कर रहा है।

जेडीए की खुली पोल

फर्स्ट इंडिया ने जब ख़राब रोड लाईट्स के कारणों की पड़ताल की है तो सामने आया है कि जेडीए के इंजीनियर पेमेंट तो महंगे से महंगे उपकरणों का कराते हैं, लेकिन मौके पर घटिया किस्म के पोल और लाईट्स लगाई जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि बहुत जगह तो लगने के 3 दिन बाद ही रोड लाईट्स ख़राब हो रही हैं। इतना ही नहीं एक बार रोड लाईट्स लगने के बाद जेडीए के इंजीनियर इतने लापरवाह हो जाते हैं कि रोड लाईट्स किस अवस्था में हैं यह जानने की कोशिश ही नहीं होती है। 

जेडीए के इंजीनियरों की लापरवाही का खामियाजा जयपुर शहर और यहाँ की जनता को उठाना पड़ रहा है। रोड लाईट्स खराब होने से जहाँ पर्यटकों की नज़र में जयपुर की इमेज़ ख़राब हो रही है तो वहीं कई इलाकों में अपराधों के होने का कारण भी रोड लाईट्स की ख़राबी ही है। धार्मिक स्थलों पर भी बड़ी तादाद में रोड लाइटें खराब पड़ी हुई हैं। 

किस इलाक़े में कितनी रोड लाईट्स ख़राब है

1-घाट की गूणी टनल में 500 रोड लाईट्स ख़राब पड़ी है
2-इनएच 11 आगरा रोड- यहाँ दोनों तरफ़ 400 रोड लाईट्स ख़राब पड़ी हुई हैं
3-ट्रांसपोर्ट नगर अंडरपास- यहाँ 400 रोड लाईट्स लम्बे समय से खराब है
4-नारायण विहार पूरा क्षेत्र- यहाँ बहुत दिनों से 500 रोड लाईट्स ख़राब पड़ी हुई हैं
5-एलिवेटेड रोड अजमेर पुलिया- यहाँ कई महीनों से 150 रोड लाईट्स बंद पड़ी हुई है
6-सिसोदिया गार्डन से गलता पीठ तक-यहाँ 160 रोड लाईट्स बहुत दिनों से खराब है
7-केशव विद्यापीठ से लेकर मित्तल कॉलेज तक- यहाँ 110 रॉड5 लाईट्स खराब पड़ी हुई हैं
8-आमेर में कुंडा रोड से सड़वा मोड़ तक-यहां 230 रोड लाईट्स ख़राब पड़ी हुईं हैं
9-एनआरआई चौराहे से अक्षयपात्र मंदिर तक-50 लाइटें यहाँ भी बहुत समय से खराब पड़ी हुई है
10-राम लक्ष्मण आश्रम से केशव विधापीठ तक-100 रोड लाईट्स यहाँ भी महीनों से बंद हैं
11-दुर्गापुरा एलिवेटेड रोड-40 रोड लाईट्स यहाँ भी खराब पड़ी हुई है
12-खोले के हनुमान और पार्किंग रसोई- 33 रोड लाईट्स यहाँ भी खराब है

इनके अलावा शहर के हर इलाके में रोड लाईट्स बड़ी तादाद में ख़राब पड़ी हुई हैं। मेयर विष्णु लाटा का पोल खोलने वाला यह लेटर जेडीए के लिए शर्म का विषय है। उम्मीद है कि जेडीसी टी रविकांत इस लापरवाही को गंभीरता से लेंगे और शहर में बंद पड़ी हजारों रोड लाईट्स जल्द ही शुरू हो जाएंगी

    फर्स्ट इंडिया न्यूज के लिए जयपुर से शिवेंद्र सिंह परमार की रिपोर्ट
 

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