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राजस्थान के सियासी संकट पर कल हाईकोर्ट में होगी सुनवाई, जानिए आखिर कैसे बढ़ता गया विवाद...

राजस्थान के सियासी संकट पर कल हाईकोर्ट में होगी सुनवाई, जानिए आखिर कैसे बढ़ता गया विवाद...

जयपुर: राजस्थान के सियासी संकट में अब शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई होगी. कांग्रेस के बागी विधायकों की ओर से दायर याचिकाओं पर शु्क्रवार को सुबह 10.30 बजे मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ सुनवाई करेगी. 21 जुलाई को हाईकोर्ट की खण्डपीठ के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष को कोई राहत नही मिली है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को जरूर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के अधिन रखा है. दूसरी ओर से सचिन पायलट के अधिवक्ता एस हरीहरन की ओर से हाईकोर्ट में केन्द्र सरकार को पक्षकार बनाने को लेकर नयी अर्जी पेश कि गयी है. जिस पर शुक्रवार को हाईकोर्ट सुनवाई कर सकता है. बहसहाल इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था लेकिर अब सुप्रीम कोर्ट में मामला दूसरी स्थिती में पहुंच गया है जिसके बाद कानूनी जानकारी मानते है कि अब मामला विधानसभा अध्यक्ष के हाथ से निकलता जा रहा है. 

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सचिन पायलट समेत कांग्रेस के 19 विधायकों ने पार्टी के विधायक दल की बैठक से दूरी बनाते हुए हरियाणा के एक होटल को अपना ठिकाना बना लिया. ऐसे में 14 जुलाई को चीफ व्हिप महेश जोशी ने स्पीकर सीपी जोशी को एक शिकायत पेश की. इस शिकायत पर स्पीकर सीपी जोशी ने उसी दिन 14 जुलाई को इन 19 विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए. नोटिस में सचिन पायलट सहित सभी विधायकों को 17 जुलाई तक इस बात का जवाब पुछा गया कि क्यो नही विधानसभा में उनकी सदस्यता बर्खास्त की जाए?

हाईकोर्ट ने विशेष एकलपीठ का गठन किया:
सचिन पायलट खेमे ने विधानसभा अध्यक्ष के इस नोटिस का जवाब देने की बजाय राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौति दी. राजस्थान हाईकोर्ट ने इसके लिए 16 जुलाई को विशेष एकलपीठ का गठन किया. जस्टिस सतीश शर्मा की एकलपीठ में सुनवाई के दौरान पायलट के वकील हरीश साल्वे ने याचिका को संशोधित कर नोटिस देने के अधिकार के प्रावधान को चुनौति देने की बात कही. शाम 5 बजे हुई दुबारा सुनवाई में संशोधित याचिका को एकलपीठ ने खण्डपीठ को रैफर कर दिया. 

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में हुआ खण्डपीठ का गठन:
पायलट खेमे की संशोधित याचिका पर सुनवाई के लिए 17 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ का गठन किया गया. दोपहर 1 बजे शुरू हुई सुनवाई में मुख्य सचेतक ने पक्षकार बनने की अर्जी पेश की. शाम 4.45 बजे तक हुई सुनवाई के बाद खण्डपीठ ने मामले की सुनवाई 20 जुलाई की सुबह 10 बजे तक टाल दी गयी. 20 जुलाई को सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक सुनवाई हुई. जिसके बाद 21 जुलाई को सुबह 10.30 बजे सुनवाई शुरू कि गयी. 21 जुलाई को अदालत ने शाम 3 बजे तक सभी पक्षो की बहस सुनने के बाद मामले को 24 जुलाई के लिए फैसले के लिए रखा. 

पहले सिर्फ था नोटिस का विवाद: 
विधानसभा अध्यक्ष द्वारा जारी किये गये नोटिस पर राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर होने को विधानसभा अध्यक्ष के क्षेत्राधिकार में दखल बताया. विधानसभा अध्यक्ष ने सप्रीम कोर्ट के 1992 के फैसले को आधार बनाया है. 1992 के फैसले को किहोतो होलोहन केस के तौर पर भी जाना जाता है. इसमें कोर्ट की कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच ने कहा था कि दलबदल कानून के तहत विधायकों को स्पीकर अयोग्य ठहरा सकता है. स्पीकर जोशी का कहना है कि विधायकों से सिर्फ जवाब मांगा है. फैसला नहीं लिया है. ऐसे में संवैधानिक संस्थाओं में टकराव टालने के लिए उन्होने दो बार समय बढाया. इसके जवाब में सचिन पायलट खेमे की ओर से सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने महत्वपूर्ण दलीले दी कि पायलट और अन्य विधायकों ने न तो पार्टी के विरोध में कोई बयान दिया और न ही कोई ऐसा काम किया जो यह साबित करें कि वे पार्टी के खिलाफ साजिश रच रहे थे. किसी व्यक्ति विशेष या नेतृत्व के खिलाफ की गई टिप्पणी को पार्टी से जोड़कर देखना गलत है. यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है. यह नोटिस ही गलत तरीके से दिया गया है. साल्वे ने ये भी कहा कि व्हिप का पालन सदन में किया जाता है, बाहर नहीं. ऐसे में स्पीकर के पास नोटिस देने या कार्यवाही करने का अधिकार नहीं था. यह गलत तरीके से भेजा गया है. 

फिर कोर्ट के निर्देश से बढ़ गया मामला:  
विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई के चलते 16 जुलाई के बाद 17 जुलाई को दो बार नोटिस पर कार्यवाही को लेकर समय बढाया. दोनों ही बार हाईकोर्ट की रिक्वेंस्ट पर कंसेट लेटर दिया गया. लेकिन 21 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष के कंसेट लेटर की जगह कोर्ट ने आदेश दिया कि अध्यक्ष 24 जुलाई तक विधायको के खिलाफ कार्यवाही को टाल दे. हाईकोर्ट ने यह भी कह दिया कि 24 जुलाई तक स्पीकर इन विधायकों के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर सकते. इसी बात को लेकर स्पीकर सीपी जोशी ने पहले प्रेसवार्ता की ओर फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कि...

क्या है संविधान की 10 वीं अनुसूची में प्रावधान:
संविधान में वर्ष 1985 में 52वें संशोधन के जरिये 10 वी अनुसूची को जोड़ा गया है इसे ही दलबदल विरोधी कानून भी कहा जाता है. इसमें दलबदल करने वाले सदस्यों को अयोग्य ठहराने संबंधी नियमों को विस्तार से समझाया गया है. दलबदल में सबसे चर्चित किस्सा है ‘आयाराम गयाराम’ का. 1967 में हसनपुर के विधायक गयालाल ने एक ही दिन में तीन बार पार्टी बदली. कांग्रेस से जनता पार्टी में गए और फिर कांग्रेस में लौट गए. नौ घंटे बाद फिर जनता पार्टी में चले गए थे. इस कानून के तहत स्पीकर दलबदल करने वाले विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर सकता है. यदि संतुष्ट नहीं हो तो वह विधायकों की सदस्यता बर्खास्त कर सकता है. 

स्पीकर से अधिकार छीन लेना चाहिए:
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2020 में संसद से कहा था कि दलबदल कानून के तहत स्पीकर को दिए विधायकों को बर्खास्त करने के अधिकार को संविधान में संशोधन कर छीन लेना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने तो यह भी कहा था कि पैसे या सत्ता के लालच में दलबदल करने वाले विधायक या सांसद के भविष्य पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र ट्रिब्यूनल बनाना चाहिए. नवंबर 2019 में कर्नाटक में विधायकों को अयोग्य ठहराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्पीकर आखिर एक पार्टी का कार्यकर्ता होता है. उस पर पार्टी के दबाव हो सकते हैं. जनवरी 2020 में मणिपुर के विधायक की बर्खास्तगी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निष्पक्षता के साथ फैसला लेने से ही दसवें शैड्यूल को ताकत मिलेगी. स्पीकर से अधिकार छीन लेना चाहिए. 

VIDEO: राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालात से खुश नहीं राज्यपाल कलराज मिश्र, राजभवन में हलचल! 

क्या है दल बदल विरोधी कानून: 
दलबदल विरोधी कानून भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची जोड़ा गया है जिसे संविधान के 52वें संशोधन के माध्यम से वर्ष 1985 में पारित किया गया था. इस कानून में विभिन्न संवैधानिक प्रावधान थे और इसकी विभिन्न आधारों पर आलोचना भी हुयी थी. इस कानून ने विधायकों या सांसदों को राजनैतिक माईंड सेट के साथ नैतिक और समकालीक राजनीति करने को मजबूर कर दिया है. दलबदल विरोधी कानून ने राजनेताओं को अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए गियर शिफ्ट करने के लिए हतोत्साहित किया. हालांकि, इस अधिनियम में कई कमियां भी हैं और यहां तक कि यह कई बार दलबदल को रोकने में विफल भी रहा है. 

1. यदि एक व्यक्ति को दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित कर दिया जाता है तो वह संसद के किसी भी सदन का सदस्य होने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा.

2. यदि एक व्यक्ति को दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित कर दिया जाता है तो विधान सभा या किसी राज्य की विधान परिषद की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा.

3. दसवीं अनुसूची के अलावा- संविधान की नौवीं अनुसूची के बाद, दसवीं अनुसूची को शामिल किया गया था जिसमें अनुच्छेद 102 (2) और 191 (2) को शामिल किया गया था.

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जयपुर: सुशासन एवं पारदर्शिता के लिए गहलोत सरकार ने आमजन से जुड़ी सेवाएं 30 मार्च तक ऑनलाइन करने का फैसला किया है.मुख्यमंत्री आवास पर आज वीसी के माध्यम से ढाई घण्टे तक चली सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग की समीक्षा बैठक में सीएम गहलोत ने निर्देश दिए हैं कि राजस्थान लोक सेवा के प्रदान की गारंटी अधिनियम-2011 और राजस्थान सुनवाई का अधिकार अधिनियम-2012 के तहत विभिन्न विभागों की 221 नागरिक सेवाओं को 30 मार्च, 2021 तक ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से उपलब्ध कराया जाए. उन्होंने इसके लिए मुख्य सचिव को इसके लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर गुड गवर्नेंस के इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को गति देने के निर्देश दिए.

आईटी का बेहतरीन उपयोग करने पर दिया जोर: 
सुशासन व पारदर्शित के लिए मुख्यमंत्री ने आईटी का बेहतरीन उपयोग करने पर जोर दिया है. सीएम गहलोत ने आईटी विभाग की समीक्षा बैठक में विभाग के प्रोजेक्टस की जानकारी ली और साथ ही निर्देश दिए कि जनता को बेहतरीन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आईटी का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जाए. इस बैठक में मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त निरंजन आर्य, आयुक्त सूचना प्रौद्योगिकी वीरेन्द्र सिंह, सूचना एवं जनसम्पर्क आयुक्त महेन्द्र सोनी, निदेशक आरआईएसएल अभिमन्यु कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के मुख्यालय तथा विभिन्न जिलों एवं ब्लाॅक स्तर तक पदस्थापित अधिकारी उपस्थित थे.

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जनता को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ें:
सीएम ने कहा कि सरकार चाहती है कि राजस्थान आईटी आधारित सुशासन में देश का प्रथम राज्य बने. राजस्थान में आम लोगों को राजकीय सेवाओं की डिलिवरी के लिए 80 हजार ई-मित्र केन्द्रों तथा राजीव गांधी सेवा केन्द्रों के रूप में पंचायत स्तर तक एक वृहद नेटवर्क उपलब्ध है. सभी विभागों को इसका अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि आम लोगों को इसका सीधा फायदा मिल सके और उन्हें दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ें. गहलोत ने विभाग द्वारा विभिन्न राजकीय सेवाओं की ऑनलाइन डिलिवरी के लिए साॅफ्टवेयर, पोर्टल तथा ऐप सहित अन्य आईटी आधारित माॅड्यूल्स तैयार करने का काम आउटसोर्स करने के स्थान पर अपने ही विभाग के दक्ष एवं कुशल कार्मिकों से करवाने पर जोर दिया.

लगभग 2000 वीडियो कॉन्फ्रेंस से बैठकें भी आयोजित:
मुख्यमंत्री ने नियुक्तियों में अभ्यर्थियों के ऑनलाइन सत्यापन और प्रमाणीकरण, निर्माण कार्यों से जुड़े विभागों में टेंडर प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने, प्रत्यक्ष लाभ हस्तान्तरण (डीबीटी) व्यवस्था को सुदृढ़ करने, डिजिटल शिक्षा की पहुंच के विस्तार सहित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने में विभिन्न आईटी प्लेटफाम्र्स के उपयोग को गति देने के निर्देश दिए. सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के प्रमुख शासन सचिव अभय कुमार ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को संक्रमण से बचाने, संक्रमित व्यक्तियों के प्रबंधन, सूचनाओं के संकलन और आदान-प्रदान तथा दिशा-निर्देशों के प्रसार आदि कार्यों में विभाग ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया है. साथ ही मुख्यमंत्री, मंत्रियों तथा अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के बीच आवश्यक समन्वय एवं दिशा-निर्देशों के लिए लगभग 2000 वीडियो कॉन्फ्रेंस से बैठकें भी आयोजित करवाई.

किसान अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस का चौतरफा विरोध, 24 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में होगी प्रेसवार्ता

जयपुर: किसान अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस का चौतरफा विरोध सामने आ रहा है. 24 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेसवार्ता होगी. प्रदेश प्रभारी अजय माकन ,पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा मौजूद रहेंगे. 28 सितंबर को पीसीसी से राजभवन तक पैदल मार्च तक पैदल मार्च बताया जा रहा. हालांकि धारा 144 के मद्देनजर कार्यक्रम में बदलाव हो सकता है. 

2 अक्टूबर को मनाएगी प्रदेश कांग्रेस किसान मजदूर दिवस:
पैदल मार्च के बाद राज्यपाल को ज्ञापन दिया जाएगा. 2 अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस किसान मजदूर दिवस मनाएगी. इसी दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की है जयंती.  2 अक्टूबर को ही विस क्षेत्रों पर कृषि विधेयकों के खिलाफ धरने प्रदर्शन होंगे. संभव है 10 अक्टूबर को जयपुर सहित अन्य जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस किसान सम्मेलन आयोजित करेेंगे. सोमवार को भी कृषि विधेयकों के खिलाफ कांग्रेस ने  प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर्स को ज्ञापन सौंपे थे,सोशल डिस्टेंसिंग सहित गाइड लाइन की पालना होगी. 

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कृषि अध्यादेशों को लेकर विरोध प्रदर्शन:
कृषि अध्यादेशों को लेकर एक पखवाड़े तक विरोध प्रदर्शन के निर्णय के पीछे किसान वोट बैंक है. प्रदेश की बात करें तो यहां वर्तमान में चल रहे ग्राम पंचायतों के साथ ही आगामी समय में पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनाव भी हैं ऐसे में इस मुद्दों के जरिए कांग्रेस किसान वर्ग की सहानुभूति बंटोरकर उन्हें अपने पाले में लाना चाहती है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

आईपीएस लांबा द्वारा आसाराम पर लिखी किताब पर लगी रोक हटी, दिल्ली हाईकोर्ट ने डीजे कोर्ट के एकतरफा फैसले को किया रद्द

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जयपुर: आईपीएस अजयपाल लांबा द्वारा बहुचर्चित आसाराम केस पर लिखी पुस्तक गनिंग आफ गॉडमेन पर लगी रोक दिल्ली हाईकोर्ट ने हटा दी है.दिल्ली हाईकोर्ट ने हार्पर कॉलिंस पब्लिकेशन को आसाराम पर किताब छापने की छूट देते हुए निचली अदालत के आदेश केा रद्द कर दिया है.गौरतलब है कि 9 अगस्त को दिल्ली की एक डीजे कोर्ट ने आसाराम मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में अपील लंबित रहने के चलते पुस्तक के प्रकाशन पर रोक लगा दी थी.जिसे हार्पर कॉलिंस की ओर से अपील दायर कर हाईकोर्ट में चुनौति दी गई. 

जस्टिस नाजिमि वजीरि की एकलपीठ ने दिए आदेश:
जस्टिस नाजिमी वजिरी की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद कुछ शर्तो के साथ पुस्तक के प्रकाशन की अनुमति दी है.प्रकाशन के दौरान हार्पर कॉलिंस को एक फ्लायर छापना होगा, जिस पर लिखा होगा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ संचिता गुप्ता की अपील राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित है, और किताब की प्रतियों को बेचते हुए यह जानकारी वाला फ्लायर किताब में आगे या पीछे के कवर के पीछे लगाना होगा.आनलाइन प्रति पर इलेक्ट्रोनिक माध्यम से ये सूचना देनी होगी.

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IPS अजयपाल लाम्बा द्वारा लिखी गई है पुस्तक:
गौरतलब है कि गनिंग फॉर द गॉडमैन द ट्रू स्टोरी बिहाइंड आसाराम बापू कन्विक्शन जयपुर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अजय लांबा और संजीव माथुर ने लिखी है. इस किताब का विमोचन 5 सितंबर को होना था. लेकिन इससे पूर्व ही 4 सितंबर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने यौन शोषण के पुस्तक को सुनवाई की अगली तारीख तक प्रकाशित करने पर रोक लगा दी थी.अतिरिक्त जिला न्यायाधीश आरएस मीणा ने याचिकाकर्ता संचित गुप्ता की ओर से दायर किये गये सूट पर ये आदेश दिये थे.

दीया मिर्जा बोलीं, मैंने​ जिदंगी में कभी ड्रग नहीं ली, मेरी छवि को खराब करने की कोशिश 

दीया मिर्जा बोलीं, मैंने​ जिदंगी में कभी ड्रग नहीं ली, मेरी छवि को खराब करने की कोशिश 

मुंबई: बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा ने कहा कि मैंने जिंदगी में कभी ड्रग नहीं ली है. जो भी खबरें चल रही है पूरी तरह से झूठी है. इसके आधार पर मेरी छवि खराब करने की कोशिश हो रही है. मैं कानूनी लड़ाई लड़ूंगी. आपको बता दें कि ड्रग्स मामले में नाम आने पर अभिनेत्री दीया मिर्जा ने यह सफाई दी है. उन्होंने एक के बाद एक 3 ट्वीट्स किए.

दीया मिर्जा ने इस खबर को किया खारिज:
अभिनेत्री दीया मिर्जा ने कहा कि मैं इस खबर को सिरे से खारिज करती हूं. क्योंकि यह गलत, निराधार और गलत इरादों के साथ किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस तरह की तुच्छ रिपोर्टिंग से मेरी प्रतिष्ठा पर सीधा प्रभाव पड़ता है. मेरे करियर को नुकसान पहुंचा रहा है, जो मैंने सालों तक मेहनत करके बनाया है. दीया मिर्जा ने कहा कि मैंने अपने जीवन में कभी भी न तो ड्रग्स खरीदी है और न ही इसका सेवन किया है. मैं कानूनी रास्ता अपनाऊंगी. मेरे साथ खड़े लोगों का धन्यवाद.

दीपिका पादुकोण का नाम भी आ चुका है सामने:
इससे पहले ड्रग्स मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का नाम भी नाम सामने आ चुका है. खबरों की माने तो दीपिका के ड्रग्स कनेक्शन के बाद अब उनकी चैट भी सामने आ चुकी है, जिसके बाद माना जा रहा है कि अब दीपिका की मुश्किले भी बढ़ सकती हैं. आपको बता दें कि एनसीबी हर रोज ड्रग्स मामले में नए नए खुलासे कर रही है.

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रिया ने लिया था 25 लोगों का नाम :
ड्रग्स मामले में अभिनेत्री सारा अली खान, श्रद्धा कपूर, रकुल प्रीत सिंह से भी पूछताछ हो सकती है. अभिनेत्रियों को एनसीबी की ओर से उन्हें समन भेजा जा सकता है. दरअसल, एनसीबी का दावा है कि सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती ने इन चारों एक्ट्रेस का नाम लिया था. रिया चक्रवर्ती ने एसीबी से पूछताछ के दौरान फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े 25 लोगों को नाम लिया था. ऐसे में अब एनसीबी इस मामले को पूरी तरह से सुलझाने के लिए जांच में जुटी गई है. दरअसल, एनसीबी का दावा है कि सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती ने इन चारों एक्ट्रेस का नाम लिया था.

कल से चलेगी उत्तर-पश्चिम रेलवे की पहली क्लोन ट्रेन, आश्रम एक्सप्रेस से करीब डेढ़ घंटे पूर्व होगी संचालित

कल से चलेगी उत्तर-पश्चिम रेलवे की पहली क्लोन ट्रेन, आश्रम एक्सप्रेस से करीब डेढ़ घंटे पूर्व होगी संचालित

जयपुर: उत्तर-पश्चिम रेलवे की पहली क्लोन ट्रेन बुधवार से शुरू होगी. अहमदाबाद से दिल्ली के बीच में यह सुपरफास्ट स्पेशल क्लोन ट्रेन सप्ताह में 2 दिन संचालित होगी. अहमदाबाद से ट्रेन रविवार और बुधवार को चलेगी. जबकि दिल्ली से ट्रेन सोमवार और गुरुवार को संचालित होगी. हालांकि रेलवे प्रशासन ने इसे यात्रियों के लिए सुविधाजनक और बेहतर ट्रेन बताया है. लेकिन ट्रेन पहले ही फेरे में यात्रियों के लिए थोड़ी महंगी साबित हो रही है. आमतौर पर क्लोन ट्रेन का कंसेप्ट यह होता है, कि जिस ट्रेन में वेटिंग ज्यादा होती है. उसके वेटिंग वाले यात्रियों को बुकिंग के समय यात्रियों से विकल्प लेकर क्लोनट्रेन में एकोमोडेट किया जाता है. लेकिन इस ट्रेन में यात्रियों को अलग से टिकट बुक करनी होगी.

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हालांकि ट्रेन का किराया होगा आश्रम एक्सप्रेस से ज्यादा:
हालांकि जिस राजधानी ट्रेन का क्लोन ट्रेन इसे बताया जा रहा है, उसमें पहले से ही सीटें खाली चल रही हैं. राजधानी के अपेक्षाकृत आश्रम एक्सप्रेस में वेटिंग ज्यादा है. उदाहरण के लिए 24 सितंबर को जयपुर से अहमदाबाद जाने वाली राजधानी ट्रेन में थर्ड एसी में मात्र 2 वेटिंग है, जबकि आश्रम एक्सप्रेस में वेटिंग 15 तक पहुंची हुई है. वहीं यात्रियों की सुविधा के लिए चलाई गई क्लोन ट्रेन में भी वेटिंग 10 पहुंच रही है. आश्रम एक्सप्रेस में थर्ड एसी का किराया 1005 रुपए है, जबकि क्लोन ट्रेन में किराया 1145 रुपए रखा गया है.

यह रहेगा क्लोन ट्रेन का शेड्यूल
- अहमदाबाद-दिल्ली-अहमदाबाद द्वि-सप्ताहिक सुपरफास्ट स्पेशल क्लोन ट्रेन
- ट्रेन 09415 अहमदाबाद-दिल्ली सुपरफास्ट स्पेशल 23 सितंबर से होगी शुरू
- प्रत्येक रविवार और बुधवार को अहमदाबाद से शाम 5:40 बजे रवाना होगी
- रात 2:55 बजे जयपुर पहुंचकर 3:05 बजे दिल्ली के लिए रवाना होगी
- ट्रेन 09416 दिल्ली-अहमदाबाद सुपरफास्ट 24 सितंबर से शुरू होगी
- प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को दिल्ली से दोपहर 2:20 बजे रवाना होगी
- शाम 7 बजे जयपुर पहुंचकर 7:10 बजे अहमदाबाद के लिए जाएगी
- ट्रेन में 12 थर्ड एसी और 4 स्लीपर क्लास कोच लगेंगे

...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की रिपोर्ट

Rajasthan Corona Update: पिछले 24 घंटे में 15 मौत, 1912 नए पॉजिटिव केस, जयपुर में मिले 398 नए संक्रमित 

Rajasthan Corona Update: पिछले 24 घंटे में 15 मौत, 1912 नए पॉजिटिव केस, जयपुर में मिले 398 नए संक्रमित 

जयपुर: राजस्थान में लगातार कोरोना वायरस के मामले बढ़ते जा रहे है. पिछले 24 घंटे में 15 मरीजों की मौत हो गई. जबकि 1912 नए पॉजिटिव केस सामने आये है. अजमेर में एक, अलवर में एक, बांसवाड़ा में एक, बाड़मेर में एक,भरतपुर में एक, चित्तौडगढ़ में एक, डूंगरपुर में एक, जयपुर में दो, जैसलमेर में एक, जोधपुर में एक, पाली में एक, सीकर में एक, टोंक में एक और उदयपुर में एक मरीज की मौत हो गई. प्रदेश में कोरोना की चपेट में आने से अब तक 1367 मरीजों की मौत हो चुकी है. वहीं कुल पॉजिटिव मरीजों की संख्या 1 लाख 18 हजार 793 पहुंच गई है.

जयपुर में मिले सर्वाधिक 398 संक्रमित:
जयपुर में सर्वाधिक 398 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले है. अजमेर 88, अलवर 93, बांसवाड़ा 10, बारां 10, बाड़मेर 16, भरतपुर 34 पॉजिटिव, भीलवाड़ा 83, बीकानेर 67, बूंदी 8, चित्तौडगढ़ 26, चूरू 35, दौसा 32 पॉजिटिव, धौलपुर 11, डूंगरपुर 57, श्रीगंगानगर 29, हनुमानगढ़ 22, जयपुर 398 पॉजिटिव, जैसलमेर 9, जालोर 92, झालावाड़ 20, झुंझुनूं 35 ,जोधपुर 303 पॉजिटिव, करौली 18, कोटा 43, नागौर 52, पाली 83, प्रतापगढ़ 6, राजसमंद 31 पॉजिटिव, सवाई माधोपुर 15, सीकर 18, सिरोही 35,  टोंक 31, उदयपुर 102 पॉजिटिव सामने आये है. 

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पॉजिटिव से नेगेटिव हुए कुल मरीज 98812:
राजस्थान में कुल 98 हजार 812 लोग इलाज के बाद पॉजिटिव से नेगेटिव हुए है. वहीं अब तक 97 हजार 448 लोग अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए है. कुल 18 हजार 614 मरीज अस्पताल में उपचाररत है. कुल कोरोना पॉजिटिव प्रवासियों की संख्या 9 हजार 968 पहुंच गई है.

नदी में नहाने गए दो किशोरों की डूबने से हुई मौत, पुलिस ने कई घंटों की  मशक्कत के बाद शवों को निकाला बाहर 

नदी में नहाने गए दो किशोरों की डूबने से हुई मौत, पुलिस ने कई घंटों की  मशक्कत के बाद शवों को निकाला बाहर 

सिरोही: प्रदेश सिरोही जिले के मंडार थाना क्षेत्र के जामठा गांव मके पास चलने वाली नदी में नहाने गए दो किशोरों की डूबने से मौत हो गई. सूचना मिलने पर रेवदर डिप्टी नरेन्द्रसिंह देवड़ा और मंडार थानाधिकारी भंवरलाल चौधरी मौके पर पहुंचे, और खुद ही दोनों अधिकारियों ने वर्दी उतार कर नदी में गोता लगाकर कई घण्टों की मशक्कत के बाद दोनों शवों को बाहर निकाला.

पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंपा:
शवों को मंडार अस्पताल की मोर्चरी में लाया, जहां उनका पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिए.दोनों ही मृतक किशोर आपस में मामा बुआ के बेटे भाई हैं.जामठा निवासी मकाराम ने पुलिस को रिपोर्ट देकर बताया कि नदी में बजरी खनन के लिए लीज धारक ने नदी में जेसीबी व पोकलैंड मशीनें लगाकर करीब 40 फिट गहरे खड्डे खोद रखे हैं.जिसमें नदी का पानी जमा होने से उसके पोते व नाती की मौत हो गई हैं.

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ग्रामीणों का आरोप: 
उन्होंने इन दोनों किशोरों की मौत का जिम्मेदार खनिज विभाग सिरोही व लीज धारक को ठहराते हुए उन पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करवाने की गुहार लगाई हैं.वहीं जामठा गांव के ग्रामीणों ने भी इस हादसे के लिए बजरी खनन कर्ताओं व खनिज विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए कई आरोप लगाए हैं.

राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा-प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर आमजन संस्कारित होगा

राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा-प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर आमजन संस्कारित होगा

जयपुर: राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है की बहुविषयी शिक्षा, संपूर्ण विकास, जड़ से जग तक और मानव से मानवता तक की बात राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में समावेशित है. नई शिक्षा नीति में आधुनिक शिक्षा से प्राचीन भारतीय ज्ञान को जोड़ने से आमजन संस्कारित होगा. शिक्षा के साथ संस्कार का होना जरूरी है. विश्व धरोहर के लिए देश की समृद्ध विरासतों को न केवल भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित किया जाना जरूरी है, बल्कि हमारी शिक्षा प्रणाली के जरिए इन्हें बढ़ाना और इन्हें नए तरीके से उपयोग में लाना भी जरूरी है.

भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ाने वाली है नई शिक्षा नीति:
125 वर्षों के बाद भारतीयता पर यह शिक्षा नीति बनी है, जो आज के संदर्भ में ज्ञान की प्राचीन परंपरा को बताएगी. राज्यपाल ने नई शिक्षा नीति को भारतीयता और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ाने वाली बताया है. राज्यपाल ने ये विचार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अंतर विश्वविद्यालयी अध्यापक शिक्षा केंद्र द्वारा आयोजित वेबिनार के दौरान व्यक्त किए. वेबिनार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: प्राचीन ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक शिक्षा विषय पर आयोजित की गई. राजभवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वेबिनार को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत की सोच व्यापक रही है.

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प्राचीन काल में शिक्षा का मूल उद्देश्य रहा है ज्ञान की प्राप्ति:
विश्व गुरु का स्थान भारत ने ज्ञान से ही प्राप्त किया था. भारत की ज्ञान परंपरा इतनी समृद्ध है कि वह पुस्तकों के जलाने और पुस्तकालयों को समाप्त करने से भी समाप्त नहीं हो पाई. प्राचीन काल में शिक्षा का मूल उद्देश्य ज्ञान की प्राप्ति रहा है. प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा की आवश्यकता को पूरा विश्व महसूस करता रहा है. हमारा देश उच्च मानवीय मूल्यों और विशिष्ट वैज्ञानिक परंपराओं का देश रहा है. भारत की संस्कृति रही है कि भारत ने दुनिया को अलग-अलग देश के रूप में नहीं बल्कि एक परिवार के रूप में माना है. इस सदी के उत्तरार्द्ध से पश्चिमी सभ्यता वाले देश भारतीय संस्कृति और सभ्यता को अपनाने और जानने पर जोर देने लगे हैं. हमें और हमारी भावी पीढ़ियों को भारत के प्राचीन मूल्यों को यथोचित महत्व देना होगा. समारोह को रजनीश कुमार शुक्ल, सच्चिदानंद जोशी विनोद कुमार त्रिपाठी और आरपी शुक्ल ने भी संबोधित किया.

...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की रिपोर्ट