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एक बार फिर प्रदेश के इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, बीसलपुर बांध से पानी की निकासी जारी

एक बार फिर प्रदेश के इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, बीसलपुर बांध से पानी की निकासी जारी

जयपुर: प्रदेश के हाड़ौती अंचल में भारी बारिश के चलते चंबल के सबसे बड़े बांध गांधीसागर के मंगलवार को पांच गेट खोले गए है. वहीं कोटा बैराज के भी बीती रात कुल 19 गेट खोले गए है. पानी के दबाव को देखते हुए आज बैराज से पानी की निकासी तीन लाख क्यूसेक के तक करने की तैयारी जल संसाधन विभाग ने की है. मौसम विभाग के अनुसार अगले 18 घंटे में बंगाल की खाड़ी में कम वायुदाव क्षेत्र बनने के कारण गुजरात, मध्यप्रदेश और पूर्वी राजस्थान में भारी बारिश होने की संभावना है. 

अगले 24 घंटे में इन जगहों पर अच्छी बारिश की संभावना: 
मध्यप्रदेश से होकर प्रदेश में सक्रिय हुए बादल अगले 24 घंटे में प्रदेश के करीब एक दर्जन जिलों में अच्छी बारिश कर सकते हैं. मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश के पूर्वी इलाकों में बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, राजसमंद, झालावाड़, कोटा, सिरोही और उदयपुर और पश्चिमी राजस्थान में पाली और जालौर जिलों में अगले 24 घंटे में भारी बारिश होने की संभावना है.  

बीसलपुर के तीन गेटों से पानी की निकासी जारी: 
वहीं पिछले तीन साल से पानी की आवक का इंतजार कर रहे बीसलपुर डेम में इस बार पानी की बंपर आवक हुई है. डेम में लगातार पानी की आवक बढ़ने के कारण डेम के खोले गए तीन गेटों से अब तक करीब चार टीएमसी पानी बनास नदी में छोड़ा जा चुका है. 

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जयपुर: प्रदेश में 2500 स्वयंसेवक (volunteer) सहित स्थाई होमगार्ड (home guard) भर्ती की राह खुल गई है. अब अभ्यर्थी 10 जून से 9 जुलाई तक फॉर्म भर सकते हैं. पहले भी विभाग ने विज्ञप्ति जारी की थी लेकिन लॉकडाउन के चलते रोक लग गई थी. ऐसे में अब भर्ती की राह खुलने से अभ्यर्थी उत्साहित नजर आ रहे हैं. 

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इसके लिए विभाग में तैयारियां भी शुरू हो गई हैं. इसके अलावा होमगार्ड (home guard) के स्थाई पदों को भरा जाएगा. ताकि गृह रक्षा विभाग (home guards) में स्टाफ की कमी नहीं रहे. अस्थाई होमगार्ड के कल्याण के लिए भी विभाग ने नवाचार किया है. 

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ऐसे होमगार्ड जिनकी आयु 55 वर्ष हो चुकी है वे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (retirement) ले सकते हैं. उनके पुनर्वास और कल्याण (welfare) के लिए 1.50 लाख रुपए भी दिए जाएंगे. इससे वे व्यापार या आजीविका का कोई साधन तैयार कर सकेंगे. 
 

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जयपुर: राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर राज्य में स्थित समस्त जिला एवं सेशन न्यायधीशों को अपने-अपने कार्य क्षेत्र की सीमाओं के लिए बाल न्यायालय के रूप में विनिर्दिष्ट किया है. 

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विधि एवं विधिक विभाग की ओर से जारी इस अधिसूचना के अनुसार न्यायधीशों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के प्रकरणों को छोड़कर बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के तहत बाल न्यायालय के रूप में सभी प्रकरणों की सुनवाई का अधिकार होगा. 

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साथ ही वर्तमान में कार्यरत विशेष न्यायालयों, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 एवं बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 एवं राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा अन्तरित किये गये प्रकरणों की सुनवाई का अधिकार होगा. 
 

सहकारिता मंत्री आंजना ने लिखा केंद्रीय मंत्री तोमर को पत्र, समर्थन मूल्य पर होने वाली जींस खरीद का लाभ समस्त किसानों को देने का किया आग्रह

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जयपुर: सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि समर्थन मूल्य पर होने वाली जिंस खरीद का लाभ समस्त किसानों को मिलना चाहिए. केन्द्र सरकार इस सम्बन्ध में नीति बनाये कि समर्थन मूल्य की खरीद में प्रत्येक किसान से एक निश्चित मात्रा में उपज की खरीद हो. 

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किसानों का बहुत बड़ा तबका सरकार की योजना से वंचित:  
सहकारिता मंत्री ने बताया की भारत सरकार द्वारा खरीफ फसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि स्वागत योग्य कदम है और इसका फायदा किसानों को मिलेगा. उन्होनें बताया कि केन्द्र सरकार किसानों की आय दोगुना करना चाहती है वहीं दूसरी तरफ किसानों का बहुत बड़ा तबका सरकार की योजना से वंचित है. ऐसे में समान नीति बनाकर सभी किसानों को लाभांवित किया जाये.

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10 से 20 प्रतिशत किसान ही अपनी उपज एमएसपी पर बेच पाते हैं:
आंजना ने बताया कि समर्थन मूल्य खरीद में किसी भी राज्य की उपज का 25 प्रतिशत ही खरीदा जाता है. केन्द्र सरकार द्वारा इस नियम से 10 से 20 प्रतिशत किसान ही अपनी उपज एमएसपी पर बेच पाते हैं. ऐसे में किसानों का बड़ा वर्ग बाजार में ओने-पोने दाम पर फसल बेचने को मजबूर होता है, और उसकी आय में बढ़ोतरी नही हो पाती है. अतः कोरोना महामारी देखते हुए एमएसपी का लाभ सभी किसानों को मिले इसके लिए केन्द्र सरकार को शीघ्र कदम उठाने चाहियें. 

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जयपुर: राजस्थान में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है. पिछले 12 घंटे में प्रदेश में 171 नए पॉजिटिव मामले सामने आए हैं. इसमें सर्वाधिक 70 मरीज भरतपुर में पॉजिटिव मिले हैं. इसके अलावा अलवर में दस, चूरू में दो, दौसा में चार, धौलपुर में एक, जयपुर में 34, झालावाड़ में 23, झुंझुनूं में चार, जोधपुर में 12, कोटा में दस और टोंक में एक पॉजिटिव चिन्हित किया गया है. ऐसे में राजस्थान में अब पॉजिटिव मरीजों का ग्राफ बढ़कर 9271 पहुंच गया है. 

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राजस्थान में कोरोना मौतों का दोहरा शतक: 
वहीं प्रदेश में कोरोना से मौतों का भी दोहरा शतक हो गया है. पिछले 12 घंटे में 2 मरीजों के दम तोड़ने से मृतकों की संख्या बढ़कर 201 पहुंच गई है. इसमें कोटा और बारां में एक-एक मरीज की मौत हुई है. वहीं कुल 6267 मरीज पॉजिटिव से नेगेटिव हुए है. इनमें से 5654 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए हैं. ऐसे में अब अस्पताल में उपचाररत कुल एक्टिव मरीज 2803 है. वहीं कुल कोरोना पॉजिटिव प्रवासियों की संख्या 2620 है. 

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सोमवार को कुल 269 नए रोगी मिले: 
इससे पहले सोमवार को 24 घंटे में 5 मरीजों की मौत हो गई. ज​बकि 269 नए पॉजिटिव केस सामने आये है. जयपुर में 3, बारां-बीकानेर में 1-1 मरीज की मौत हो गई. सर्वाधिक 52 केस अकेले पाली में सामने आये. इसके अलावा अजमेर 7, अलवर 6, बारां 27, भरतपुर 44, भीलवाड़ा 2 पॉजिटिव, चूरू 7, दौसा 2, डूंगरपुर 3, जयपुर 36, झालावाड़ 5 पॉजिटिव, झुंझुनूं 6, जोधपुर 32, कोटा 11, राजसमंद एक, सीकर 12 पॉजिटिव, सिरोही 5, टोंक 1, उदयपुर में 10 मरीज पॉजिटिव केस सामने आये है. 

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जयपुर: कोरोना के चलते दो माह से ज्यादा समय के लॉकडाउन में प्रशासनिक से लेकर इकोनॉमिक गवर्नेंस तक में सीएस डीबी गुप्ता की अहम भूमिका रही है. अब अनलॉक 1.0 में हालात किस तरह से स्थिर हो पाएंगे, इसे लेकर भी सीएम के मार्गदर्शन में सीएस ही कार्ययोजना को आगे बढ़ा रहे हैं. कोरोना लॉक डाउन के बाद और अनलॉक 1.0 की संभावनाओं और सकारात्मक पहलुओं को लेकर हमारे वरिष्ठ संवाददाता डॉक्टर ऋतुराज शर्मा ने सीएस डीबी गुप्ता के साथ बातचीत की...

लॉकडाउन के दौरान के बिजली-पानी बिल माफी को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका

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जयपुर: कोरोना महामारी के चलते प्रदेश में लगाए गये लॉकडाउन के दौरान बिजली और पानी के बिल माफ करने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कि गयी है. याचिकाकर्ता विजय कौशिक की ओर से दायर कि गयी जनहित याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. राजस्थान विद्युत वितरण निगम और जयपुर विद्युत वितरण निगम की ओर से अधिवक्ता अदालत में पेश हुए.

2 साल बाद भी कॉलेजियम का ही इंतजार, लॉकडाउन के बाद Rajasthan High Court के सामने जजों की कमी होगी बड़ी चुनौति 

बिल माफ करने को लेकर कोई कवायद नहीं की गयी:  
वहीं विजय कौशिक के अधिवक्ता रिपुन्जय शर्मा ने कहा कि सरकार ने बिजली बिल स्थगित करने की बात कहीं थी लेकिन अभी तक बिल माफ करने को लेकर कोई कवायद नहीं की गयी. लॉकडाउन की वजह से लोगों के पास रोजगार नहीं है और सरकार पेनल्टी सहित बिल की वसूली की तैयार कर रही है और बिजली कनेक्शन भी काटने की चेतावनी दी रही है. अदालत ने मामले की सुनवाई 4 सप्ताह के टाल दी है.

आरपीएससी सचिव, निदेशक माध्यमिक शिक्षा को हाईकोर्ट का नोटिस 

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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा 2018 की उत्तर कुंजी जारी नहीं करने और कटऑफ मार्क्स नहीं बताने पर आरपीएससी सचिव, माध्यमिक शिक्षा निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. जस्टिस एस पी शर्मा की एकलपीठ ने शंकरलाल व अन्य की ओर से दायर याचिका पर ये आदेश दिये है. अदातल ने नोटिस जारी कर 9 जून तक जवाब पेश करने के आदेश दिये है.

2 साल बाद भी कॉलेजियम का ही इंतजार, लॉकडाउन के बाद Rajasthan High Court के सामने जजों की कमी होगी बड़ी चुनौति 

अंतिम परिणाम में याचिकाकर्ताओं को बाहर कर दिया: 
आरपीएससी की ओर से एडवोकेट आरपी सैनी ने अदालत को बताया कि आरपीएससी ने वर्ष 2018 में वरिष्ठ अध्यापक भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था. भर्ती परीक्षा के बाद दो गुणा अभ्यर्थियों की अस्थायी चयन सूची में याचिकाकर्ताओं का नाम भी शामिल था लेकिन फरवरी 2020 में जारी किये गये अंतिम परिणाम में याचिकाकर्ताओं को बाहर कर दिया. आयोग ने अंतिम चयन सूची जारी किए जाने के तीन महीने बाद भी भर्ती परीक्षा की उत्तरकुंजी और कटआर्फ मार्क्स की जानकारी नही दी जा रही है. 

सवाई माधोपुर में महिला कांस्टेबल ने किया आत्महत्या का प्रयास, हालत बताई जा रही खतरे से बाहर

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जयपुर: जस्टिस डिलेड जस्टिस डिनाइड अर्थात इंसाफ़ में देरी नाइंसाफ़ी है. प्रदेश की न्यायपालिका में एक बात जो सभी की जुबान पर है. वो ये कि क्या राजस्थान हाईकोर्ट अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है. एक तरफ राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति का नाम सुप्रीम कोर्ट के लिए नामित होने के संकेत मिल रहे हैं तो दूसरी ओर सेवानिवृति और तबादले के बाद जजो की संख्या घटकर फिर से आधी ही रह गयी है. हाईकोर्ट में नए जजों की नियुक्ति में जितनी देरी हो रही है उतनी ही देरी हाईकोर्ट में लंबित पक्षकारों को उनके केसों में न्याय मिलने में हो रही है. कोरोना के चलते फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट में अति आवश्यक प्रकरणों की ही सुनवाई कि जा रही है लेकिन रेगुलर अदालते खुलने के साथ ही माना जा रहा है कि अदालतों में मुकदमों की बाढ आने वाली है. पहले से ही प्रदेश में करीब 4 लाख मुकदमे पेडिंग है ऐसे में जजों की नियुक्ति आने वाले दिनों में एक मुश्किल चुनौति होगी.   

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स्वीकृत 50 पदों में से मात्र 25 पदों पर ही जज कार्यरत: 
प्रदेश में बढ़ते मुकमदों की संख्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की अनुशंसा पर केन्द्र सरकार ने अक्टूबर 2014 में राजस्थान हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ाकर 40 से 50 कर दी थी. लेकिन पहले की तरह ही आज दिन तक इन सभी पदों पर कभी भी पूरी तरह से नियुक्ति नहीं की जा सकी. राजस्थान हाईकोर्ट में 2014 के बाद पहली बार मई 2018 को जजों की संख्या जरूर 39 हो गई थी. इससे मामलों के निस्तारण में भी तेजी देखने को मिली. लेकिन, मई 2019 तक एक वर्ष से भी कम समय में जजों की संख्या घटते-घटते 24 पर रह गयी थी और अब 2 दो साल बाद 31 मई 2020 को भी राजस्थान हाईकोर्ट अपने पूर्व स्थिती में आ गया है. राजस्थान हाईकोर्ट में स्वीकृत 50 पदों में से मात्र 25 पदों पर ही जज कार्यरत है. लॉकडाउन के चलते फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट में अतिआवश्यक प्रकरणों की ही सुनवाई हो रही है जिसके चलते बहुत कम नए केस फाइल हो रहे हैं. लेकिन लॉकडाउन के बाद अचानक मुकदमों की संख्या में इजाफा होना तय है. ऐसे में अब राजस्थान हाईकोर्ट नए जजों की नियुक्ति की उम्मीद लगाए हुए है. ये अलग बात है कि 6 अक्टूबर 2019 को राजस्थान के 37 वें मुख्य न्यायाधीश की शपथ लेते हुए जस्टिस इन्द्रजीत महांति ने कहा था कि वे शीघ्र ही जजों की नियुक्ति का प्रयास करेंगे. 

अंतिम बार 28 मई 2018 को कॉलेजियम किया गया: 
राजस्थान हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की सिफारिश के लिए अंतिम बार 28 मई 2018 को कॉलेजियम किया गया था. कॉलेजियम ने 20 पदों के लिए 11 डीजे कोटे के और 9 अधिवक्ता कोटे से नाम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को भेजे थे. सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश पर केन्द्र सरकार ने इन दो सालों में अलग अलग तारीखों पर डीजे कोटे से कुल 7 जजों की नियुक्ति की है. इनमें जस्टिस अभय चतुवेर्दी, जस्टिस नरेन्द्रसिंह ढड्डा, जस्टिस देवेन्द्र कच्छवाहा, जस्टिस सतीश शर्मा, जस्टिस प्रभा शर्मा, जस्टिस मनोज व्यास और जस्टिस रामेशवर व्यास शामिल है. वहीं अधिवक्ता कोटे से भेजे गये 9 नाम में से केवल जस्टिस महेन्द्र गोयल का नाम ही क्लीयर किया गया. एडवोकेट मनीष सिसोदिया को रिकंसीडर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दुबारा केन्द्र सरकार को भेजा है तो वहीं केन्द्र ने एक बार फिर एडवोकेट फरजंद अली का नाम सुप्रीम कोर्ट को रिकंसीडरेशन के लिए भेजा है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीसरी बार ये नाम केन्द्र को भेजे जाने की भी खबर है. 

अदालतें खुलने पर एक नई चुनौति का सामना करना होगा:
जजों की कमी से जूझ रहा राजस्थान हाईकोर्ट लॉकडाउन के बाद अदालतें खुलने पर एक नई चुनौति का सामना करना होगा. एक तरफ राजस्थान हाईकोर्ट सहित अधिनस्थ अदालतों में पेडिंग केसों की संख्या 16 लाख से अधिक है वहीं राजस्थान हाईकोर्ट में ही 1 जून 2020 को कुल 4 लाख 85 हजार से अधिक मुकदमे पेडिंग है. रेगुलर अदालते खुलने के बाद इस संख्या में इजाफा होना तय है. नेशनल ज्यूडिशल डाटा ग्रिड के अनुसार इन केसों में सर्वाधिक पेंडेंसी पिछले एक वर्ष में हुई है. 1 वर्ष से भी कम समय में दायर किये गये 1 लाख 43 हजार से अधिक केस पेंडिंग है. जो कि राजस्थान हाईकोर्ट की कुल पेडेंसी का 29 प्रतिशत से अधिक है. इसका मुख्य कारण हाईकोर्ट जजों की कमी है. जिसके बाद से ही अधिवक्ताओं से लेकर पक्षकारों को भी  में पिछले दो साल कई माह से अदालतों में लगने वाले अधिकांश मुकदमों में तारीखे ही दी जा रही है. 

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नए जजों की नियुक्ति नहीं हो पाना एक बड़ा विषय:
सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान से जुड़े 2—2 जजों की मौजूदगी के बावजूद नए जजों की नियुक्ति नहीं हो पाना एक बड़ा विषय है. जजों की नियुक्ति नहीं होने से पक्षकारों को मिलने वाले न्याय में देरी होती रही है. कारेोना के बाद लगाए गये लॉकडाउन के चलते हालात ओर भी कमजोर हुए है. ऐसे में रेगुलर अदालत लगने पर जजों पर कार्य का दबाव ओर भी बढ़ जायेगा. 

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