VIDEO: यहां मौत के बाद भी मुर्दों से करवाई जाती है मजदूरी

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/08/12 03:17

जैसलमेर: कहते हैं मौत के बाद इंसान को भगवान के दर पर सकून नसीब होता है. किसी भी व्यक्ति की मौत के बाद लोग उसकी आत्मा की शांति और स्वर्ग में जगह के लिये प्रार्थना करते हैं लेकिन जैसलमेर की एक ग्राम पंचायत ऐसी है जहां पर मौत के बाद भी मुर्दों से मजदूरी करवाई जाती है. ये एक ऐसी ग्राम पंचायत है जहां मुर्दे को न तो भगवान की शरण में जाने दिया जाता है और न ही उसकी आत्मा की शांति के लिये दुआ की जाती है बल्कि मौत के बाद भी उसको लगा दिया जाता है वापिस मजदूरी में... जी हां सुनने में ये आपको बिल्कुल अटपटा लग रहा होगा लेकिन ये हम नहीं कह रहे बल्कि खुद सरकारी दस्तावेज कह रहे हैं जहां बाकायदा मुर्दों से मजदूरी करवाई गई है और उन्हें उनकी मजूदरी का भुगतान भी किया गया है.  

मुर्दों से मजदूरी की पूरी कहानी: 
सरहदी जिला जैसलमेर जो प्रदेश के अंतिम छोर पर भारत पाक सीमा पर आया हुआ है और जिसे रेगिस्तानी जिले के रूप में भी जाना जाता है. इसी जैसलमेर जिले की एक पंचायत समिति है सांकडा जो पोकरण विधानसभा के अधीन आती है और इसी पंचायत समिति की एक जादुई ग्राम पंचायत है मानासर जहां पर मुर्दों से मजदूरी करवाई जाती है. मौत के बाद आत्मा की शांति की दुआ भले ही दुनिया भर में मांगी जाती हो लेकिन यहां पर मौत के बाद आत्मा की शांति के बजाय आत्मा से मजदूरी करवाई जाती है.   

नरेगा के तहत पंचायत ने मुर्दों को भी रोजगार की गारंटी दे दी: 
जैसलमेर जिले की मानासर ग्राम पंचायत जहां पर केन्द्र सरकार की योजना नरेगा के तहत ग्रामीणों को रोजगार की गांरटी देने के चक्कर में पंचायत ने मुर्दों को भी रोजगार की गारंटी दे दी. योजना के तहत ग्राम पंचायत में कई ऐसे कार्य हैं जहां पर मजदूरों की सूची में ऐसे नाम है जो सालों पहले इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं लेकिन उनके नाम से सरकारी कागजों में मजदूरी करना दिखया जा रहा है और उनके नाम से भुगतान भी नियमित रूप से उठ रहा है.  

लाखों का भुगतान उठाया जा रहा: 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की साफ सुथरे प्रशासन व न खाउंगा और खाने दुंगा के वाक्य की धज्जियां यहां पर चुने हुए जनप्रतिनिधि और सरकार के कारिंदे जमकर उड़ा रहे हैं. भ्रष्टाचार का आलम यह है कि मौके पर काम किये बिना ही लाखों का भुगतान उठाया जा रहा है और सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी द्वारा इसकी बंदरबांट भी की जा रही है.   

पूरे मामले पर हमारे द्वारा की गई केस स्टडी-
केस-1- 
मृतक का नाम: रणजीताराम
मृत्यू की तारीख: 18.12.2017
नरेगा योजना में मजदूरी का विवरण
दिनांकः 01.10.18 को 06 दिन काम किया व 1002 रूपये मजदूरी का भुगतान हुआ
दिनांकः 13.10.18 को 12 दिन काम किया व 1620 रूपये मजदूरी का भुगतान हुआ
नोटः रणजीताराम की मौत 18.12.17 को हो गई थी जिसका मृत्यू प्रमाण पत्र खुद पंचायत द्वारा जारी किया गया है लेकिन उसकी मौत के बाद पंचायत द्वारा सरकारी कार्य में उसके द्वारा मजदूरी करना दिखाया गया और बाकायदा मजदूरी का भुगतान भी किया गया है ऐसे में सवाल यह उठता है कि मौत के बाद कैसे मजदूरी की गई और इसके नाम से जो भुगतान उठा उसका क्या किया गया. 

केस-2- 
मृतक का नाम: नखताराम
मृत्यू की तारीख: 05.01.2011
नरेगा योजना में मजदूरी का विवरण
दिनांक 12.09.16 को 13 दिन काम किया व 1014 रूपये मजदूरी का भुगतान हुआ
दिनांक 27.09.16 को 13 दिन काम किया व 1066 रूपये मजदूरी का भुगतान हुआ
दिनांक 12.10.16 को 13 दिन काम किया व 1027 रूपये मजदूरी का भुगतान हुआ
नोटः नखताराम की मौत 05.01.2011 को हो गई थी जिसका मृत्यू प्रमाण पत्र खुद पंचायत द्वारा जारी किया गया है लेकिन उसकी मौत के बाद पंचायत द्वारा सरकारी कार्य में उसके द्वारा मजदूरी करना दिखाया गया और बाकायदा मजदूरी का भुगतान भी किया गया है ऐसे में सवाल यह उठता है कि मौत के बाद कैसे मजदूरी की गई और इसके नाम से जो भुगतान उठा उसका क्या किया गया. 

केस-3- 
मृतक का नाम: केंकू देवी
मृत्यू की तारीख: 28.03.2006
नरेगा योजना में मजदूरी का विवरण
दिनांक 12.02.17 को 10 दिन काम किया व 1050 रूपये मजदूरी का भुगतान हुआ
दिनांक 27.02.17 को 09 दिन काम किया व 963 रूपये मजदूरी का भुगतान हुआ
दिनांक 27.06.17 को 12 दिन काम किया व 1368 रूपये मजदूरी का भुगतान हुआ
नोटः केंकू देवी की मौत 28.03.2006 को हो गई थी जिसका मृत्यू प्रमाण पत्र खुद पंचायत द्वारा जारी किया गया है लेकिन उसकी मौत के बाद पंचायत द्वारा सरकारी कार्य में उसके द्वारा मजदूरी करना दिखाया गया और बाकायदा मजदूरी का भुगतान भी किया गया है ऐसे में सवाल यह उठता है कि मौत के बाद कैसे मजदूरी की गई और इसके नाम से जो भुगतान उठा उसका क्या किया गया.  

सार्वजनिक टांकों के निर्माण में भी जमकर धांधली:
मानासर ग्राम पंचायत में मुर्दों की मजदूरी के प्रकरण की जांच करने जब हम पहुंचे तो यहां और भी कई चौंकाने वाली चीजें सामने आई जिसमें न केवल मुर्दों के नाम से पैसे उठाये गये हैं बल्कि ग्रामीण विकास की विभिन्न योजनाओं में सार्वजनिक टांकों के निर्माण में भी जमकर धांधली की गई है. ग्रामीणों की मानें तो पंचायत द्वारा एक ही काम पर कई बार नये नये नाम से भुगतान उठाया गया है और धरातल पर आज भी वो काम पूरे नहीं हुए हैं. ग्रामीण विकास में पक्के कामों में भृष्टाचार को रोकने के लिये सरकार द्वारा प्रत्येक काम की जीयो टैगिंग की जाती है जाकि जीपीएस तकनीक पर उस जगह के काम का आंकलन किया जा सके लेकिन इस ग्राम पंचायत में एक ही जियो टैगिंग पर अलग अलग नामों से लाखों रूपये का काम करवाया गया है और उसके भुगतान की भी बंदरबांट कर दी गई लेकिन मौके पर आज भी काम अधूरे ही पडे हैं.

फर्जी मजदूरी का हवाला विभिन्न कार्यों में दिया गया: 
वहीं ग्राम पंचायत के आंगनवाडी केन्द्र में काम करने वाली कई महिलाओं के नाम से भी फर्जी मजदूरी का हवाला विभिन्न कार्यों में दिया गया है जिसमें उनके नाम से बड़ा भुगतान किये जाने के दस्तावेज मिले हैं. जबकि सरकारी नौकरी में काम करने वाले लोग नरेगा योजना में मजदूरी नहीं कर सकते हैं. ग्राम पंचायत में धांधली का आलम यह है कि नियम और कायदों को ताक में रखते हुए करोडों रूपये के सरकारी राजस्व का जमकर दुरूपयोग किया गया है जिसकी ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायतें भी कई गई लेकिन पिछले पांच सालों में इस पंचायत में हुई धांधली को लेकर न तो जिम्मेदारों ने कोई कार्यवाही की और न ही जनता के चुने हुए नेताओं ने जो सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त भारत के दावे का दम भरते हैं. 

शिकायतों पर आजतक कोई ठोस कार्यवाही नहीं: 
इस पूरे मामले पर ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पंचायत समिति के विकास अधिकारी से लेकर उपखण्ड अधिकारी, पुलिस थाना पोकरण, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद, जिला कलक्टर व पुलिस अधीक्षक तक शिकायतें की है लेकिन शिकायतों पर आजतक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो पाई है. पूरे मामले की पड़ताल के बाद जब हमने जिला कलक्टर से इस मामले में बात की तो कलक्टर ने मामले में जांच करने का आश्वासन तो दिया है लेकिन देखना यह होगा कि जैसलमेर प्रशासन भ्रष्टाचार के इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भ्रष्टाचार मुक्त भारत के संकल्प में किस तरह से अपना योगदान दिखाता है. 

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