High Court का बड़ा फैसला : Jharkhand लोक सेवा आयोग की मेरिट सूची रद्द, कार्रवाई के भी निर्देश

High Court का बड़ा फैसला : Jharkhand लोक सेवा आयोग की मेरिट सूची रद्द, कार्रवाई के भी निर्देश

High Court का बड़ा फैसला : Jharkhand लोक सेवा आयोग की मेरिट सूची रद्द, कार्रवाई के भी निर्देश

रांची: झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की मेरिट सूची (Merit List) को रद्द कर दिया और 8 सप्ताह में एक नई मेरिट सूची तैयार करने का आदेश दिया. अदालत ने राज्य सरकार को मेरिट सूची में गलती के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है.

छठवीं लोक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा की मेरिट सूची की चल रही थी सुनवाई:
यह अहम फैसला (Important Decision) झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी (Justice Sanjay Kumar Dwivedi) की पीठ ने दिया है. पीठ JPSC यानी झारखंड लोक सेवा आयोग की छठवीं लोक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा की मेरिट सूची को चुनौती दी जाने के मामले में सुनवाई कर रहा था. पीठ ने 11 फरवरी, 2021 को सुनवाई पूरी होने के बाद के मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था. जानकारी के अनुसार, न्यायालय ने कहा था कि झारखंड लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित छठी संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा (Sixth Combined Civil Services Competitive Examination) के परिणामों को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सात जून को फैसला सुनाया जाएगा. अदालत ने इस मामले में सफल अभ्यर्थियों को भी प्रतिवादी बनाया था. 
 
16 विभिन्न याचिकाओं पर तीन फरवरी से लगातार हो रही थी सुनवाई:
बता दें कि मामले में दायर 16 विभिन्न याचिकाओं पर उच्च न्यायालय की ओर से तीन फरवरी से लगातार सुनवाई की जा रही थी. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि छठी जेपीएससी परीक्षा के परिणाम में काफी गड़बड़ियां हैं. याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि जेपीएससी ने क्वालीफाइंग पेपर (Qualifying Paper) के अंक जोड़कर फाइनल रिजल्ट तैयार किया था, जो कि गलत है. इसके साथ ही रिजल्ट तैयार करने में और भी हेरफेर की गई है. इस आधार पर, याचिकाकर्ताओं ने रिजल्ट को निरस्त कर दोबारा नए सिरे से परिणाम जारी करने की मांग की थी. 

परीक्षा का परिणाम विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप ही जारी किया गया: सरकारी वकील
जबकि, झारखंड सरकार की ओर से पैरवी कर रहे महाधिवक्ता राजीव रंजन व जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने याचिकाओं का विरोध किया था. उन्होंने अदालत को बताया कि जेपीएससी ने छठी सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप ही जारी किया था. इस परिणाम के जरिये 326 उम्मीदवारों को सफल घोषित किया गया था. परिणाम प्रकाशित करने के बाद नियुक्ति अनुशंसा के लिए नाम राज्य सरकार को भेजे गए थे.
 

और पढ़ें