जोधपुर Jodhpur: बच्चा पैदा करने के लिए पंद्रह दिन की पैरोल देने के फैसले के बाद बड़ी संख्या में कैदी करने लगे आवेदन, राजस्थान सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट

Jodhpur: बच्चा पैदा करने के लिए पंद्रह दिन की पैरोल देने के फैसले के बाद बड़ी संख्या में कैदी करने लगे आवेदन, राजस्थान सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट

Jodhpur: बच्चा पैदा करने के लिए पंद्रह दिन की पैरोल देने के फैसले के बाद बड़ी संख्या में कैदी करने लगे आवेदन, राजस्थान सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट

जोधपुर: उम्र कैद की सजा काट रहे एक कैदी (Prisoner) को उसकी पत्नी की याचिका पर बच्चा पैदा करने के लिए पंद्रह दिन की पैरोल (Parole) देने के हाईकोर्ट (High Court ) के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार (Rajasthan government) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है. राज्य सरकार का कहना है कि इस फैसले के बाद बच्चा पैदा करने के नाम पर पैरोल मांगने वालों की बाढ़ आ गई है. 

राज्य सरकार की इस अपील पर मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए अगले सप्ताह इस पर सुनवाई शुरू करने का कहा है. पांच अप्रैल को हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित मुख्य पीठ में न्यायाधीश संदीप मेहता व फरजंद अली की खंडपीठ ने एक बंदी की पत्नी की याचिका पर अजमेर जेल में बंद उसके पति को बच्चा पैदा करने के लिए पंद्रह दिन की पैरोल देने का फैसला किया था. हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अब राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है. 

इस फैसले के बाद बच्चा पैदा करने के नाम पर पैरोल मांगने वालों की बाढ़ आ गई:
सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि इस फैसले के बाद बच्चा पैदा करने के नाम पर पैरोल मांगने वालों की बाढ़ आ गई. बच्चा पैदा करने के नाम पर पैरोल देने का कोई प्रावधान भी नहीं है. ऐसे में इस फैसले को खारिज किया जाए. हालांकि राज्य सरकार की तरफ से यह नहीं बताया गया कि इस फैसले के बाद अब तक कितने कैदी इस फैसले को आधार बना पैरोल मांग चुके है. 

बंदी को हाईकोर्ट ने संतान उत्पत्ति के लिए 15 दिन की पैरोल दी:
इस वर्ष पांच अप्रैल को राजस्थान हाईकोर्ट ने अजमेर जेल में उम्रकैद काट रहे बंदी को हाईकोर्ट ने संतान उत्पत्ति के लिए 15 दिन की पैरोल दी है. उसकी शादी हो चुकी है, लेकिन कोई संतान नहीं है. पत्नी शादी से खुश है और बच्चा चाहती है. इसलिए उसने अजमेर कलेक्टर को अर्जी दी थी. जवाब नहीं मिला तो उसने हाईकोर्ट की शरण ली. 

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