हाईकोर्ट खंडपीठ ने दो बच्चों को पिता के पास भेजा, मां द्वारा पेश की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को किया खारिज

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/11/08 12:11

जोधपुर: अपने दो बच्चों को पिता से मुक्ति दिला कर अपने पास रखने के लिए परबतसर के निकट स्थित चारणवास गांव निवासी नंदराम की पत्नी ने हाईकोर्ट में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पेश कर गुहार की कि उसके दोनों बच्चों को उसे सौंपा जाए और उसके पति की कैद से बच्चों को मुक्त कराया जाए. जिस पर इस मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट जस्टिस संदीप मेहता व जस्टिस अभय चतुर्वेदी की खंडपीठ ने प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत अपनाते हुए इस मामले का निस्तारण कर दिया.

खंडपीठ ने बच्चों को पिता के साथ भेजने के आदेश दे दिए: 
बच्चों को खंडपीठ के मध्य बुलाकर खंडपीठ में कार्यरत कोर्ट मास्टर के पास लाया गया जहां कोर्ट मास्टर ने दोनों बच्चों को टॉफी दी. टॉफी देने के बाद बच्चों को स्वतंत्र छोड़ दिया गया बच्चों के सामने एक तरफ तरफ मां थी और एक तरफ पिता. खंडपीठ ने जब पाया कि बच्चों ने मां की तरफ देखा तक नहीं और वहां से सीधे वह अपने पिता के पास चले गए तब खंडपीठ ने बच्चों को पिता के साथ भेजने के आदेश दे दिए. अधिवक्ता महिपाल सिंह ने इस मामले में प्रार्थी नंदराम का पक्ष रखा. वहीं अतिरिक्त महाधिवक्ता फरजंद अली ने सरकार की ओर से पैरवी की. 

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