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जयपुर, जोधपुर, कोटा में 2-2 निगम के गठन को हाईकोर्ट में चुनौती, राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए रद्द करने की गुहार

जयपुर, जोधपुर, कोटा में 2-2 निगम के गठन को हाईकोर्ट में चुनौती, राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए रद्द करने की गुहार

जयपुर: जयपुर, जोधपुर, कोटा में दो नगर निगम बनाने के खिलाफ राजस्थान हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी है. प्रिया यादव की ओर से एडवोकेट माही यादव ने जनहित याचिका दायर करते हुए कोरोना के बाद बदली परिस्तिथियों में राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार के आदेश को रद्द करने की गुहार लगायी गयी है. याचिका में कहा गया है कि कोविड—19 की वजह से राज्य की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है और केवल जयपुर नगर निगम को ही दो हिस्सों में बांटने पर करीबन 518 करोड़ रुपए का आर्थिक भार आता है ऐसे में इस प्रस्ताव को फिलहाल टाला जाना चाहिए. याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है. 

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जयपुर में ही सरकार पर 51801 लाख रुपए का अतिरिक्त भार आएगा: 
याचिकाकर्ता प्रिया यादव की वकील माही यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने 18 अक्टूबर और 5 नवंबर के आदेश से जयपुर, कोटा और जोधपुर निगम को दो हिस्सों में बांट दिया है. जयपुर निगम की ही बात करें तो दो निगम बनने से कुल वार्षिक बजट 204649 लाख रुपए होगा जबकि एक निगम रहने पर खर्चा152848 लाख रुपए रहता यानि कि दो निगम बनने से जयपुर में ही सरकार पर 51801 लाख रुपए का अतिरिक्त भार आएगा. कोविड—19 की वजह से जहां सरकार ने कर्मचारियों के वेतन में कटौती की है वहीं इस तरह अतिरिक्त भार नहीं डाला चाहिए. इसी वजह से दो निगम बनाने क प्रस्ताव फिलहाल वापस लिया जाना चाहिए. 

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झालावाड़: जिले के खानपुर थाना क्षेत्र के जरगा गांव मे अपने खेत पर कार्य करने के लिए रखे गए मजदूर की पत्नी के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है. जहां एक गुरुजी उनकी आर्थिक स्थिति का फायदा उठाते हुए मजदूर की पत्नि के साथ 3-4 माह से यौन शोषण कर रहा था. पति द्वारा देखने पर खेत मालिक महिला के पति के साथ मारपीट कर चौटे पंहुचाई. साथ ही अन्य को बताने पर जान से मारने की धमकी दी.

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पति के देखने पर दी जान से मारने की धमकी दी: 
थानाधिकारी कमलचंद मीणा के अनुसार सरडा भालता निवासी विवाहिता ने दर्ज रिपोर्ट में बताया कि गांव जरगा मे दो वर्ष से मजदूरी के लिए लगाए गए पति-पत्नी रह रहे थे. 30 मई शनिवार को दिन के 3 बजे खेत मालिक शिक्षक शम्भु दयाल मीणा ने मजदूर की पत्नी के साथ दुष्कर्म किया. पति के देखने पर मालिक ने मारपीट कर जान से मारने की धमकी दी. सोमवार को खानपुर थाना पंहुचकर पति के साथ पत्नी द्वारा मामला दर्ज कराया गया. पुलिस ने विवाहिता का मामला दर्ज कर मेडिकल करवाकर जांच शुरू की है.

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sp ऑफिस में की आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग:
हालांकि अभी तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई. ऐसे में महिला व उसके पति को लगातार धमकियां मिल रही है ऐसे में आज पीड़ित महिला और उसके पति ने sp ऑफिस में आकर परिवाद दिया और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की.
अब पुलिस अधीक्षक के सारा मामला संज्ञान में आने पर जल्द कार्यवाही की बात की है. 
 

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सिरोही: जिले के मंडार थाना क्षेत्र के अमरपुरा गांव में एक फार्म हाऊस पर केसुआ निवासी एक अध्यापक द्वारा फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या करने का मामला सामने आया हैं. रेवदर डिप्टी फाऊलाल मीणा ने जानकारी देते हुए बताया कि मृतक भीमाराम ने आत्महत्या करने से पूर्व एक सुसाइट नोट लिखा था, जिसमें उसने बताया कि वो रायपुर की सीनियर हायर सेकेंडरी स्कूल में अध्यापक के पद पर कार्यरत था. जिसकी कोरोना महामारी में ड्यूटी लगी हुई थी. वहीं दो दिन बाद उसके बेटे की शादी भी तय थी. लेकिन कोरोना ड्यूटी के चलते वो अपने घर परिवार को समय नहीं दे पा रहा था. जिसके चलते उसने यह निर्णय लिया हैं. 

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मृतक अध्यापक भीमाराम ने मरने से पहले अपने पूरे परिवार को फार्म हाऊस से घर भेजा. उसके बाद उसने कमरे में लगे पंखे के हुक में रस्सी से फंदा लगाकर उस पर झूल गया. जैसे ही इसकी सूचना मिली, रेवदर डिप्टी फाऊलाल मीणा व मंडार थानाधिकारी भंवरलाल जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर मंडार सीएचसी की मोर्चरी में रखवाया. थोड़ी देर बाद उसके शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंपा जाएगा. 
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बिलासपुर: केरल में गर्भवती हथिनी को विस्फोटक खिलाने के बाद अब हिमाचल प्रदेश में ऐसा ही एक इंसानियत को शर्मशार करने वाला मामला सामने आया है. हिमाचल प्रदेश के जिला बिलासपुर के झंडुत्ता इलाके में गर्भवती गाय को किसी ने विस्फोटक का गोला खिला दिया. इससे गाय बुरी तरह से जख्मी हो गई. 

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पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया: 
इस घटना का वीडियो गाय के मालिक ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जो काफी तेजी से वायरल हो रहा है. जानकारी मिलने पर पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच करने में जुट गई है. लोगों में इस घटना को लेकर काफी गुस्सा है. वहीं मालिक ने पड़ोस में रहने वाले युवक पर गाय को विस्फोटक खिलाने का आरोप लगाया है. 

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गर्भवती हथिनी को अनानास में खिलाए थे पटाखे:
इससे पहले केरल के मलप्पुरम में गर्भवती हथिनी को कुछ शरारती तत्वों ने अनानास में पटाखे भरकर खिला दिया था, जिससे उसका मुंह और जबड़ा बुरी तरह से जख्मी हो गया था. हथिनी दो-तीन दिन तक बिना कुछ खाएं पिए पानी नें खड़ी रही थी. बाद में उसकी और गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई. इस घटना के बाद लोगों ने नाराजगी जताई थी. गर्भवती हथिनी की हत्या के मामले में एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है. 

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जयपुर: एक तरफ जहां हवाई यात्रा अब गति पकड़ने लगी है, वहीं दूसरी तरफ ट्रेनों में यात्री भार कम देखा जा रहा है. कोविड-19 के डर की वजह से यूं तो शुरुआती दिनों में फ्लाइट्स में भी यात्रीभार काफी कम रहा. शुरुआती 1 सप्ताह तक 30 से 40% तक यात्रीभार ही विमानों में देखा गया, लेकिन अब फ्लाइट्स में 80 फ़ीसदी से भी ज्यादा सीटें फुल चल रही हैं. कई विमानों में तो केवल इक्का-दुक्का सीटें ही खाली चल रही हैं. जयपुर से कोलकाता, गुवाहाटी, पुणे, बेंगलुरु आदि शहरों के लिए हवाई यात्रीभार काफी ज्यादा है. जयपुर एयरपोर्ट से वर्तमान में रोजाना 12 से 13 फ्लाइट संचालित हो रही हैं. वहीं ट्रेनों की बात करें तो अभी भी यात्रीभार की कमी देखी जा रही है. 1 जून से जयपुर जंक्शन से 6 विशेष ट्रेनों का आवागमन चल रहा है. ये ट्रेनें मुंबई, अहमदाबाद, जोधपुर, दिल्ली, हावड़ा आदि शहरों को जोड़ रही हैं. हावड़ा और दिल्ली को छोड़ दें तो अन्य ट्रेनों में यात्रीभार की कमी देखी जा रही है. 

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जानिए ट्रेन में कितनी सीटें मौजूद?

- ट्रेन संख्या 02956 जयपुर बॉम्बे सुपर में स्लीपर में 7 जून के लिए 223 सीटें उपलब्ध

- 8 जून के लिए 278, 9 जून के लिए 310, 10 जून के लिए 312 सीटें खाली

- इसी ट्रेन में 3AC में 7 जून के लिए 254 सीटें उपलब्ध

- 8 जून के लिए 263, 9 जून के लिए 260 और 10 जून के लिए 268 सीटें खाली

- 2AC में 7 जून के लिए 23, 8 जून के लिए 30 सीट खाली

- 9 जून के लिए 37, 10 जून के लिए 39 सीटें उपलब्ध

- जयपुर-जोधपुर सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन संख्या 02478 में 7 जून के लिए चेयर कार में 211 सीटें उपलब्ध

- 8 जून के लिए 210 सीटें, 9 जून के लिए 226 और 10 जून के लिए 216 सीटें उपलब्ध

- इसी ट्रेन में 3AC में 7 जून के लिए 85 सीटें उपलब्ध

- 8 जून के लिए 81 सीटें, 9 जून के लिए 110 और 10 जून के लिए 89 सीटें उपलब्ध

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...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की रिपोर्ट

राजस्थान हाई कोर्ट में कॉलेजियम हो लेकर जारी रहा बैठकों का दौर, ग्रीष्मावकाश से पूर्व राजस्थान हाईकोर्ट में हो सकता है कॉलेजियम

राजस्थान हाई कोर्ट में कॉलेजियम हो लेकर जारी रहा बैठकों का दौर, ग्रीष्मावकाश से पूर्व राजस्थान हाईकोर्ट में हो सकता है कॉलेजियम

जयुपर: राजस्थान हाईकोर्ट में एक बार फिर से दो साल बाद कॉलेजियम को लेकर चर्चा जोरों पर है. पिछले एक साल से करीब आधा दर्जन से बार से अधिक हाईकोर्ट में कॉलेजियम होने की चर्चाए चलती रही है. पूर्व चीफ जस्टिस एस रविन्द्र भट्ट के अंतिम समय में भी कई अधिवक्ताओं से नाम तक मांगे गये थे. लेकिन जजों की नियुक्ति को लेकर पहला कदम भी पूरा हो पाता उससे पूर्व ही जस्टिस भट्ट 4 माह के कार्यकाल के बाद ही सुप्रीम कोर्ट चले गये. वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस इन्द्रजीत महांति के आने के बाद से ही राजस्थान हाईकोर्ट में कॉलेजियम को लेकर चर्चाए चलती रही है. मुख्य न्यायाधीश की शपथ लेने के साथ ही सीजे महांति ने सभी साथी जजों से राय मशवीरा कर कई निर्णय लेने की बाते कही थी. शायद मुख्य न्यायाधीश अब राजस्थान से किये गये अपने वादे को पूरा करने जा रहे हैं. इसी के चलते पिछले कुछ दिनों में कॉलेजियम की कवायद के पंख लगे हैं. सूत्रों की माने तो पिछले सप्ताह शनिवार, रविवार के बाद सोमवार को भी कॉलेजियम ने काफी कवायद की है. फिलहाल कॉलेजियम द्वारा सभी नाम तय होने की कोई खबर नहीं है. लेकिन डीजे कोटे से अधिकांश नाम पर कॉलेजियम के तीनों जजों की बीच सहमति बनने की खबरे है. जिसके चलते डीजे कोटे के 8 नाम सबसे पहले तय किये जा सकते हैं. 

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अधिवक्ता कोटे के 17 पद और डीजे कोटे के 8 पद रिक्त: 
राजस्थान हाईकोर्ट में स्वीकृत जजों के पदों की कुल संख्या 50 है. ये अलग बात है कि राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना के 70 सालों में 2018 में पहली बार सबसे ज्यादा 36 जज कार्यरत थे. उसके बाद से ही जजों के तबादले और सेवानिवृति के चलते हाईकोर्ट में जजों की संख्या घटकर फिर से मात्र 25 रह गयी है. रिक्त 25 पदों पर नियुक्ति की कवायद शुरू होने की चर्चा है जिसके चलते पिछले सप्ताह कॉलेजियम के दूसरे जज जस्टिस संगीत लोढा के जयपुर में रहने और सीजे सहित कॉलेजियम के तीसरे जज के साथ बैठके होने की खबरे रही है. फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट में 17 अधिवक्ता कोटे से भरे जाने वाले पदों को लेकर बहुत ज्यादा उत्सुकता है प्रदेश के साथ ही दिल्ली के गलियारों में भी इन पदों पर होने वाली नियुक्तियों को लेकर निगाह बनी हुई. सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़े दो जजों की मौजुदगी के चलते वर्तमान कॉलेजियम को काफी सधकर कवायद करनी होगी. हाईकोर्ट के सूत्रो के अनुसार फिलहाल कॉलेजियम अधिवक्ता कोटे से 10—12 नाम पहली सूची में ग्रीष्मवकाश से पूर्व भेज सकता है वहीं कुछ नाम जुलाई माह में भेजे जा सकते हैं. 

2 सीटे रखनी होगी रिक्त:
राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा मई 2018 में भेजे गये 20 नाम मे से 2 नाम अभी भी पेडिंग है. अधिवक्ता कोटे के मनीष सिसोदिया और फरजंद अली के नाम की फाइल केन्द्र सरकार के पास पेडिंग है. फरजंद अली का नाम हाल ही में केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट वापस भेजा था. सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर से फरजंद अली का नाम केन्द्र को रैफर कर चुका है. ऐसे में इन दो अधिवक्ताओं के नाम की फाइल पेडिंग होने से राजस्थान हाईकोर्ट 23 नाम ही भेजा सकता है. राजस्थान हाईकोर्ट में फिलहाल 25 जजों के पद रिक्त है उनमें से भी अधिवक्ता कोटे के नाम को लेकर सबसे ज्यादा पेचिदगी रहती है. 

17 पद पर दावेदारों की लंबी कतार:
एक वक्त था जब राजस्थान हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की खबर सिर्फ नियुक्ति आदेश के समय ही बाहर आती थी. लेकिन वक्त के साथ जजों के पद बढ़ने और अधिवक्ताओं में जजों के पद को लेकर बढ़ी महात्वाकांक्षा ने कॉलेजियम की खबरों को बाहर ला दिया. बहुत ज्यादा सतर्कता बरती जाने के बावजूद छनछनकर खबरे बाहर आती रही है. इस बार भी 17 में से 15 पदों के लिए प्रदेश की वकालात से जुड़े करीब दो दर्जन से अधिक अधिवक्ताओं के नाम चर्चा में रहे हैं. अधिवक्ताओं के सोशल मीडिया पर भी इस बार कॉलेजियम को लेकर प्रतिदिन अलग अलग मैसेज वायरल हो रहे हैं. ये अलग बात है कि इन नामों की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट में जाने से पहले अधिकारिक रूप से हाईकोर्ट कभी नहीं करता हैं. 

जयपुर हाईकोर्ट से नाम जो चर्चा में हैं— एडवोकेट शैलेशप्रकाश शर्मा, राजीव सुराणा, समीर जैन, सुदेश बंसल, --- दिनेश यादव, राकेश मीणा, राजेश गोस्वामी, स्वदीपसिंह होरा, हरेन्द्र सिनसिनवार, सुमति विश्नोई, शॉलिनी शेरोन  के नाम  चर्चा में रहे है...

जोधपुर हाईकोर्ट से नाम जो चर्चा में हैं — रेखा बोराणा, सुनील जोशी, विनीत जैन, मनोज भण्डारी, राजेश पंवार, कुलदीप माथुर,--- महेश थानवी, विकास बालिया, कुलदीप माथुर, सी एस कोटवानी,धीरेन्द्रसिंह, श्याम लदरेचा, डीके गौड़ और सुप्रीम कोर्ट में सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष सिंघवी सहित करीब दो दर्जन से अधिक अधिवक्ताओं के नाम फिलहाल चर्चा में है.

जिला एवं सत्र न्यायाधीश— वरिष्ठता क्रम के अनुसार प्रदेश की न्यायपालिका से 8 जिला एवं सत्र न्यायाधीश के नाम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को भेजे जाने है राजस्थान हाईकोर्ट की वेबसाईट के अनुसार वरिष्ठता क्रम में डीजे नर्सिंगदास व्यास, डीजे उमाशंकर व्यास, डीजे संगीता शर्मा, डीजे शुभा मेहता, डीजे विनोद भारवानी, डीजे मदनगोपाल व्यास, डीजे देवेन्द्र प्रकाश शर्मा और डीजे निर्मलसिंह मेड़तवाल का नाम शामिल है. पिछले कई समय से हाईकोर्ट कॉलेजियम द्वारा भेजे गये डीजे के नाम में ऐसा कम ही हुआ है कि किसी डीजे का नाम रोका गया हो. सूत्र भी बताते हैं कि इस बार भी 8 में से 6 डीजे के नाम पर तो कॉलेजियम अपनी मुहर लगा चुका है लेकिन सभी 8 डीजे के नाम अगले सप्ताह तक तय किये जा सकते हैं.

दूसरी तरफ हमारे सूत्रों के अनुसार कॉलेजियम की आम राय में जयपुर से 5 और जोधपुर से 6 अधिवक्ताओं के नाम को लेकर लगभग कवायद पूर्ण हो चुकी है. लेकिन इन अधिवक्ताओं के नाम पर कुछ ओर जानकारिया जुटाने के लिए फिलहाल कुछ ओर बैठके कि जा सकती है. तो दूसरी तरफ शेष अधिवक्ताओं में से 4 नाम तय करने में कॉलेजियम को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. कॉलेजियम की तीसरी जज जस्टिस सबीना के चण्डीगढ दौरे के चलते फिलहाल ये कवायद 1—2 दिन के लिए टल गयी है. राजस्थान हाईकोर्ट ने शनिवार को सुबह होने वाली फुल कोर्ट बैठक और एक रिव्यू कमेटी बैठक को भी स्थगित कर दिया है जिसके पिछे भी कॉलेजियम की बैठक को कारण माना जा रहा है. सूत्र ये भी बताते है कि 14 जून के बाद हाईकोर्ट के ग्रीष्मकालीन अवकाश होने वाला है और जुलाई में सुप्रीम कोर्ट में जजो को लेकर कभी कॉलेजियम हो सकता है. राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति का नाम भी सुप्रीम कोर्ट जजों के लिए चर्चा में है ऐसे में कॉलेजियम 14 जून तक नाम भेजने का पूरा प्रयास करेगा. 

ओबीसी—एससी एसटी वर्ग का फंस सकता है पेच:
राजस्थान हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति कि इस कवायद में एससीएसटी और ओबीसी वर्ग का पेच फंस सकता है. क्योकि लंबे समय से इन दोनों ही वर्गो का प्रतिनिधित्व लगातार कम होता गया है. वैसे तो हाईकोर्ट—सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है. लेकिन पिछले कुछ समय से देशभर में ये मुद्दा हावी रहा है. डीजे कोर्ट से वरिष्ठता के अनुसार जो 8 नाम संभावित हो सकते है उसमें सभी नाम सामान्य वर्ग से आते हैं. वहीं लगातार जो अधिवक्ता कोटे से नाम चर्चा में हो उसमें भी एसससी एसटी वर्ग से केाई नाम मजबूती से आगे नहीं आया है. दूसरी ओर ओबीसी वर्ग से जरूर 4—5 नाम खुद को दावेदार मान रहे हैं. ऐसे में फाइनल कॉलेजियम होने तक कई नए नाम चौंकाने वाले सामने आ सकते हैं. 

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गोपनियता से बढ़ जाती है दिलचस्पी:
कॉलेजियम की प्रक्रिया के दौरान बरती जाने वाली गोपनियता के चलते ही अधिवक्ताओं के बीच लगातार कई नाम उछलते है तो कई बार प्रतिद्वदी अधिवक्ता भी जानबुझकर नाम बाहर निकालते है ताकि उनकी जगह क्लीयर हो सके. ऐसा ही कुछ डीजे के नाम को लेकर भी है. राजस्थान की न्यायपालिका में ऐसा कम ही देखने को मिलता है.  लेकिन इस बार कॉलेजियम के लिए जजों का चुनाव करना एक बड़ी चुनौति भी है. सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान हाईकोर्ट से या यहां से होकर जाने वाले 5 जज मौजूद है ऐसे में हाईकोर्ट कॉलेजियम पर भी जजों के लिए नाम का चुनाव करना आसान नहीं होता. यही वजह है कि कॉलेजियम की कोई एक बैठक नहीं होकर ये निरंतरता से होना वाला एक प्रोसेस है लेकिन अंतिम बैठक की तारीख को कॉलेजियम की तारीख मान लिया जाता है. इस प्रक्रिया में बरती जाने वाली गोपनियता एक बड़ा कारण है जो अधिवक्ताओं से लेकर आम लोगों में ना केवल अफवाहों के प्रति बल्कि तय किये जाने वाले नामों को जानने की भी जिज्ञासा पैदा करती है. सार्वजनिक पारदर्शिता के लिए फिलहाल इस प्रक्रिया में अभी एक लंबा इंतजार करना होगा. 

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जयपुर: बहुचर्चित खान महाघूसकाण्ड के मुख्य आरोपी और पूर्व आईएएस अशोक सिंघवी को जयपुर की मनी लॉन्ड्रिग विशेष अदालत ने जमानत देने से इंकार कर दिया है. सिंघवी ने 1 जून को मनी लॉन्ड्रिग विशेष कोर्ट के जज अरूण कुमार अग्रवाल के समक्ष सरेण्डर किया था. कोर्ट ने सिंघवी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिये थे. सरेण्डर करने के साथ ही सिंघवी की ओर से बिमारी और कोरोना के चलते जमानत का प्रार्थना पत्र पेश किया गया. 

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कोरोना संक्रमण के चलते जमानत देने की गुहार लगायी गयी थी:
जमानत अर्जी पेश कर सिंघवी की ओर से एडवोकेट रितेश चौहान ने सिंघवी के बिमार होने और कोरोना संक्रमण के चलते जमानत देने की गुहार लगायी गयी थी. अर्जी में कहा गया कि जेलो में लगातातर कैदियों के बीच संक्रमण बढ़ता जा रहा है. ऐसे में मुजरिम की उम्र को देखते हुए जमानत दी जाये. वहीं ईडी की ओर से एएसजी आर डी रस्तोगी, एडवोकेट आनंद शर्मा और विशेष लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि जिस बिमारी का हवाला दिया गया उस बीमारी का रिकॉर्ड पर कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया है.

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कोरोना जमानत का अधिकार नहीं हो सकता:
वहीं सुप्रीम कोर्ट के साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट भी रूलिंग दे चुकी है कि कोरोना जमानत का अधिकार नहीं हो सकता. ईडी की ओर से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की रूलिंग भी पेश की गयी. एएसजी रस्तोगी ने कहा कि ये संपूर्ण घोटाला सिंघवी की देखरेख और मॉनिटरिंग में किया गया है. इसलिए जमानत नहीं दी जाये. दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जज अरूण कुमार अग्रवाल प्रथम ने पूर्व आईएएस अशोक सिंघवी की जमानत अर्जी खारिज करने के आदेश दिये है. 
 

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जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजधानी जयपुर में दो जिला एवं सत्र न्यायालयों के गठन को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री द्वारा फाइल को मंजूरी मिलने के साथ राज्य सरकार ने इस मामले में अधिसूचना भी जारी कर दी है. जयपुर में दो नगर निगम के गठन के बाद से ही जयपुर महानगर को न्यायिक कामकाज के लिए दो हिस्सों में बांटने की चर्चा थी. राजस्थान हाईकोर्ट ने मई माह में ही दो जयपुर में दो जिला एवं सत्र न्यायालय खोलने को लेकर सरकार को अनुशषा भेजी थी. सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करने के बाद अब जयपुर में जयपुर महानगर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयपुर महानगर प्रथम और जयपुर महानगर द्वितीय का गठन किया गया है. नये कोर्ट के गठन के साथ ही अब प्रदेश में जिला एवं सत्र न्यायालयों की संख्या 35 से बढ़कर 36 हो गई है. 

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एक दर्जन फाइलो को भी मंजूरी:
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर महानगर की इन दो फाइलों के साथ ही करीब दो दर्जन से अधिक इस मामले से जुड़ी फाइलों को भी मंजूरी दी है. विधि एवं विधिक कार्य विभाग ने शुक्रवार देर रात को इन सभी अधिसूचनाओं को जारी करते हुए दोनों अदालतों के न्यायालय क्षेत्र, इनके अधिन आने वाली अदालतों के साथ विेशेष अदालतों का भी वर्गीकरण कर दिया है. जयपुर महानगर प्रथम के क्षेत्राधिकार में पुलिस कमिश्नरेट का पूर्व और दक्षिण जिले को शामिल किया गया है. वहीं जयपुर महानगर द्वितीय में पश्चित और उत्तर जिले को शामिल किया गया है. जयपुर में अब चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट जयपुर महानगर प्रथम और जयपुर महानगर द्वितीय का पद भी हो जाएगा. 

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विशेष अदालतों के विभाजन की अधिसूचना भी जारी कर दी:
इसके साथ मानवाधिकार, एससी—एसटी, पॉक्सो केस साथ अन्य विशेष अदालतों के विभाजन की अधिसूचना भी जारी कर दी गयी है. प्रमुख विधि सचिव विनोद भारवानी और सचिव मधुसूदन शर्मा ने देर रात इन अधिसूचनाओं को जारी किया. वर्तमान में जयपुर महानगर में कुल कार्यरत न्यायालयों की संख्या 161 है नए न्यायालय के गठन के बाद कुल संख्या 162 हो जायेगी वहीं दोनों ही न्यायलय क्षेत्र में करीब 81—81 न्यायालय आयेगे. विशेष अदालतो को लेकर शनिवार को अधिसूचनाए जारी की जायेगी. 

विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पीहर पक्ष ने हत्या का मामला बताते हुए जेठ पर लगाया छेड़छाड़ आरोप

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अजमेर: जिले के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में नागौर भवाल निवासी 22 वर्षीय विवाहिता ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. विवाहिता की मौत के बाद उसके पीहर पक्ष वालों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे हत्या का मामला बताया और जेठ पर छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया है. नागौर पुलिस ने शव के जेएलएन अस्पताल के चीरघर में रखवा दिया है और मामले की पड़ताल में जुट गई है. 

Rajasthan Corona Updates: पिछले 12 घंटे में 1 मौत, 44 नये पॉजिटिव केस आए सामने 

परिजनों ने जेठ पर भी छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाए:
नागौर जिले के भवाल गांव निवासी 22 वर्षीय विवाहिता ने अवसाद में आकर विषाक्त पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया. परिजनों से विवाहिता को जवाहरलाल नेहरू अस्पताल पहुंचाया जहां पर उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया. वहीं विवाहिता के पीहर पक्ष वालों ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए हत्या का मामला बताया. वहीं विवाहिता की मां ने बताया कि उनकी पुत्री ने उन्हें 1 दिन पहले कॉल किया था और वह बता रही थी कि वह काफी परेशान है. वही परिजनों ने उसके जेठ पर भी छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाए. क्षेत्रीय थाना पुलिस भी अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के चीरघर पहुंची. वहीं पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाना शुरू कर दिया. 

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ससुराल पक्ष मौके से फरार: 
पुलिस ने मामला दर्ज कर पड़ताल शुरू कर दी है और मौत के कारणों का पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही खुलासा करने की बात कही. वहीं पीहर पक्ष के आरोपों के चलते ससुराल पक्ष भी मौके से कही फरार हो गया. पीहर पक्ष ने अपनी बेटी की मौत पर इंसाफ की गुहार पुलिस से लगाई है. देखना यह होगा कि अब पुलिस किस तरह से मामले की पड़ताल करती है. 

...अजमेर से फर्स्ट इंडिया के लिए शुभम जैन की रिपोर्ट

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