जयपुर याचिकाकर्ताओं पर हाईकोर्ट ने लगाया एक लाख का हर्जाना, सहायक सांख्यिकी अधिकारी परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

याचिकाकर्ताओं पर हाईकोर्ट ने लगाया एक लाख का हर्जाना, सहायक सांख्यिकी अधिकारी परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

याचिकाकर्ताओं पर हाईकोर्ट ने लगाया एक लाख का हर्जाना, सहायक सांख्यिकी अधिकारी परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने सहायक सांख्यिकी अधिकारी परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर एक लाख की कोस्ट लगायी है. याचिका में तथ्यहीन और अनुमानों पर आधारित तथ्यों का प्रयोग करने पर जस्टिस एस पी शर्मा की एकलपीठ ने ये आदेश दिये है. इसके साथ याचिकाकर्ता संजयकुमार शर्मा, शुभमकुमार व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं को भी खारिज कर दिया है. हर्जाने की राशि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने के आदेश दिये है. 

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परिणाम जारी होने पर हाईकोर्ट में दी थी चुनौती: 
मार्च 2018 में सहायक सांख्यिकी अधिकारी के 209 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था. परीक्षा के बाद 14 मई 2020 को परिणाम जारी किया गया. परिणाम जारी होने पर संजयकुमार व अन्य की ओर से इस भर्ती को ही राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौति दी गयी. भर्ती परीक्षा को चुनौति देते हुए याचिकाकर्ताओं ने कई गंभीर सवाल खड़े किये थे. याचिका में कहा गया कि परीक्षा के बाद से ही पेपर आउट होने की चर्चा थी जो परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद तथ्य साबित होता है क्योकि चयनित अभ्यर्थियो के में शामिल अधिकांश अभ्यर्थी एक ही परीक्षा केन्द्र से जुड़े है इसके साथ ही एक जाति विशेष के अभ्यर्थी बड़ी संख्या में पास हुए. 

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याचिका में दिये गये सभी तर्क केवल अनुमानों के आधार पर:
वहीं इन याचिकाओं का विरोध करते हुए चयनित अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता एस एन कुमावत ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा के बाद या पहले पेपर आउट को लेकर कोई शिकायत नहीं की. वहीं याचिका में दिये गये सभी तर्क केवल अनुमानों के आधार पर है. जस्टिस एस पी शर्मा ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश कि गयी याचिका को अनुमानों और बिना तथ्यों पर आधारित होने के चलते खारिज करने के आदेश दिये. साथ ही याचिकाकर्ताओं पर 1 लाख का हर्जाना लगाते हुए हर्जाने की राशि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने के आदेश दिये हैं. 

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