निकाय चुनावों में ओबीसी वर्ग के लिए सीट आरक्षित करने पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

Nizam Kantaliya Published Date 2019/10/21 20:10

जयपुर: राज्य के स्थानीय निकाय चुनाव में राज्य सरकार द्वारा ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए सीटें आरक्षित करने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. समता आंदोलन समिति व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार, राजस्थान सरकार, भारतीय निर्वाचन आयोग, राज्य के मुख्य सचिव और प्रमुख सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव सहित प्रमुख स्वायत्त शासन सचिव को नोटिस जारी कर 7 नवंबर तक जवाब तलब किया है. 

राष्ट्रपति की ओर से अभी तक ओबीसी की जातियां अधिसूचित नहीं:
दरअसल मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महांती और जस्टिस मोहम्मद रफीक की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है. याचिका में अधिवक्ता शोभित तिवाडी ने अदालत को बताया कि संविधान के 102वें संशोधन के तहत ओबीसी को परिभाषित किया गया है. संशोधन में प्रावधान किया है कि ओबीसी वर्ग में वही जाति शामिल होगी, जिसे राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित किया गया हो. याचिका में कहा गया कि यह संविधान संशोधन 14 अगस्त 2018 से लागू हो गया है, लेकिन राष्ट्रपति की ओर से अभी तक ओबीसी की जातियों को अधिसूचित नहीं किया गया है. ऐसी स्थिति में ओबीसी वर्ग की लिस्ट के अभाव में ओबीसी आरक्षण का मौजूदा समय में कोई अस्तित्व ही नहीं है. 

नोटिस जारी कर जवाब तलब:
याचिका में यह भी कहा गया कि नगरपालिका अधिनियम 2009 में कहा गया है कि राज्य सरकार जिसे ओबीसी वर्ग में शामिल करेगी, उसे ओबीसी माना जाएगा. यह प्रावधान संविधान संशोधन के विपरीत है, क्योंकि संविधान संशोधन के बाद अब केवल ओबीसी की सूची राष्ट्रपति अधिसूचित कर सकते हैं. ऐसे में इस प्रावधान को भी अवैध घोषित किया जाए. जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. 

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