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जेलों को लेकर हाईकोर्ट का आदेश, कैदियों की भीड़ कम करने के लिए जरूरी कदम उठाये राज्य सरकार

जेलों को लेकर हाईकोर्ट का आदेश, कैदियों की भीड़ कम करने के लिए जरूरी कदम उठाये राज्य सरकार

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोेकने के लिए जेलों से भीड कम करने के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश की पालना के आदेश दिये है. हाईकोर्ट ने सरकार जल्द से जल्द आवश्यक कदम उठाने को कहा है. मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और न्यायाधीश एस.के.शर्मा की बैंच ने यह अंतरिम निर्देश दर्पण गोयल की जनहित याचिका पर दिए.

निश्चित अवधि के लिए रिहा करने के दिए थे निर्देश:
कोर्ट ने लॉक डाउन के कारण अंतरिम जमानत और पैरोल की अवधि भी उचित समय के लिए बढाने और हालात के अनुसार समय समय पर इसे रिव्यू करने को भी कहा है. एडवोकेट अनिता अग्रवाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए जेलों में कैदियों की भीड कम करने के लिए सरकार को सात साल तक की सजा भुगत रहे और अंडर ट्रायल बंदियों को अंतरिम जमानत या पैरोल पर निश्चित अवधि के लिए रिहा करने के निर्देश दिए थे.

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9 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई: 
सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए हर केस का अध्ययन कर निर्णय करने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण चेयरमैन,गृह सचिव और डीजी जेल की कमेटी बनाने के निर्देश दिए थे. राज्य सरकार ने अब तक उक्त निर्देश की पालना नहीं की है जबकि कई जेलों में क्षमता से अधिक बंदी मौजूद हैं. कोर्ट ने सरकार को आदेश की पालना के लिए जल्द से जल्द आवश्यक कदम उठाने और 9 अप्रैल तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 9 अप्रैल को तय की है.  

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जयपुर: सांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मौतो के मामले में राज्य सरकार अब तक मौत का कारण  पता नहीं कर पायी है. स्वप्रेणा प्रसंज्ञान से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ ने इस पर नाराजगी जतायी है. हाईकोर्ट ने पवासी पक्षियों की मौत का कारण नहीं बताने पर एक कमेटी का गठन करने का फैसला किया है. साथ ही अदालत ने सभी पक्षों से किसी चिन्हित अधिकारी या वैज्ञानिक के नाम के लिए सुझाव भी मांगे हैं. 

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मई के दूसरे सप्ताह में सांभर लेक में दर्जनों प्रवासी पक्षियों की मौत का मामला दूसरी बार सामने आया था. जिस पर न्यायामित्र विनीत जैन ने एक प्रार्थना पत्र पेश कर मामले की शीघ्र सुनवाई की गुहार लगायी थी. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मृत पक्षियों के शाव सड़ जाने के चलते उनका पोस्टमार्टम नहीं हो पाया और उनकी मौतों कारण भी पता किया जा सकता. वहीं घायल पक्षी की मौत हो जाने पर उसका पोस्टमार्टम किया गया. सरकार ने उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट अदालत में पेश करते हुए बताया कि पक्षी की मौत वायरण की वजह से हुई लेकिन ये नहीं बताया कि कौनसे वायरस की वजह से हुई. ना ही ये बताया कि किस तरह का वायरस इंफेक्शन था और वायरस का नेचर क्या था. इस पर अदालत ने नाराजगी जाहिर की. 

न्यायमित्र ने कहा बारिश होने वाली फिर से आयेंगे प्रवासी पक्षी:
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र नितिन जैन ने अदालत को बताया कि प्रदेश में जल्दी ही बारिश के कारण साभंर झील में पानी आएगा और मानसून समाप्त होने के कुछ दिनों के बाद से प्रवासी पक्षियों का आना भी फिर से शुरु हो जाएगा. इसलिए यह आने वाले सीजन में इन प्रवासी पक्षियों को मौत से बचाने के लिए जरुरी उपाय करना बहुत आवश्यक है. पक्षियों की मौत की वजह केमिकल झील में डालना और अवैध खनन है. 

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अदालत ने मांगे नाम:
मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ ने प्रवासी पक्षियों की मौतों की जांच के लिए एएसजी, न्यायमित्र और एएजी से मामले की जांच और निरीक्षण के लिए किसी विशेष अधिकारी, वैज्ञानिक या विशेषज्ञ का नाम के सुझाव मांगे हैं. अदालत ने कहा कि अवैध रुप से नमक बनाने वालों की पहचान करने और संपूर्ण झील का निरीक्षण करवाया जाना जरूरी है जिसके लिए सभी से एक सपताह में नाम देने को कहा है. मामले पर अब सुनवाई 27 जुलाई को होगी. 

VIDEO: नवाचारों में जुटे विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी, सालों बाद विधानसभा कार्मिकों को मिली सौगात

जयपुर: विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी नवाचारों में जुटे है. उन कामों को कर रहे जो वर्षों से नहीं हुये इन्हीं में से एक रहा विधानसभा के कार्मिकों की डीपीसी के जरिये प्रमोशन किया जाना, इनमें कुछ ऐसे रहे जिन्हें 30 सालों बाद सौगात मिली. नवाचारों की कड़ी में डॉ सीपी जोशी ने विधायकों को online प्रश्न लगाने की बड़ी पहल की है. 

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स्पीकर पद संभालने के बाद डॉ सीपी जोशी ने विधानसभा की कार्यप्रणाली में आमूल चूल परिवर्तन किये और कीर्तिमान बनाये. सबसे पहले उस पहल के बारे में बताते है जो जुड़ी विधानसभा के कार्मिकों से, बरसों बाद कार्मिकों की डीपीसी हुई और बरसों से एक सीट पर बैठे कार्मिकों के हुये तबादलें. 

विधानसभा में सालों से अटके पड़े कार्मिकों के तबादले किये:  

- ऐसे कार्मिक भी जो 30 सालों से एक ही सीट पर बैठे थे 

- 82 कार्मिकों के तबादलें किये गये

- वहीं 42 कार्मिकों की डीपीसी करके प्रमोशन किया गया

- विधानसभा सचिवालय ने कार्मिकों के हित में फैसले लिये 

विधानसभा स्पीकर डॉ सीपी जोशी ने ऑनलाइन पर्ची सिस्टम के बाद ऑनलाइन प्रश्न लगाने की सुविधा विधायकों को दी है. ये सुविधा अभी से चालू हो गई है. विधानसभा सचिव प्रमिल कुमार माथुर के निर्देशों पर विधानसभा को अत्याधुनिक बनाने से जुडी सेल काम कर रही है. 

विधानसभा की पहल: 

- Online प्रश्न लगा सकते है विधायक

- इंटर सेशन में भी सवाल लगा सकते है

- मेम्बर्स लॉग इन करना होगा

- फिर प्रश्न टाइप करके देने होंगे 

- मोबाइल नम्बर पर वेरिफिकेशन के लिये ओटीपी आयेगा

- विधायक को विस आकर सवाल लगाने की जरुरत नहीं पड़ेगी

- वे अपने घर बैठे ही सवाल लगा सकता है

- इंटर सेशन में सात दिन में एक सवाल दे सकते है

- पर्ची ऑनलाइन सिस्टम पहले ही चालू कर दिया था 

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अब डॉ सीपी जोशी का ड्रीम प्रोजेक्ट है विधायकों के लिये बनने वाला बहुमंजिला अपार्टमेंट. इमारत खड़ी होने में समय लगेगा लेकिन नींव डॉ सीपी जोशी के कार्यकाल में रख दी जाएगी.

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जयपुर: केन्द्र सरकार की ओर से एक साल पहले लागू किए गए नए मोटर व्हीकल एक्ट के संसोधित जुर्मानों की अधिसूचना राज्य सरकार ने बुधवार को जारी कर दी. सरकार ने 36 जुर्मानों में संसोधन किया है. 

नई जुर्माना राशि के तहत अगर अब बिना लाइसेंस बनवाए या फिर बिना वैध लाइसेंस वाहन चलाया तो पांच हजार रुपए जुर्माना देना पड़ेगा. प्रदेश में पहले यह जुर्माना 500 रुपए था. वहीं बिना सीट बेल्ट और हेलमेट के वाहन चलाने पर एक हजार का जुर्माना भरना पड़ेगा. बुधवार शाम को ही जुर्माने लागू हो गए हैं. जुलाई 2019 में केन्द्र सरकार की ओर से नए मोटर एक्ट के प्रावधानों को लागू किया गया था. इसके बाद राजस्थान में एक्ट में भारी जुर्माना राशि बताते हुए सरकार ने रोक लिया दी थी. इसको लेकर एक साल तक केन्द्र और राज्य सरकार के बीच विवाद चलता रहा. संसोधित जुर्मानों में राज्य सरकार ने जुर्मानों में कटौती की है. हालांकि कुछ जुर्माने यथावत रखे हैं. 

प्रदेश में अब दोगुने तक हो गए जुर्माना:
राज्य सरकार की ओर से लागू किए जुर्मानों में प्रदेश के पिछले जुर्माने के मुकाबले भारी वृद्धि हुई है. मोबाइल पर बात करने के जहां 500 रुपए जुर्माना लगता था. इस पर अब एक हजार रुपए तय किया है. वहीं, तेज गति से वाहन चलाने पर जहां 400 रुपए लिए जाते थे. अब एक हजार रुपए तय किए हैं.  


 अपराध                                           राज्य के जुर्माने                    केन्द्र के जुर्माने                         कमी    

मोबाइल पर बात करने पर                    1000                              10,000                                  9000

शराब पीकर वाहन चलाने पर               10000                        10000 और 6 महा की सजा        सजा हटाई

खतरनाक ड्राइविंग करने पर पहले में  1000 दूसरे 10000             10000                                    कुछ नहीं

सामान्य अपराध :            दोपहिया :100 रुपए चारपहिया 200    500—1500                              1300  

आदेशों की अवहेलना करने पर :    500 रुपए                              2000                                            1500

खतरनाक तरीके से वाहन चलाने पर : 1000 दूसरे अपराध पर 10 हजार   5000                                4 हजार 

बिना परमिट वाहन चलाने पर :       10 हजार                         10 हजार                                     कुछ नहीं
  
ओवरलोड वाहन होने पर : 20 हजार रुपए फिर प्रतिटन दो हजार रुपए  20,000                              कुछ नहीं

वर्जित क्षेत्र में वाहन चलाने पर :  20 हजार रुपए                              20 हजार                             कुछ नहीं
 
वाहन का आकार निर्धारित से अधिक होने पर : 20 हजार रुपए
 
बिना शीट बैल्ट लगाए वाहन चलाने पर: एक हजार                           1000                                   कुछ नहीं

दोपहिया वाहन पर दो से अधिक :   एक हजार रुपए                 एक हजार और तीन माह निलंबित     निलंबन हटाया

बिना अनुमति रेसिंग करने पर :  प्रथम पांच हजार फिर 10 हजार      जुर्माना 5000                           कुछ नहीं
 
 
बिना रजिस्ट्रेशन और फिटनेस वाहन चलाने पर :दोपहिया : दो हजार फिर पांच हजार  : पांच हजार से 10 हजार :   5 हजार 

तेज गति से कार या बाइक चलाने पर : एक हजार रुपए -                    1000                                    कुछ नहीं
 
तेज गति से भारी वाहन चलाने पर : दो हजाररुपए                                2000                                 कुछ नहीं

लाइसेंस एक्सपायर और निलंबित होने पर   5000                     5000 तीन माह की सजा                  सजा हटाई

असुरक्षित वाहन चलाने पर दुपहिया-      तिपहया 500 बाकी सभी का 1000 कार्मशियल 2000 - 1500 से 5000   3000
 
यात्री वाहनों के लिए: 5 हजार और दूसरे अपराध पर 10 हजार            10 हजार                               5000

बिना हेलमेट :           एक हजार -                             एक हजार तीन माह लाइसेंस निलंबित               निलंबन हटाया
 
इमरजेंसी वाहनों को रास्ता नहीं देने पर : 10 हजार रुपए-  10 हजार और छह माह की सजा                सजा हटाई 
 
बिना बीमा वाहन चलाने पर : दो हजार दूसरे अपराध में चार हजार     दो हजार                                   कुछ नहीं

ओवरलोड यात्रीभार मिलने पर : 100 रुपए प्रति यात्री                  200 रुपए प्रति यात्री               100 रुपए यात्री कम


 

मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना घोषित हो राष्ट्रीय परियोजना

मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना घोषित हो राष्ट्रीय परियोजना

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर राज्य की महत्वाकांक्षी पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग की है. लगभग 37 हजार 247 करोड़ रूपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से राज्य के 13 जिलों में पेयजल तथा 2.8 लाख हैक्टयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी. 

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योजना को जल्द से जल्द ही राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाए: 
सीएम गहलोत ने पत्र में लिखा कि ERCP की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) नवम्बर 2017 में आवश्यक अनुमोदन के लिए केन्द्रीय जल आयोग को भेजी जा चुकी है. उन्होंने आग्रह किया कि इस योजना को जल्द से जल्द ही राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाए. 

राजस्थान की किसी भी बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना को यह दर्जा प्राप्त नहीं: 
सीएम गहलोत ने कहा है कि केन्द्र सरकार ने पूर्व में 16 विभिन्न बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजनाओं को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया है, लेकिन राजस्थान की किसी भी बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना को यह दर्जा प्राप्त नहीं हुआ है. प्रदेश के कई जिलों में पेयजल की गंभीर समस्या के चलते इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देना और इसकी जल्द क्रियान्विति सुनिश्चित करना आवश्यक है.  

RBSE 12th Result 2020: राजस्थान बोर्ड ने जारी किया 12वीं साइंस का परिणाम, 91.96 प्रतिशत रहा परिणाम 

पर्याप्त पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी:
उल्लेखनीय है कि ERCP परियोजना से झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, दौसा, करौली, अलवर, भरतपुर एवं धौलपुर जिलों को वर्ष 2051 तक पीने तथा सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी. ERCP की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना से मानसून के दौरान कुन्नू, कुल, पार्वती, कालीसिंध एवं मेज नदियों के सब बेसिन के अधिशेष जल को बनास, मोरेल, बाणगंगा, गंभीर एवं पार्बती नदियों के सब बेसिन में पहुंचाया जाना है. 


 

दूध व डेयरी प्रोडक्ट्स की शुद्धता के लिए 14 जुलाई तक अभियान- डॉ. रघु शर्मा

दूध व डेयरी प्रोडक्ट्स की शुद्धता के लिए 14 जुलाई तक अभियान- डॉ. रघु शर्मा

जयपुर: चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि प्रदेशवासियों को मिलने वाले दूध व दूध से बने पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश भर में शुद्ध के लिए युद्ध के तहत 8 से 14 जुलाई तक अभियान चलाया जा रहा है. अभियान के दौरान व्यापक स्तर पर डेयरी प्रोडक्ट्स के नमूने लेकर जांच की जाएगी. 

RBSE 12th Result 2020: राजस्थान बोर्ड ने जारी किया 12वीं साइंस का परिणाम, 91.96 प्रतिशत रहा परिणाम

डॉ. शर्मा ने बताया कि अभियान के अंतर्गत दूध व दूध से बने उत्पाद जैसे पनीर, बटर, घी, मावा व मिठाइयां आदि के नमूने लिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को पर्याप्त मात्रा में सभी आवश्यक उपकरण व सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं. 

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उन्होंने कहा कि अभियान के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा अधिकारी नमूनों से जुड़ी सूचना एफएसएआई के एप पर भी देंगे. मंत्री ने बताया कि संभागीय स्तर पर उपलब्ध फूड टेस्टिंग लेबोरेट्री का भी इस अभियान में समुचित उपयोग किया जाएगा. लिए गए नमूनों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी. सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को अभियान के प्रतिदिन की रिपोर्ट मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं. 

RBSE 12th Result 2020: राजस्थान बोर्ड ने जारी किया 12वीं साइंस का परिणाम, 91.96 प्रतिशत छात्र हुए पास

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जयपुर: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Rajasthan Board Result 2020) का पहला नतीजा जारी हो गया है. यह रिजल्ट 12वी विज्ञान वर्ग का है. शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बोर्ड दफ्तर में रिजल्ट जारी किया है. इस बार 2,18,232 अभ्यर्थी उत्तीर्ण रहे. इसमें 1,47,171 छात्र और 71,061 छात्राएं उत्तीर्ण हुई है. ऐसे में इस बार परीक्षा परिणाम 91.96 प्रतिशत रहा. बोर्ड की 12वीं विज्ञान में 2 लाख 39 हजार 800 परीक्षार्थी रजिस्टर्ड हुए थे. उनमें से 2,37,305 छात्रों ने परीक्षा दी थी. छात्रों परीक्षा का परिणाम बोर्ड की वेबसाइट http://www.rajeduboard.rajasthan.gov.in/ पर देखा जा सकता है. 

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18-19 जून को हुई परीक्षा पूरी:
12वीं विज्ञान वर्ग की परीक्षाएं 5 मार्च 2020 से शुरू हुई थी, लेकिन बीच में कोरोना संक्रमण के चलते परीक्षाएं स्थगित कर दी गई थीं. इसके बाद बोर्ड ने 12वीं विज्ञान वर्ग की शेष परीक्षाओं का आयोजन 18 और 19 जून को किया. करीब एक पखवाड़े में बोर्ड यह परिणाम घोषित करने जा रहा है. 

बोर्ड पहले केवल 12वीं साइंस का रिजल्ट जारी किया: 
पिछले 3-4 बरसों से राजस्थान बोर्ड की परंपरा रही है कि 12वीं साइंस और कॉमर्स का परिणाम एक साथ आता रहा है. लेकिन इस बार दोनों को अलग-अलग कर दिया गया है. इस बार बोर्ड पहले केवल 12वीं साइंस का रिजल्ट जारी किया है. इसके बाद 12वीं कॉमर्स का परिणाम घोषित होगा. फिर 12वीं कला संकाय का परिणाम आयेगा. सबसे अंत में 10वीं का परिणाम जारी होगा. जुलाई के अंत तक सभी परिणाम जारी होने की संभावना है.

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पिछले साल 92.88 फीसदी रहा था परिणाम: 
साल 2019 की 12वीं विज्ञान की परीक्षा में कुल 2 लाख 60 हजार 582 विद्यार्थी पंजीकृत थे. इनमें से 78 हजार 542 छात्राएं थी तो 1 लाख 82 हजार 40 छात्र थे. परिणाम प्रतिशत की बात करें तो कुल परिणाम 92.88 फीसदी था, जबकि छात्राओं का पास प्रतिशत इससे कहीं ज्यादा 95.86 था, वहीं छात्रों का 91.59 फीसदी था. 

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जयपुर: राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल को लेकर एक बार चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसकी वजह आज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात मानी जा रही है. हालांकि इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है. लेकिन राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को मंत्रिमंडल फेरबदल से जोड़कर देख रहे हैं. सीएम गहलोत के राजभवन पहुंचते ही चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. विधायक एक-दूसरे को फोन करने लगे हैं. इसके साथ ही सीएम की राजभवन यात्रा के कारण पूछे जा रहे हैं. लेकिन फिलहाल सीएम गहलोत व राज्यपाल कलराज मिश्र को ही इस बारे में जानकारी है. 

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राजभवन आने से पहले 4 मंत्री मिले मुख्यमंत्री से: 
मुख्यमंत्री गहलोत के राजभवन आने से पहले 4 मंत्री मुख्यमंत्री से मिले थे. आंजना, जाटव, जूली व प्रताप सिंह ने सीएम से मुलाकात की. उसके बाद सीएम की राज्यपाल से मुलाकात होने पर चर्चाओं को बल मिल गया है. ऐसे में संभवतया जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है. मुख्यमंत्री व राज्यपाल की मुलाकात के बाद संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर कई मंत्रियों व विधायकों की धड़कनें बढ़ गई है. हालांकि फिलहाल इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा है. लेकिन शाम तक ही मुलाकात की स्थिति साफ हो पाएगी. वहीं राजनीतिक नियुक्तियों व कुलपति नियुक्ति को लेकर चर्चा होने की भी संभावना जताई जा रही है. 

राजस्थान में पंचायत चुनाव के चौथे चरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश,  राज्य सरकार और चुनाव आयोग को दिया निर्देश  

किसी भी समय मंत्रिमंडल में विस्तार और फेरबदल संभव:
यह बिल्कुल साफ है कि प्रदेश में अब किसी भी वक्त कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्तियों के तोहफे के साथ मंत्रिमंडल में विस्तार और फेरबदल हो सकता है. उसके मद्देनजर यह देखना दिलचस्प होगा कि सीएम गहलोत की राज्यपाल से मुलाकात के क्या मायने सामने आते हैं? लेकिन इसके लिए फिलहाल आधिकारिक बयान सामने आने तक इंतजार करना होगा. 


 

राजस्थान में पंचायत चुनाव के चौथे चरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश, राज्य सरकार और चुनाव आयोग को दिया निर्देश

राजस्थान में पंचायत चुनाव के चौथे चरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश,  राज्य सरकार और चुनाव आयोग को दिया निर्देश

जयपुर: राजस्थान में पंचायत चुनाव के चौथे चरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश आया है. कोर्ट ने राजस्थान सरकार और चुनाव आयोग 15 अक्टूबर से पहले पंचायत चुनाव पूरा करने का आदेश दिया है. चौथे चरण में 26 जिलों में पंचायत चुनाव होंगे. चौथे चरण में 1954 ग्राम पंचायत व 126 पंचायत समितियां शामिल हैं. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में चुनाव सम्पन्न कराने के आदेश दिए थे. लेकिन कोरोना के चलते यह संभव नहीं हो पाया. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद प्रदेश में पंचायत चुनावों का रास्ता साफ हो गया है. हालांकि पूरा आदेश सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डलने के बाद ही सामने आएगा. 

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इन जिलों में होंगे चौथे चरण के चुनाव:
पंचायतों के चौथे चरण के चुनाव जिन जिलों में होने हैं उनमें अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, भरतपुर, बीकानेर, चूरू, दौसा, धौलपुर है. इसके अलावा हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, जोधपुर, झुंझुनू, करौली, नागौर, पाली, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, उदयपुर और श्रीगंगानगर जिलों की पंचायती राज संस्थाओं में चुनाव होने हैं. 

तीन चरणों के चुनाव जनवरी माह में संपन्न हुए: 
इससे पहले प्रदेश में ग्राम पंचायतों के तीन चरणों के चुनाव जनवरी माह में संपन्न हुए थे. इसके बाद चौथे चरण के चुनाव अप्रैल में होने थे लेकिन कोरोना संकट के चलते इसे स्थगित कर दिया गया. लेकिन अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होने के बाद चौथे चरण के चुनाव करवाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश जारी किया है. 

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प्रशासकों को कर रखा नियुक्त:
गौरतलब है कि ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल पंचायत समितियों का कार्यकाल जनवरी माह में समाप्त हो गया था, जिसके बाद सरकार ने यहां प्रशासकों को तैनात कर रखा है. 

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