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यमुना का पानी प्रदेश में लाने के मामले में हाईकोर्ट सख्त, केन्द्रीय जल आयोग को जारी किए आदेश

यमुना का पानी प्रदेश में लाने के मामले में हाईकोर्ट सख्त, केन्द्रीय जल आयोग को जारी किए आदेश

जयपुर: वर्ष 1994 में हुए यमुना जल समझौते के तहत राजस्थान के हिस्से का पानी लाने में हो रही देरी को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है. राजस्थान हाईकोर्ट ने केन्द्रीय जल आयोग को आदेश दिये है कि वो राजस्थान सरकार द्वारा भेजी गई डीपीआर पर दो माह में निणर्य कर 10 दिसंबर को हर हाल में अदालत को बताए.

फरवरी में भेजी डीपीआर:
दरअसल राजस्थान सरकार ने हरियाणा से पाइपलाईन के जरिए राजस्थान में पानी लाने को लेकर एक नई डीपीआर बनाकर फरवरी 2019 को केंद्रीय जल आयोग को भेजी थी. 8 माह बाद भी इस डीपीआर पर आयोग द्वारा निर्णय नहीं लेने पर यशवर्धनसिंह ने जनहित याचिका दायर कर इसे चुनौती दी. जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार की ओर से पेश हुए एएसजी आर डी रस्तोगी ने आयोग का पक्ष रखा. एएसजी ने कहा कि सरकार का प्रोजेक्ट करीब 20 हजार करोड़ का है, इसे लेकर सरकार अपने प्रयास कर रही है. वे शीघ्र हाईकोर्ट के आदेश की पालना करेंगे.

क्या है मामला:
गौरतलब है 1994 में हुए जल समझौते के तहत राजस्थान को कुल 1119 बिलीयन क्यूबीक मीटर पानी मिलना था, लेकिन हरियाणा सरकार द्वारा लगातार पानी देने को लेकर टालमटोल की जाती रही. पहले हरियाणा ने अपनी नहर से पानी भेजने से इंकार कर दिया. जिस पर राजस्थान सरकार द्वारा हरियाणा नहर के समानान्तर खुद की नहर बनाने का प्रोजेक्ट तैयार किया. लंबे समय तक उस पर भी हरी झण्डी नहीं मिलने पर हाल ही पाइपालाईन के जरिए पानी लाने के प्रोजेक्टर पर कार्य शुरू किया गया. इस प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाकर केन्द्रीय जल आयोग को फरवरी 2019 में ही भेज दी गई, लेकिन 8 माह बाद भी निर्णय नहीं लिया गया.

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