हाईकोर्ट से पीडब्लयूडी को करीब 60 करोड़ की बड़ी राहत, आर्बिटेशन अवॉर्ड को किया अपास्त

Nizam Kantaliya Published Date 2019/08/27 08:24

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए सड़क निर्माण और उसकी देखरेख से जुड़े विवाद पर आब्रिट्रेटर द्वारा दिये गये 43 करोड़ के अवार्ड आदेश को अपास्त कर दिया है. आब्रिटे्रटर ने राज्य सरकार को टोल कंपनी के पक्ष में 43 करोड 68 लाख रुपए ब्याज सहित अदा करने को कहा था. ब्याज सहित ये राशि अदा करने पर सरकार को करीब 60 करोड़ से भी अधिक राशि का भुगतान करना होता. न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश आलोक शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश पीडब्ल्यूडी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए.

क्या है मामला:
राज्य के पीडब्लयूडी विभाग और मैसर्स एएनएस इन्फ्रास्ट्रक्चर के बीच हुए एग्रीमेंट के अनुसार कामा-नदबई से जुड़ी तीन सड़कों का निर्माण और रखरखाव कार्य एएनएस को सौपा गया था. सड़क निर्माण के बदले फर्म को 86 माह तक इन सड़कों पर टोल वसूली का अधिकार दिया गया. इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट संपूर्ण अरावली क्षेत्र में खनन पर पूर्णतया रोक लगाने के आदेश दिये. इस आदेश की जद में एएनएस इन्फ्रांस्ट्रक्चर को काफी नुकसान हुआ. 17 माह तक खनन पर रोक लगने का हवाला देते हुए फर्म ने सरकार से क्षतिपूर्ति मांगी. क्षतिपूर्ति के रूप में राज्य सरकार की ओर से 14 करोड़ रुपए स्वीकृत किये गये. सरकार द्वारा दी गई क्षतिपूर्ति को कम बताते हुए फर्म ने अधिक क्षतिपूर्ति के लिए आब्रिट्रेटर इन्द्रजीत खन्ना के समक्ष परिवाद पेश किया. 

जिस पर सुनवाई करते हुए राज्य के पूर्व मुख्य सचिव खन्ना ने 15 जनवरी 2015 को फर्म के पक्ष में फैसला देते हुए 43 करोड 68 लाख रुपए ब्याज सहित देने को कहा. इसके खिलाफ पीडब्ल्यूडी की ओर से कॉमर्शियल कोर्ट में पेश कि गयी याचिका को भी अदालत ने खारिज कर दिया. इस पर विभाग की ओर से हाईकोर्ट में याचिका पेश कर आब्रिट्रेटर के आदेश को अवैध बताया गया. जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने आब्रिट्रेटर के आदेश को रद्द कर दिया. हाईकोर्ट के आदेश से सरकार को 43 करोड़ और उस पर करीब 20 करोड़ मिलाकर कुल 60 करोड़ से अधिक की राशि की राहत मिली है. 

... संवाददाता निजाम कण्टालिया की रिपोर्ट 

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