मुंबई Maharashtra: दिलीप वलसे पाटिल बोले- हिंदू-मुस्लिम सुनिश्चित करें कि लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश नहीं हो

Maharashtra: दिलीप वलसे पाटिल बोले- हिंदू-मुस्लिम सुनिश्चित करें कि लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश नहीं हो

Maharashtra: दिलीप वलसे पाटिल बोले- हिंदू-मुस्लिम सुनिश्चित करें कि लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश नहीं हो

मुंबई: महाराष्ट्र के गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल ने मंगलवार को कहा कि हिंदू और मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि धर्म के आधार लोगों को बांटने की कोशिश नहीं की जाए. उत्तर प्रदेश में वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद के भीतर सर्वेक्षण और वहां स्थिति तनावपूर्ण होने की रिपोर्ट के संबंध में संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए पाटिल ने यह बात कही.

मंत्री ने संवादाताओं से कहा कि यह मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है. मंत्री ने कहा कि शीर्ष अदालत इस मामले में निर्णय लेगी. हिंदू और मुस्लिम समुदाय के भाइयों और बहनों को यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि (महाराष्ट्र में) धार्मिक आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश ना हो. उन्होंने कहा कि राज्य का माहौल निश्चित रूप से शांतिपूर्ण रखा जाना चाहिए. पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस अपना काम कर रही है और वह स्थिति की निगरानी कर रही है. सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और विवादित पोस्ट किये जाने से संबंधित सवाल पर पाटिल ने उपयोगकर्ताओं से कहा कि वे संयम दिखाएं. पाटिल ने कहा, ‘‘मैं यह नहीं कहूंगा कि प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, लेकिन सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं को संयम दिखाना चाहिए या यहां कोई नियामक प्रणाली होनी चाहिए.’’

इस बीच, एक अधिकारी ने कहा कि वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफी सर्वेक्षण का काम जिस आयोग को सौंपा गया है, वह मंगलवार को अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए एक स्थानीय अदालत से अतिरिक्त समय मांगेगा, क्योंकि संकलन का काम अभी बाकी है. अदालत ने इससे पहले आयोग को मंगलवार तक रिपोर्ट सौंपने को कहा था. अदालत ने सोमवार को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में एक तालाब को सील करने का आदेश दिया था, क्योंकि हिंदू याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने कहा था कि अदालत के आदेश से कराए गए वीडियोग्राफी सर्वेक्षण के दौरान वहां एक शिवलिंग पाया गया था. हालांकि, मस्जिद प्रबंधन समिति के एक सदस्य ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि वह चीज ‘वजूखाना’ जलाशय में पानी के फव्वारे का हिस्सा थी, जहां लोग नमाज से पहले स्नान करते हैं. सोर्स- भाषा

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