अक्षय पात्र फाउण्डेशन से छीनी जा सकती है हिंगोनिया गौशाला

Abhishek Shrivastava Published Date 2019/06/05 01:28

जयपुर: पिछली भाजपा सरकार के फैसलों की समीक्षा कर रही राज्य सरकार एक और चर्चित मामले में पिछली सरकार का फैसला पलट सकती है. जी हां ये मामला है जयपुर की हिंगोनिया गौशाला का, गायों की मौतों से चर्चित रही हिंगोनिया गौशाला के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी प्रदेश की पिछली भाजपा सरकार के समय अक्षय पात्र फाउण्डेशन को दी गई थी. तत्कालीन सरकार की स्वीकृति से ही जयपुर नगर निगम और अक्षय पात्र फाउण्डेशन के बीच गौशाला के संचालन और रखरखाव के लिए 28 सितम्बर 2016 को 20 वर्ष का अनुबंध हुआ था. हाल ही जयपुर के महापौर विष्णु लाटा ने हिंगोनिया गौशाला का निरीक्षण किया.

गायों की देखभाल में कई तरह की खामियां मिली
इस दौरान उन्हें गायों की देखभाल में कई तरह की खामियां मिली. इसके बाद महापौर विष्णु लाटा ने स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल को पत्र लिखा है. पत्र में विष्णु लाटा ने कहा है कि गौशाला के रखरखाव में कई कमियां हैं. अक्षय पात्र फाउण्डेशन पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं कर पा रहा है. इसलिए जयपुर नगर निगम और अक्षय पात्र के बीच हुए समझौते की समीक्षा की जाए. जानकारों की मानें तो मंत्री शांति धारीवाल इस समझौते की समीक्षा के लिए सरकार के अधिकारियों की एक कमेटी बना सकते हैं और इस कमेटी के आधार पर राज्य सरकार गौशाला अक्षय पात्र से वापस छीनी जा सकती है. 

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