सिरोही जिले से जुड़ा है भगवान महावीर का इतिहास, नांदिया गांव में सांप डंसने का भी उल्लेख

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/17 01:07

सिरोही। जिले में आज भगवान महावीर की जयंती का पर्व बड़ी धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सवेरे से ही जैन मंदिरों में भगवान महावीर की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। उसके बाद भगवान महावीर की आंगी सजाकर एक रात पर सवार करके बैंड बाजो और गाजेबाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। जिले के सिरोही, शिवगंज, आबूरोड़, पिंडवाड़ा, रेवदर, पावापुरी, मुंगथला, बामनवाड जी सहित कई जगहों पर महावीर जयंती पर अनेकों कार्यक्रम आयोजित किए गए। जैन धर्म में आस्था रखने वाले धर्मावलंबियों ने सजधज कर भगवान महावीर की शोभायात्रा में भाग लिया  तो शोभायात्रा में बैंड बाजों की धुन पर युवा जमकर थिरकते नज़र आए। शहरों और कस्बों में आज पूरा वातावरण भगवान महावीर के जयकारों से गुंजायमान हो गया। आपको बता दें जैन तीर्थ पावापुरी, बामनवाड जी, जीरावला, मुंगथला के मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना कर महावीर स्वामी की जयंती का आयोजन किया गया।

भगवान महावीर का इतिहास सिरोही जिले से भी जुड़ा हुआ हैं। जैन धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान महावीर का 37 वर्ष की आयु में सिरोही जिले में विहार के लिए आगमन हुआ था। यहां तक कहा जाता हैं कि भगवान महावीर के कानों में कील सिरोही जिले के बामनवाड़ जी में ठोकी गई थी। वही सिरोही जिले के नांदिया गांव में भगवान महावीर के सांप डंसने का भी उल्लेख मिलता हैं। चण्डकौशिक नामक नाग ने भगवान महावीर को नांदिया गांव में ही डसा था। ऐसा माना जाता हैं कि भगवान महावीर की खड़ी अवस्था में एक मात्र मूर्ति हैं जो सिरोही जिले के मुंगथला गांव के मंदिर में स्थापित हैं।  आपको बता दें जैन धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान महावीर के जीवनकाल में उनके स्वयं के द्वारा स्थापित मंदिरों को जीवंत तीर्थ माना जाता हैं। ऐसे कई तीर्थ सिरोही जिले में स्थित हैं। 

...विक्रमसिंह करणोत, 1st इंडिया न्यूज, सिरोही

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