जयपुर VIDEO: नए साल में नए कलेवर में दिखेगा राजस्थान का गृह विभाग, क्या होंगे बदलाव, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: नए साल में नए कलेवर में दिखेगा राजस्थान का गृह विभाग, क्या होंगे बदलाव, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गृह विभाग में काम का बंटवारा करते हुए अपने काम का बोझ कम कर लिया है. मुख्यमंत्री ने हाल ही बनाए गए नए गृह राज्यमंत्री राजेंद्र यादव को कई अधिकार दिए हैं.  मुख्यमंत्री गहलोत ने तबादला, पोस्टिंग प्रमोशन जैसे मामले अपने पास रखे हैं, राजेंद्र यादव आरएसी और पुलिस में दो करोड़ तक के काम स्वीकृत करने समेत अन्य फ़ैसले ले सकेंगे. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गृह विभाग के नए रूल्स ऑफ बिजनेस जारी किए हैं. इसके तहत तय किया गया है कि विभाग में कौन सा काम कौन करेगा, किन मामलों की फाइलों का डिस्पॉज ऑफ कौन करेगा. गृह विभाग की फाइलों का रूट तय किया गया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तीन साल से गृह विभाग का जिम्मा संभाले हुए हैं. विपक्ष भी लगातार मांग करता आ रहा था कि स्वतंत्र रूप से गृह मंत्री तय किया जाए. मंत्रिमंडल विस्तार में पूर्णकालिक गृहमंत्री तो नहीं बनाया गया, लेकिन राजेंद्र यादव को गृह राज्यमंत्री का प्रभार दिया गया. इसके बाद हाल मुख्यमंत्री ने गृह विभाग के कामकाज का बंटवारा भी कर दिया. इसमें राजेंद्र यादव को कई महत्वपूर्ण शक्तियां दी गई है.

मुख्यमंत्री ने पॉवर की रखी अपने पास:
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विभाग में महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय करने का अधिकार अपने पास रखा है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पुलिस के गजेटेड अफसरों के तबादले, पोस्टिंग, प्रमोशन और डेप्युटेशन का काम अपने पास रखा है. इसके अलावा खुफिया विभाग की रिपोर्ट का अधिकार भी अपने पास ही रखा है. प्रदेश में न्यायिक आयोग गठित करने, आयोगों की रिपोर्ट, विजिलेंस से सम्बंधित सारे मामले, महिला अत्याचार से सम्बंधित मामले भी मुख्यमंत्री खुद ही देखेंगे.  इन सभी मामलों की फाइलें अधिकारियों से सीधी मुख्यमंत्री के पास जाएंगी. 

बिजनेस रूल्स के हिसाब से गृह विभाग के कुछ मामलों की फाइलें राज्यमंत्री से होकर गृहमंत्री अर्थात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक जाएगी. एक तरह गृह विभाग के अधिकारियों से फाइल राज्यमंत्री के पास से होकर मुख्यमंत्री अर्थात गृहमंत्री तक जाएगी. विभिन्न ग्रुपों के हिसाब से फाइलों का रूट तय किया गया है. पुलिस भर्तियों में नियमों में उम्र, शैक्षणिक याेग्यता, अनुभव आदि में छूट, अनिवार्य सेवानिवृत्ति, जन्म तारीख में सुधार, किसी भी रैंक की विदेश में ट्रेनिंग, सर्विस रूल्स में संशोधन, नौकरी में सराहनीय सेवाओं के लिए मेडल, रिवॉर्ड व सम्मान, विदेश और यूएन दौरे , विभाग की प्रोग्राम, योजनाओं व नियमों की समीक्षा के लिए गठित कमेटियों की फाइल राज्यमंत्री के जरिए सीएम तक जाएगी.

इसी तरह राजस्थान पुलिस एक्ट से संबंधित सभी नोटिफिकेशन, उपनिरीक्षक प्रमोशन, एसआई-सीआई गेलेंट्री प्रमोशन की फाइल,पॉलिसी डिसीजन, विधानसभा से संबंधित सभी मामले, पुलिस थाने चौकियों की स्थापना, बजट स्पीच, पुलिस के भूमि अधिगृहण, अलॉटमेंट के मामले, वीजो पासपोर्ट से सम्बंधित पॉलिसी के मामले, एनडीपीएस एक्ट, सिक्योरिटी एक्ट प्रीवेंशन एक्ट के मामलों की फाइल गृह राज्यमंत्री से मुख्यमंत्री तक जाएगी. 

प्रदेश में संवेदनशील घटनाओं, डकैती, फायरिंग, उपद्रव, दंगों से सम्बंधित केसों की फाइल, प्रशासनिक जांच और उनकी रिपोर्ट, दंगा पीडितों को मुआवजा राहत की फाइल,  जांच सीआईडी सीबी और एसओजी में ट्रांसफर करने की बात हो या सीबीआई में ट्रांसफर करने के मामला, गृहराज्यमंत्री से होकर फाइल मुख्यमंत्री तक जाएगी.  इसी तरह डकैती प्रभावित एक्ट, राज्य व राष्ट्रीय परिषद, सिटीजन चार्टर व कोसाफोसा, एनडीपीएस एक्ट की फाइलें भी दोनों के पास जाएंगी. आतंकवाद, बॉर्डर एरिया से संबंधित मामलों की फाइल, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित सभी मंत्रियों और स्टेट और अन्य वीवीआईपी की सुरक्षा की फाइल, हथियार लाइसेंस, धार्मिक भवनों की सुरक्षा, अति आवश्यक सेवाओं, आर्म्स फीस रिवाइज, राष्ट्रीय एकता परिषद, मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष सदस्यों की नियुक्ति की फाइल राज्य और गृहमंत्री तक जाएगी.   

गृह राज्यमंत्री यादव को मिले ये प्रमुख अधिकार: 
पुलिस के मामलों में कानूनी राय, राज्य स्तरीय, सेंट्रल कमेटी गठन, सब ऑर्डिनेट पुलिस सर्विस में एक सेक्शन से दूसरे में तबादला, संसद से सम्बंधित सभी मामलों की फाइल गृहराज्यमंत्री राजेंद्र यादव तक जाएगी. पुलिस आधुनिकीकरण स्कीम की मंजूरी देंगे. विदेशी जेलों में बंद भारतीयों की वापस के मामले, केंद्र सरकार से सम्बंधित मामले, पाक व अन्य विदेशी नागरिकों के मामले, साम्प्रदायिक घटनाओं से सम्बंधित मामले की फाइलों का निपटारा करेंगे. पुलिसकर्मियों की शिकायतों से सम्बंधित प्रकरणों, गुंडा नियंत्रण एकट, मूल निवास प्रमाण पत्र सहित अन्य मामले  की फाइलें देखेंगे. केसों में एजी, एएजी की नियुक्ति के मामले देखेंगे. 

दो करोड़ की वित्तीय-प्रशासनिक स्वीकृति दे सकेंगे:
राज्यमंत्री राजेंद्र यादव पुलिस और आरएसी से सम्बंधित मामलों में दो करोड तक की प्रशासनिक वित्तीय स्वीकृति का अधिकार रहेगा. इसी तरह एफएसएल और एसीबी के लिए 1 करोड़ तक की प्रशासनिक वित्तीय स्वीकृति दे सकेंगे. पुलिस में खरीद सम्बंधित शिकायतों का निस्तारण कर सकेंगे. पासपोर्ट एक्ट के तहत कोर्ट केसों को वापस ले सकेंगे. 

गृह राज्यमंत्री करेंगे मासिक समीक्षा:
गृहमंत्री राजेंद्र यादव को सती रोकथाम कानून, बाल विवाह प्रतिषेध कानून, प्रदेश के लोगों पर अत्याचार, मानवाधिकार आयोग शिकायत सहित अनेक मामलों के अधिकार दिए गए हैं. इसके अलावा यादव हर महीने कामकाज की समीक्षा भी करेंगे. बतौर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास जिन विभागों का प्रभार है उनमें गृह विभाग ऐसा विभाग था जिससे बड़ी संख्या में फाइलें मुख्यमंत्री के पास आती थी लेकिन अब गृह राज्य मंत्री को काम का बंटवारा कर देने से मुख्यमंत्री पर फाइलों का दबाव कुछ कम हो सकेगा.

...फर्स्ट इंडिया के लिए शिवेंद्र सिंह परमार की रिपोर्ट

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