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हाड़ौती में गर्म चुनावी सियासत, कांग्रेस-बीजेपी में कुछ इस तरह है चुनावी मुकाबला

हाड़ौती में गर्म चुनावी सियासत, कांग्रेस-बीजेपी में कुछ इस तरह है चुनावी मुकाबला

जयपुर। हाड़ौती की सियासत का समृद्ध इतिहास रहा है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों की कोख से यहां दिग्गज जन्मे। दो लोकसभा सीटें पूर्ण तौर पर हाड़ौती में आती है एक है झालावाड़-बारां और दूसरी है कोटा-बूंदी। 

60 से 70 दशक के बीच आर एस एस के प्रचारक के तौर पर लालकृष्ण आडवाणी ने झालावाड़ में प्रवास किये, कुछ साल उन्होंने झालावाड़ के पाटन में बिताये और संघ को सशक्त बनाने का काम किया। एम पी से सटे होने के कारण अटल बिहारी वाजपेयी ने भी हाड़ौती में संघ प्रचारक के तौर पर भूमिका निभाई। बीजेपी को हाड़ौती में खड़ा करने में राजमाता विजयाराजे सिंधिया का भी अहम योगदान रहा। आज हाड़ौती को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की प्रयोगशाला के तौर पर जाना जाता है। बीजेपी की इस इलाके में जड़े गहरी रही है। इसके बावजूद समय समय पर कांग्रेस ने यहां बीजेपी को पटखनी देने का काम किया। 

झालावाड़,बारां,कोटा और बूंदी के इलाकों में बीते कई सालों में पंजे पर कमल भारी रहा। मिथक तोड़ने के लिये अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने हाड़ौती में पदयात्रा की ।  राहुल गांधी ने दौरे किये, यहीं कारण है कि सचिन पायलट ने हाड़ौती पर फोकस किया तो बीजेपी ने कांग्रेस की किसान पदयात्रा को आड़े हाथों लिया । पदयात्रा का असर रहा कि बारां में कांग्रेस को मजबूती मिली, कोटा में धारीवाल फिर विरोधियों पर भारी पड़े। झालावाड़ में वसुंधरा राजे के दबदबे के कारण कांग्रेस खास लाभ अर्जित नहीं कर पाई।  अब लोकसभा चुनावों में फिर कांग्रेस मजबूत चुनौती दे रही है ।  

-----झालावाड़ की सियासत - - - - - 

भाजपा - 
 - वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह मैदान में
- वसुंधरा राजे झालावाड़ की सबसे बड़ी नेता 
- 80 के दशक में धौलपुर से आई थी झालावाड़ 
- राजे खुद सांसद रह चुकी है और अभी पुत्र है सांसद 
- मुख्यमंत्री बनकर झालावाड़ को सियासी मानचित्र पर लाई
- दुष्यंत सिंह के प्रभाव का इलाका है झालावाड़ जिला

कांग्रेस - 
-डबल' प्रमोद फेक्टर 'यहां कांग्रेस की ताकत
-कांग्रेस ने नये चेहरे प्रमोद शर्मा को मैदान में उतारा
-कभी भाजपाई और संघी रह चुके शर्मा आज कांग्रेस में
-प्रमोद भाया है उनके लिये सबसे बड़ा ट्रम्प कार्ड
-भाया के प्रभाव का इलाका है बारां जिला

जातीय गणित - - धाकड़, गुर्जर, मीना, सहरिया, वैश्य, राजपूत, ब्राह्मण, दलित यहां प्रभावी वर्ग

ललित किशोर चतुर्वेदी, रघुवीर सिंह कौशल और दाऊदयाल जोशी की धरती रही है कोटा । इन्होंने बीजेपी का कमल खिलाया । भुवनेश चतुर्वेदी, रामकिशन वर्मा, भरत सिंह, शांति धारीवाल, हरिमोहन शर्मा सरीखे नेताओं ने कांग्रेस को सशक्त बनाया ।  कोटा में चुनावी मुकाबला है ओम बिरला और रामनारायण मीना के बीच । दोनों ही अनुभवी नेता है। कांग्रेस ने कोटा की ग्रामीण सियासत को आजमाते हुये जनरल सीट पर एसटी कार्ड चला। रामनारायण मीना पहले भी सांसद रह चुके है और अभी पीपल्दा से विधायक है। बीजेपी ने मौजूदा सांसद और कूटनीति में माहिर है ओम बिरला का उतारा है । माहेश्वरी वर्ग से आने वाले बिरला को महारत है माइक्रो चुनावी मैनेजमेंट में.. 

भाजपा-
-कोटा से फिर ओम बिरला है भाजपा उम्मीदवार 
-माइक्रो चुनावी मैनेजमेंट रही है उनकी ताकत
-भाजपा का मजबूत कैड़र है उनका आधार 
-हालांकि बिरला को भीतरघात की आशंका
-दिग्गज भाजपा नेता फिलहाल नहीं मन से उनके साथ
-इज्येराज सिंह व ममता शर्मा के आने से मिली मजबूती 

कांग्रेस - 
-रामनारायण मीना है कांग्रेस के उम्मीदवार 
-पहले भी कोटा से रह चुके है सांसद 
-मीना का आधार - मीना, गुर्जर, एससी, मुस्लिम वोट
-वर्तमान में पीपल्दा से विधायक
-राहुल गांधी की सभा से लाभ की उम्मीद 

हाड़ौती में बीते विधानसभा चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस को मिली जुली कामयाबी मिली थी। कमल की ताकत यहां पुरानी है । कांग्रेस मजबूत चुनौती देगी तभी बीजेपी को परास्त कर पायेगी। भीतरघात का सामना यहां दोनों पार्टियों के उम्मीदवार को करना पड़ रहा है। कांग्रेस ने परवन नदी की पाल पर चढ़कर सियासत की सोची है तो वहीं बीजेपी भी काउंटर के लिये तैयार है । 

....फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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