जयपुर  कैसे हुयी डिजिटल बाल मेला की शुरुआत? जान्हवी ने बताया जश्ने आज़ादी मनाने वाले बच्चों को सबसे बड़ा राज

 कैसे हुयी डिजिटल बाल मेला की शुरुआत? जान्हवी ने बताया जश्ने आज़ादी मनाने वाले बच्चों को सबसे बड़ा राज

 कैसे हुयी डिजिटल बाल मेला की शुरुआत? जान्हवी ने बताया जश्ने आज़ादी मनाने वाले बच्चों को सबसे बड़ा राज

जयपुर: डिजिटल बाल मेला. देशभर के बच्चों का सबसे पसंदीदा मंच. जो हर बच्चे को खुलकर बोलने का अधिकार दे रहा है. उनके विचारों को देश के सामने ला रहा है. उनकी प्रतिभा को निखार रहा है. क्या आपने कभी सोचा है इसकी शुरूआत कैसे हुई. किसने की. बच्चों के लिए इस मंच को स्थापित करने की पहल क्यों हुई. आखिर ये आईडिया है किसका. ये सवाल तो सभी के मन में आए होंगे. आज हम डिजिटल बाल मेला के इसी राज का खुलासा करने जा रहे है. जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा 5 की छात्रा है जाह्रनवी शर्मा. 10 साल की वह बच्ची जिसने देशभर के बच्चों को एकजुट करने का ये अद्धभूत प्रयास किया. ये कहानी शुरु हुयी एक फोन कॉल से. जयपुर के सवाई मानसिंह स्कूल में ही पढ़ने वाली 11 साल की रिद्धिमा कपूर ने अपनी दोस्त जान्हवी को फोन किया. ये बात अगस्त 2020 की है जब स्कूल बंद थे और बच्चे ऑनलाइन क्लास ले रहे थे. फोन पर बात करते- करते अचानक रिद्धिमा उदास हो गयी और बोली जान्हवी बहुत थक गये हैं घर में रहकर. 

अपनी दोस्त की उदासी से परेशान जान्हवी ने पास बैठी मां से कहा- मम्मा कुछ करें क्या?  बच्चों के लिये, सारे बच्चे बहुत परेशान है. मम्मा से कुछ करने की गुहार लगाते हुए जान्हवी बोली कुछ ऐसा जिससे सारे बच्चों की बोरियत दूर हो जाये. .लॉकडाउन का पालन भी हो जाये और बच्चे व्यस्त भी. बेटी की बात सुन मम्मा कुछ सोचती उससे पहले तपाक से जान्हवी बोली– आईडिया. एक डिजिटल बाल मेला करते हैं. एक छोटी सी 10 साल की बच्ची के मुंह से निकला ये शब्द ‘डिजिटल बाल मेला’ आज लाखों बच्चों के लिये एक मंच बन गया है. दरअसल पूरी ज़िंदगी माता पिता अपने बच्चों के लिये ही जीते हैं लेकिन बचपन में जब बच्चों को सबसे ज़्यादा उनकी ज़रुरत होती है तब माता-पिता ज़िंदगी की दौड़ में उलझे होते हैं. 

डिजिटल बाल मेला ऐसा माता पिता की उलझन दूर करने के लिये शुरु किया गया. एक कमरे से शुरुआत हुयी, बच्चे अपने घर में रहते हुये डिजिटल बाल मेला में शामिल होना शुरु हुये और फिर क्या था. डिजिटल बाल मेला का कारवां ऐसा आगे बढ़ा कि देश के ज़्यादातर राज्यों के बच्चों ने इसमें हिस्सा लिया. डिजिटल बाल मेला की शुरुआत जहां बच्चों की रचनात्मक बढ़ाने के मकसद से हुयी वहीं कोरोना के प्रति जागरुकता बढ़ाने में भी इस प्रयास ने अपना योगदान दिया. 

कहते है आवश्यकता आविष्कार की जननी है, ऐसे में जब कोई काम सच्चे दिल और दिमाग के साथ किया जाएं तो पूरी कायनात हमें अपने लक्ष्य तक पहुंचाने में लग जाती है- इस सच को जान्हवी ने समझा तो फ्यूचर सोसाइटी और एलआईसी ने साथ दिया. यही नहीं सरकारों ने भी बच्चों का उत्साह बढ़ाया. देश के कैबिनेट मंत्रियों से लेकर राजनीति के दिग्गज हो चाहें समाज के प्रबुद्ध लोग सभी ने बच्चों को अलग अलग विषयों पर प्रेरित किया. बीते दिनों बच्चों ने.  कैबिनेट मंत्री बी.डी कल्ला, परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास.  महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश.  चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा.  नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया.  उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़. विधानसभा मुख्य सचेतक डॉ महेश जोशी.  सभी ने जान्हवी को बधाई दी वहीं डिजिटल बाल मेला के सभी बच्चों को शुभकामनाएं. 

 

गौरतलब है कि जहां डिजिटल बाल मेला के पहले सीज़न में बच्चों ने कोरोना के प्रति जागरुकता बढ़ाने में अपना योगदान दिया वहीं सीज़न 2 में अब बच्चे ये बता रहे हैं कि उनकी सरकार कैसी होनी चाहिये. यहां ऑनलाइन सत्र होते हैं जिनमें बच्चे अपनी राजनीतिक जागरुकता बढ़ाते हैं. डिबेट होती है जिसके पक्ष और विपक्ष में बच्चे अपने विचार रखते हैं. प्रश्नोत्तरी में राजनीतिक समझ बढ़ाते हैं. इन सभी प्रतियोगिताओं में जीतने वाले बच्चे राजस्थान विधानसभा के विशेष बाल सत्र में हिस्सा ले सकेंगे.

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