ब्रेंडन चैपमैन पुलिस फोरेंसिक वैज्ञानिक जांच कैसे करते हैं? कब्रों से साक्ष्य निकालने वाले विशेषज्ञ की जुबानी..पढिए पूरी रिपोर्ट...

पुलिस फोरेंसिक वैज्ञानिक जांच कैसे करते हैं? कब्रों से साक्ष्य निकालने वाले विशेषज्ञ की जुबानी..पढिए पूरी रिपोर्ट...

पुलिस फोरेंसिक वैज्ञानिक जांच कैसे करते हैं? कब्रों से साक्ष्य निकालने वाले विशेषज्ञ की जुबानी..पढिए पूरी रिपोर्ट...

ब्रेंडन चैपमैन: मर्डोक विश्वविद्यालय पर्थ: हाल के हाई-प्रोफाइल लापता व्यक्तियों के मामले, जिनमें विलियम टाइरेल भी शामिल हैं - जो 2014 में तीन साल की उम्र में केंडल, न्यू साउथ वेल्स में लापता हो गए थे - ने अपराध स्थल की जांच में इस्तेमाल की जाने वाली फोरेंसिक विधियों की तरफ लोगों का ध्यान केंद्रित किया है. एक फोरेंसिक वैज्ञानिक होने के नाते, जिसने हजारों हत्याओं, यौन उत्पीड़न और गंभीर अपराध स्थलों पर काम किया है, मैं आपको बता सकता हूं कि यह प्रक्रिया उतनी सीधी सरल नहीं होती, जितनी कि लोकप्रिय लाइव क्राइम शो में दिखाई जाती है. 

मैं मर्डोक विश्वविद्यालय में फोरेंसिक विज्ञान पर शोध और अध्यापन करता हूं और कोल्ड-केस तकनीकों और कब्रगाहों की गुप्त खोज का विशेषज्ञ हूं, मैं आपको बताता हूं कि जब फोरेंसिक टीमें काम पर होती हैं तो पुलिस द्वारा अपराधस्थल के इर्द गिर्द लगाई गई टेपों के भीतर आम तौर पर क्या होता है. 

महत्वपूर्ण प्रारंभिक क्षण: 
एक बड़े अपराध के बाद के शुरूआती पलों में , जो हुआ वह अक्सर एक रहस्य होता है. एक पेंटिंग के एक दृश्य की तरह, ऐसा लगता है जैसे समय ठहर है; बहुत सा घरेलू सामान वैसे ही रखा रहता है, जैसा वह हिंसक घटना होने से पहले था. जांचकर्ता इस बात का बहुत ध्यान रखते हैं कि प्रारंभिक दृश्य में कोई गड़बड़ी न हो, ऐसा न हो कि मूल्यवान साक्ष्य नष्ट हो जाएं. पहला काम सब कुछ रिकॉर्ड करना है क्योंकि यह अविश्वसनीय विस्तार से दिखाई देता है - वीडियो, फोटो और लिखित नोट्स में. यहां तक ​​​​कि जो चीजें पहले बिना किसी काम की लग सकती हैं, वह बाद में नया महत्व ले सकती हैं. यह चरण महत्वपूर्ण है; वर्षों बाद, यह एकमात्र तरीका हो सकता है जिससे कोल्ड-केस टीमें नए सुरागों की पहचान करने के लिए दृश्य को फिर से देख सके. 

साक्ष्य परीक्षण और संग्रह: 
जैसे ही फोरेंसिक जांच शुरू होती है, सूचना और सबूत एकत्र किए जाते हैं और अपराधस्थल पर जांचकर्ताओं को दिए जाते हैं. यह साक्ष्य की खोज को निर्देशित करने के लिए संदर्भ प्रदान करने में मदद करता है. क्राइम सीन टीम बैग में सुरक्षित करने से पहले आइटम की पहचान करने और ‘‘फील्ड-टेस्ट’’ के लिए सावधानीपूर्वक काम करती है. कुछ मामलों में, वह शरीर के तरल पदार्थ या अपराध से जुड़े अन्य निशानों की पहचान करने के लिए रसायनों और परीक्षण किटों का उपयोग करते हैं. हम कुछ बहुत ही उच्च तकनीक वाली टार्च का भी उपयोग करते हैं, जिनसे एक खास तरह की रौशनी निकलती है, जिससे हम ऐसी चीजों को भी देख पाते हैं, जो अन्यथा दिखाई नहीं देतीं.  यह कुछ कुछ नाइटक्लब की लाइटिंग जैसा होता है, जो आपके काले कपड़ों पर लिंट को उजागर कर सकता है. इस मौके पर अपराध दृश्य परीक्षक वैज्ञानिक पद्धति का इस्तेमाल करते हुए वहां जो कुछ हुआ है, उसके बारे में कल्पना करते हैं और उसके आधार पर सुबूतों की खोज की जाती है. इस दौरान वह सुबूत भी जमा किए जाते हैं जो उनकी कल्पना के विपरीत होते हैं. सिद्धांतों को प्रस्तुत किया जाता है और नये सबूत सामने आने पर नए सिद्धांतों के स्थान पर पुराने सिद्धांतों को खारिज कर दिया जाता है. 

रक्त, वीर्य और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के निशान के लिए परीक्षण:
घटनास्थल पर, फोरेंसिक जांचकर्ताओं के पास वीर्य और रक्त जैसे शरीर के तरल पदार्थ की पहचान करने में मदद करने के लिए खास उपकरण होते हैं. रक्त की संभावित उपस्थिति के परीक्षण के लिए किया जाने वाला कैस्टल-मेयर परीक्षण 20 वीं शताब्दी की शुरुआत से किया जा रहा है. 

फेनोलोफ्थेलिन नामक एक रसायन को संदिग्ध नमूने पर गिराया जाता है, इसके बाद हाइड्रोजन पेरोक्साइड की एक बूंद जल्दी से डाली जाती है. ये रसायन रक्त घटक हीमोग्लोबिन का पता लगा सकते है. यदि यह तत्काल गुलाबी हो जाता है, तो इस बात की बहुत संभावना होती है कि नमूने में खून मौजूद है. एसिड फॉस्फेट टेस्ट नामक एक अलग विधि, जो प्रोस्टेट ग्रंथि से स्रावित एक एंजाइम का पता लगा सकती है, का उपयोग वीर्य की उपस्थिति की पहचान करने के लिए किया जाता है. एक तैयार रसायन संदिग्ध दाग के नमूने पर गिराया जाता है; यदि यह गहरे बैंगनी रंग में परिवर्तित हो जाए तो वीर्य की संभावित उपस्थिति का सुझाव देता है. आपने जांचकर्ताओं को ल्यूमिनॉल का उपयोग करने के बारे में भी सुना होगा, जो ऐसे पुराने खून के धब्बे या निशान का भी पता लगा सकता है जिसे किसी ने अपराध के बाद साफ़ करने की कोशिश की हो. अन्वेषक एक अंधेरे क्षेत्र पर ल्यूमिनॉल और अन्य रसायनों का छिड़काव करता है; एक नीली चमक बताती है कि रक्त के निशान मौजूद हो सकते हैं. इन सभी परीक्षणों के लिए, और फोरेंसिक जांचकर्ताओं के रूप में हम जो कुछ भी करते हैं, अवलोकन और विचारों दोनों के बारे में सावधानीपूर्वक रिकॉर्ड रखे जाते हैं. ये नोट अंततः अदालत में जाने वाली बड़ी केस फाइल का हिस्सा बन जाएंगे. 

विभिन्न प्रकार के फोरेंसिक विशेषज्ञ एक साथ काम करते हैं कई अलग-अलग प्रकार के विशेषज्ञ अपराध स्थल की जांच करते हैं, जैसे:फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ, जो रसायनों और पाउडर का उपयोग करते हैं ताकि उंगलियों के ऐसे निशानों को उभारा जा सके जो नग्न आंखों से दिखाई नहीं देते और यह निर्धारित कर सकें कि क्या वे एक डाटाबेस के प्रिंट के साथ तुलना करने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं. एक ब्लडस्टेन पैटर्न विश्लेषण विशेषज्ञ, जो डेकस्टर की तरह इसी नाम के अपराध शो की तरह, रक्त की बूंदों या निशान के आकार का निरीक्षण करते हैं, ताकि अपराध परिदृश्य की कड़ियों को जोड़ा जा सके. 

भौतिक साक्ष्य तुलना विशेषज्ञ, जो तुलना करने के लिए जूते के निशान या उपकरण के निशान जैसे सबूत रिकॉर्ड करते हैं. बैलिस्टिक और आग्नेयास्त्र विशेषज्ञ, जो बंदूक की गोली के अवशेषों और निकाल दी गई गोलियों जैसे सबूतों की पहचान और विश्लेषण करते हैं. खुफिया कब्र खोज विशेषज्ञ (मेरे जैसे!), जिनका मृत्यु के बाद की प्राकृतिक प्रक्रियाओं का ज्ञान कब्रों का पता लगाने और उसमें से साक्ष्य निकालने का श्रमसाध्य काम करने में मदद करता है. अन्य विशिष्ट फोरेंसिक चिकित्सकों में रोगविज्ञानी, कीट विशेषज्ञ, मानवविज्ञानी, जीवविज्ञानी और रसायन विज्ञानी शामिल हैं. 

गुप्त कब्रगाह:
बाहरी दृश्य अतिरिक्त चुनौतियां पेश करते हैं, क्योंकि मौसम, वन्य जीवन और स्वयं परिदृश्य से साक्ष्य क्षतिग्रस्त या नष्ट हो सकते हैं. हालांकि, छिपी हुई कब्रें भूमिगत सुरागों को संरक्षित करने में मदद कर सकती हैं. किसी छिपी कब्र को खोजना आसान नहीं होता। यहां तक ​​​​कि एक ताजा खोदी गई कब्र को अगर अच्छी तरह मिट्टी से ढक दिया जाए तो झाड़ियों के बीच उसे पहचानना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में अन्वेषक उन क्षेत्रों की तलाश करेंगे जहां जमीन अशांत दिखती है या ऐसे धब्बे जहां वनस्पति असामान्य रूप से बढ़ी है (नीचे दबाए गए शरीर के सड़ने के कारण). अन्वेषक मानव अवशेषों का पता लगाने के लिए प्रशिक्षित कुत्तों या जमीन के भीतर की खबर देने वाले राडार की भी मदद ले सकते हैं, जो जमीन के नीचे की मिट्टी में परिवर्तन की पहचान करने के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग करता है. 

एक बार कब्र की पहचान हो जाने के बाद, आप उसे मोटे तौर पर खोद नहीं सकते; कब्र के भराव को धीरे-धीरे छोटे ब्रश और फावड़ियों का उपयोग करके हटाया जाना चाहिए, जैसे कि पुरातात्विक खुदाई स्थलों पर इस्तेमाल किया जाता है. सभी हटाई गई मिट्टी को छान लिया जाता है और साक्ष्य के छोटे टुकड़ों की तलाश की जाती है; यहां तक ​​कि एक छोटा फाइबर या बाल भी कब्र को संदिग्ध व्यक्ति से जोड़ सकते हैं. कई बार कब्र के किनारे भी खोदने के लिए इस्तेमाल किए गए फावड़े के प्रकार या आकार के बारे में सुराग दे सकते हैं. परत दर परत, हम नीचे तब तक काम करते हैं जब तक हम कब्र के तल पर मृत व्यक्ति तक पहुंच नहीं जाते. यहां अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है. 

समय होता है महत्वपूर्ण: 
सभी साक्ष्यों का जीवनकाल होता है, जितनी जल्दी फोरेंसिक वैज्ञानिक किसी सबूत की पहचान और विश्लेषण कर सकते हैं, उसके परिणाम देने की संभावना उतनी ही बेहतर होती है. किसी पुराने अपराध मामले में यह जांच और भी मुश्किल होती है, जहां कई वर्षों में अपराध के दृश्य को बदल दिया गया हो. सोर्स-भाषा

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