VIDEO: सवर्ण आरक्षण से BJP को कितना चुनावी फायदा ? सियासी गलियारों में बहस जारी

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/05/17 08:47

जयपुर: सवर्ण आरक्षण से कितना चुनावी फायदा...परिणाम आने से पहले इसे लेकर सियासी हलकों में बहस जारी है. सियासत यहीं कहीं जा रही है कि बीजेपी ने अपने मूल वोटर्स को साधने के लिये ईबीसी आरक्षण का दांव चला था. मोदी कैबिनेट के पिछड़े सवर्णो के हक में दिये गये 10 फीसदी आरक्षण के निर्णय से चुनावी लाभ की बात की जा रही. बीजेपी को उम्म्मीद है कि इससे हिन्दी पट्टी में नुकसान की भरपाई हो सकती है. राजस्थान में लाभ होगा और शहरी, मध्यवर्गीय वोट मिल सकते है.

विधानसभा चुनाव में बीजेपी को राजस्थान में खासा नुकसान 
पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को राजस्थान में खासा नुकसान हुआ, सरकार तो चली ही गई इतना ही नहीं परम्परागत सवर्ण वोट हाथ से छिटक गये. शहरी सीटों पर इसी कारण बीजेपी को खासा नुकसान उठाना पड़ा. जयपुर और जोधपुर की शहरी सीटों पर भी हाथ ने बाजी मार ली. अब लोकसभा चुनावों में बीजेपी नये समीकरणों के साथ उतरी थी, 10 फीसदी ईबीसी आरक्षण का मुद्दा बीजेपी के हाथ लग गया. अब मतदान के बाद मिल रहे रुझानों से बीजेपी को लगता है राजस्थान के सवर्ण वोटर्स फिर साथ आये है. 

राजस्थान की कुल आबादी का लगभग 30 से 35 फीसदी सवर्ण 
गौरतलब है कि राजस्थान की कुल आबादी का लगभग 30 से 35 फीसदी सवर्ण है. सवर्ण वर्ग में राजस्थान में सर्वाधिक जन संख्या राजपूत वर्ग की आती है. इसके बाद ब्राह्मण और वैश्य वर्ग का नम्बर आता है. यह सवर्ण वर्ग राजस्थान की चप्पे चप्पे की सियासत को प्रभावित करता है. 1952से जब चुनावों का दौर राजस्थान में शुरु हुआ तब ब्राह्मण वर्ग का रुझान कांग्रेस के साथ रहा, ब्राह्मण वर्ग से निकले कई दिग्गज मुख्यमंत्री बने. sc,st,obc और अल्पसंख्यक की राजनीति के कारण कांग्रेस से ब्राह्मण की दूरी बढ़ी और बीजेपी की ओर अधिक झुकाव हो गया. 

राजपूत वर्ग का झुकाव जनसंघ और उसके बाद बीजेपी का साथ रहा
दूसरी ओर राजपूत वर्ग का झुकाव जनसंघ और उसके बाद बीजेपी का साथ रहा. वैश्य वर्ग का बीजेपी की जड़े जमाने में योगदान रहा. मोदी कैबिनेट के सवर्ण आरक्षण के फैसले का रिफ्लेक्शन लोकसभा चुनावों पर पड़ सकता है. राजस्थान में आज भी 25 में से तकरीबन 7 सांसद स्वर्ण वर्ग से है.

---सवर्ण सांसद - - - - 
--रामचरण बोहरा-जयपुर शहर
--राज्यवर्धन सिंह राठौड़ - जयपुर देहात
--ओम बिरला-कोटा
--सुभाष बहेडिया - भीलवाड़ा 
--चंद्र प्रकाश जोशी - चितौड़ 
--गजेन्द्र सिंह शेखावत - जोधपुर 
--हरिओम सिंह राठौड़ - राजसमंद
--डॉ रघु शर्मा - अजमेर (अब विधायक बन गये है)

सवर्ण सांसदों में सर्वाधिक प्रतिशत राजपूत वर्ग का है. जब रघु शर्मा ने कांग्रेस टिकट पर लोकसभा का उपचुनाव जीता और अजमेर के बीजेपी के शहरी गढ़ो में सेंध लगाई तो बीजेपी का कैडर हिल गया था, इसके बाद नवीन रणनीति पर काम शुरु कर दिया गया. नरेन्द्र मोदी के सवर्ण आरक्षण के नये फार्मूले के पीछे यह कारण अहम माने गये थे.

----सवर्ण आरक्षण के पीछे की सियासत ---
-हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों में हुई पराजय को बैलेंस करना
-छिटके हुये परम्परागत राजपूत, ब्राह्मण व वैश्य वोट को वापिस प्राप्त करना
-शहरों में बीजेपी के उम्मीदवारों की पराजय से उपजी नकारात्मक को दूर करना

2 अप्रैल भारत बंद के कारण SC-ST की नाराजगी का असर चुनावों में बीजेपी को झेलना पड़ा, साईड इफेक्ट यह रहे कि सवर्ण तबका भी नाराज हो गया. मोदी कैबिनेट के नये निर्णय जातीय सियासत को प्रभावित करने का काम किया है इससे बीजेपी को अपने परम्परागत वोट फिर मिल सकते है. सवर्ण और मध्यम वर्ग फिर साथ आ सकता है. उल्लेखनीय है कि इस वर्ग के बीच आर एस एस का भी दखल रहा है.

....फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in