VIDEO: यहां कैसे मिलेगा इलाज, जब अस्पताल की व्यवस्था 'बीमार' 

Vikas Sharma Published Date 2019/06/15 11:57

जयपुर: सूबे के मुखिया भले ही आमजन की पीड़ा को समझते हुए चिकित्सा सेवाओं को विस्तार दे रहे हो, लेकिन सरकारी लालफीताशाही मरीजों के लिए आफत बनी हुई है. जी हां ये कोई हमारा आरोप नहीं, राजधानी के दक्षिण क्षेत्र से सीधे जुड़े जयपुर अस्पताल में कुप्रबन्धन की बानगी है. अस्पताल में दो माह से एक्स-रे फिल्म नहीं है, जिसके चलते मरीजों को मोबाइल पर फोटो खिंचकर रिपोर्ट दी जा रही है. जिन मरीजों के पास स्मार्ट फोन नहीं है, वे भटकने को मजबूर है. इसके साथ ही गलत रिपोर्ट की आंशका भी बनी हुई है.  

मोबाइल पर फोटो खींचकर दे रहे मरीजों को रिपोर्ट:
राजधानी का वो जयपुरिया अस्पताल, जिसे एसएमएस अस्पताल के विकल्प के रूप में विकसित करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन व्यवस्थाओं को लेकर तो अस्पताल खुद बीमार नजर आ रहा है. यहां किसी फ्रेक्चर हो या और कोई दिक्कत, एक्सरे कराने के बाद मरीज हाथों में मोबाइल थामे डॉक्टर के पास पहुंचते हैं और वो मोबाइल उन्हें थमा देते है. इसके बाद डॉक्टर उसे देखकर सही फोटो होने की स्थिति में उपचार शुरू करता है. पिछले दो माह से ये सिलसिला अनवरत जारी है, लेकिन जिम्मेदार एक-दूसरे पर बात टालकर इतिश्री कर रहे है. जिन मरीजों के पास स्मार्ट फोन नहीं है, उन्हें तो "रिपोर्ट" ही नहीं मिल रही है.  

रिपोर्ट के लिए इधर से उधर भटकने को मजबूर मरीज:
—चिकित्सा निदेशालय-RUHS के बीच फंसे जयपुरिया अस्पताल के मरीज 
—SMS अस्पताल के विकल्प के रूप में विकसित जयपुरिया अस्पताल का ये कैसा हाल 
—अस्पताल में दो माह से नहीं एक्स रे फिल्म, मरीजों को मोबाइल पर फोटो खींचकर दी जा रही रिपोर्ट 
—फर्स्ट इंडिया ने जब इस कुप्रबन्घन की पड़ताल की तो पता चला कि बजट के अभाव में ये समस्या है 
—अभी तक निदेशालय से मिलता था 100 बैड के हिसाब से 40 लाख बजट, जो 500 बैड होने पर 1.50 करोड़ पहुंचा 
—निदेशालय ने जून 2018 के बाद बजट के पेटे राशि ये कहते हुए नहीं दी कि अस्पताल RUHS के अण्डर में है 
—जबकि RUHS ने बजट की कमी बताते हुए राशि नहीं दी
—ऐसे में एक साल गुजरने के बाद अस्पताल की माली हालात बिगड़ गई है, जिसके चलते व्यवस्थाएं पटरी से उतरने लगी है 
—भुगतान के अभाव में एक्स रे फिल्म के वेण्डर ने आपूर्ति ही बन्द कर रखी है, जिसका खामियाजा मरीजों को दिक्कतों के रूप में उठाना पड़ राह है. 

स्मार्ट फोन नहीं रखने वाले मरीजों को सर्वाधिक दिक्कतें:
एक्स-रे फिल्म नहीं मिलने पर सर्वाधिक दिक्कतें उन मरीजों को हो रही है, जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है. ऐसे मरीजों को यह कहकर भेजा जाता है कि चिकित्सक को रिपोर्ट भेज दी जाएगी, लेकिन जब चिकित्सक के पास मरीज जाता है तो उसे यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि अभी रिपोर्ट नहीं आई है. ऐसे हालात में मरीज इधर से उधर भटकने को मजबूर हो रहे है. इसके साथ ही एक्स-रे कराने वाले मरीज कंप्यूटर स्क्रीन पर एक्स-रे की फोटो मोबाइल से खींचकर डॉक्टर्स को दिखाने को मजबूर है. अब यदि मोबाइल फोटो सही है तो उपचार सही हो जाएगा. वरना मरीज का मर्ज ठीक होने की जिम्मेदारी भगवान भरोसे ही है. 

सबसे आश्चर्य की बात ये है कि सूबे के चिकित्सा मंत्री तक इस अव्यवस्था की खबर है, बावजूद इसके मरीजों की दिक्कतें आज भी अस्पताल में देखी गई. हालांकि जब फर्स्ट इंडिया की टीम ने अस्पताल में जिम्मेदारों से सवाल किया तो शाम होते-होते फिल्म की आपूर्ति होने के दावे शुरू हो गए, लेकिन सवाल ये है कि आखिर मरीजों की पीड़ा दो माह तक प्रबन्धन ने क्यों नहीं समझी. बजट आंवटन में किस स्तर पर लेटलतीफी हुई, इसकी जांच ही नहीं हो, बल्कि जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. अन्यथा आगे भी ऐसी की लापरवाहियां जारी रहेगी.  

... संवाददाता विकास शर्मा की रिपोर्ट 

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