Mumbai मैं पैन इंडिया पर विश्वास नहीं करता- Nikhil Siddhartha

मैं पैन इंडिया पर विश्वास नहीं करता- Nikhil Siddhartha

मैं पैन इंडिया पर विश्वास नहीं करता- Nikhil Siddhartha

मुंबई: फिल्म की च्वाइस और लगन आपको बनाती है या बिगाड़ती है. सही समय और सही लोगों से मिलने की ललक से, फिल्म इंडस्ट्री में बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है और इसका सही उदाहरण निखिल सिद्धार्थ है जिन्होंने जमकर पसीना बहाया और आज सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहें हैं. सपोर्टिंग किरदार निभाने से लेकर अब फिल्म में बतौर लीड किरदार निभाने वाले निखिल ने धमाका ही कर दिया है, और उनका अबतक का सफर काफी जबरदस्त रहा है.

First India Filmy के साथ एक खास बातचीत के दौरान, उन्होंने कार्तिकेय 2 की सफलता, पैन इंडिया कांसेप्ट, बायकॉट कल्चर और भी बहुत चीजों के बारे में बात की. 

निखिल ने कभी नहीं सोचा था कि उनकी फिल्म कार्तिकेय 2 को इतना प्यार मिलेगा, इसपर वे कहते हैं, "हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारी फिल्म इस दिन रिलीज हो या हम इंडिपेंडेंस डे वीक के दौरान इसे रिलीज करें. हम बस यही सोच रहे थे कि हम एक बहुत ही अलग फिल्म करना चाहते हैं. इसलिए हमने अपनी माइथोलॉजी कथाओं, इतिहास और भगवान श्री कृष्ण के जीवन और लेगेसी के बारे में बात करने का एक बहुत ही ईमानदार प्रयास किया. हम साउथ इंडिया में इस तरह के प्यार से तो वाकिफ हैं लेकिन अचानक पूरा देश हम पर प्यार बरसा रहा है."

निखिल ने यह भी बताया कि कार्तिकेय 2 बनाना जोखिम भरा था. उन्होंने कहा, "मैं पैन शब्द में विश्वास नहीं करता क्योंकि मुझे केवल एक ही पैन पसंद है जब मैं उसमें कुछ बनाता हूँ या पैन पिज्जा. मुझे मल्टी लैंग्वेज फिल्म या इंडियन फिल्म कांसेप्ट ही पसंद है. इस फिल्म का कांसेप्ट कुछ ऐसा है जिसे हर भारतीय देख सकता है क्योंकि हम इसमें इंडियन कल्चरल हेरिटेज के बारे में बात कर रहे हैं. फिल्म की कहानी में हम द्वारका शहर और भगवान कृष्ण की लेगेसी जैसी महत्वपूर्ण चीजों के बारे में बात कर रहें हैं. इसलिए, हमें लगता है कि कई लोगों को इसे देखना चाहिए."

बता दें कि फिल्म कार्तिकेय 2 में सेंसिटिव रिलीजियस सेंटीमेंट जैसी चीजें भी दिखाई गईं हैं, तो ऐसे में उन्हें फिल्म के बायकॉट होने का डर नहीं लगा, इसपर अभिनेता ने कहा, "हमने कभी भी ऐसा कुछ भी करने का इरादा नहीं किया जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे. हमने इस विषय पर अच्छी तरह से रिसर्च किया किया और यह सुनिश्चित किया कि हम फिल्म को सेंसिटिव तरह से दिखाए. कार्तिकेय 2 एक स्टैंडअलोन फिल्म है जो किसी एक स्पेशल फिल्म इंडस्ट्री के लिए नहीं है. यह सिर्फ भारतीय संस्कृति के बारे में बात करता है. देखिए, हैशटैग आएंगे और जाएंगे लेकिन अच्छा सिनेमा हमेशा फलता-फूलता रहेगा."

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