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अगर आपको कभी हुआ है डेंगू या मलेरिया तो आप दे सकते हैं कोरोना को टक्कर

अगर आपको कभी हुआ है डेंगू या मलेरिया तो आप दे सकते हैं कोरोना को टक्कर

जयपुर: कोरोना वायरस का संक्रमण पूरी दुनिया में तेजी से फैल रहा है. ऐसे में मेडिकल अध्ययन में पता चला है कि मलेरिया और डेंगू के इलाज के दौरान मरीज के शरीर में बनी एंटीबॉडीज कोरोना वायरस को आसानी से शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाने देती और व्यक्ति बगैर विशेष प्रयास के आसानी से स्वस्थ हो जाता है. डेंगू आरएनए वायरस से होता है और कोरोना वायरस भी आरएनए वायरस ही है. इसी कारण कई कोरोना संक्रमित मरीजों में कोरोना के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं.   

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कैसे काम करती है यह दवा (हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन): 
यह दवा (हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन) कोरोना वायरस पर किस तरह काम करती है, इसकी सटीक जानकारी का पता नहीं चल सका है लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस तरह से यह दवा अन्य वायरसों पर काम करती है ठीक उसी तरह यह कोरोना वायरस पर भी काम कर रही है. अन्य वायरसों में यह दवा सबसे पहले होस्ट सेल्स (वह कोशिकाएं जो सबसे पहले संक्रमण का शिकार हुईं और जिनसे अन्य कोशिकाओं में संक्रमण फैल रहा हो) में वायरस के प्रभाव को खत्म करती है. हालांकि मलेरिया-डेंगू-कोरोना के आपसी संबंध को लेकर शोध चल रहा है.   

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खा रहे हैं जिंक के साथ हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा
भले ही कोरोना का अब तक कोई सटीक इलाज नहीं खोजा जा सका, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक अस्पताल में भर्ती मरीजों को एंटी मलेरिया दवाइयां जैसे हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन और एजिथ्रोमाइसिन दी जा रही है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ भी रहे हैं. यही एक बड़ा कारण है की अमेरिका ने COVID-19 रोगियों के इलाज के लिए लाखों हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वाइन गोलियों की मांग भारत से की थी जो की कोरोना वायरस (Coronavirus) के संभावित इलाज में कारगर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद बताया है कि वह जिंक के साथ हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा खा रहे हैं. हालांकि इस दवा का सेवन उनके लिए उचित नहीं है, क्योंकि वह कोविड-19 पॉजिटिव नहीं पाए गए हैं.

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विदेश में भी सही है यह थ्योरी: 
विश्वभर में डेंगू और मलेरिया के 80 प्रतिशत मामले अफ्रीका, भारत, पाकिस्तान, नेपाल व भूटान में होते हैं. मलेरिया के इलाज के दौरान शरीर में विकसित हुई एंटीबॉडीज का ही असर है कि उक्त सभी देशों में यूरोप और अमेरिका के मुकाबले कोरोना वायरस का असर बहुत कम है. अफ्रीका के कुछ देशों में तो एक भी केस सामने नहीं आया है. अध्ययन में वैज्ञानिकों को कहीं न कहीं डेंगू-मलेरिया और कोरोना आपस में जुड़े नजर आते हैं. इस संबंध में शोध लगातार चल रहा है. उम्मीद की जाना चाहिए कि परिणाम जल्द ही सामने होंगे. 

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