धड़ल्ले से हो रहा अवैध बजरी खनन, दबंग माफियाओं के आगे बौना नजर आ रहा कानून

Nirmal Tiwari Published Date 2019/06/12 10:27

जयपुर: प्रदेश में बजरी खनन पर रोक के बाद से बजरी माफिया के हौसले बुलंद हैं. हालांकि खान विभाग और संयुक्त टीमों द्वारा कार्रवाई की गई है लेकिन कार्रवाई के आंकडे ये सच्चाई भी बता रहे हैं कि प्रदेश में किस पैमाने पर अवैध बजरी का खनन और परिवहन हो रहा है. इसी तरह राजधानी का दिल्ली रोड और आसलपुर अवैध खनन का अड्डा बन गए हैं. अब खुद मुख्यमंत्री ने हालात का जायजा लेने के लिए कल बैठक बुलाई है जिसे लेकर खान विभाग में हड़कंप मचा हुआ है. 

अवैध बजरी खनन मामले                    222
अवैध बजरी परिवहन मामले                13661
अवैध बजरी स्टॉक                             198
खान विभाग द्वारा दर्ज मामले             14786
कुल जुर्माना राशि                               78.12 करोड़
एफआईआर                                      1732
जब्त वाहन                                      15103

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश बजरी खनन पर रोक लगा रखी है. साथ ही राज्य सरकार को ताकीद भी कर रखा है कि जब तक बजरी पर कोई फैसला नहीं होता प्रदेश में बजरी खनन, परिवहन, निर्गमन और इस्तेमाल पर रोक रहेगी. बजरी पर रोक के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के समय खान विभाग को फटकार भी लगाई है कि बजरी के अवैध खनन पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लगाई जा रहीं. बहरहाल 1 अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2019 यानी बीते वित्त वर्ष में खान विभाग की कार्रवाई पर नजर डालें तो स्पष्ट होगा कि बजरी माफिया प्रदेश में अवैध बजरी पर अपना राज चला रहा है और ऐतिहासिक कार्रवाई के बाद भी बजरी की रोकथाम नहीं हो सकी है. 

12 महीनों में खान विभाग ने अवैध बजरी के 13 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं 
इन 12 महीनों में खान विभाग ने अवैध बजरी के 13 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं यानी प्रति दिन प्रदेश में अवैध बजरी के 40 से अधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं. औसतन रोजाना पांच के करीब एफआईआर और करीब 42 वाहनों को जब्त किया जा रहा है. इतनी कार्रवाई के बाद भी बजरी माफिया काबू में नहीं आ रहा तो स्पष्ट है कि खान विभाग के पास कार्रवाई के लिए संसाधन नाकाफी हैं और पुलिस कार्रवाई के की जगह बजरी से चांदी काटने में लगी है.  

प्रदेश में बजरी बंद होने के बाद बजरी माफिया बेखौफ सरकारी नियम कायदे का मखौल उड़ा रहे
दरअसल प्रदेश में बजरी बंद होने के बाद बजरी माफिया बेखौफ सरकारी नियम कायदे का मखौल उड़ाता नजर आता है. जयपुर में बैठी खान विभाग की कमजोर टीम की वजह से बजरी माफिया और ज्यादा सशक्त हुआ है. टोंक और सवाई माधोपुर से रोजाना हजारों की तादाद में वाहन न केवल राजधानी जयपुर वरन आसपास के इलाकों में पहुंचते हैं. जब से बजरी बंद हुई है मानो पुलिस थानों की तो चांदी हो गई है. यह अलग बात है कि कुछ पुलिस अधिकारी बजरी से वसूली करने के कारण फरारी काट रहे हैं. अकेले जयपुर जिले के 49 थानों में अवैध बजरी के ढेर लगे हैं. बजरी माफिया 20रुपए फीट मिलने वाली बजरी को दिनदहाड़े 80 से 100रुपए फीट में बेच रहा है. मुख्य सचिव के निर्देश पर बनाई गई टास्क फोर्स जिसमें पुलिस, परिवहन, खान, राजस्व और वन विभाग के अधिकारी शामिल हैं हाथ पर हाथ धरे बैठी है. कार्रवाई के नाम पर कागजी खानापूर्ति कर ली जाती है. ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री के पास पहुंची शिकायतों को लेकर सरकार गंभीर नजर आ रही है. खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कल खान विभाग की समीक्षा बैठक लेंगे. समीक्षा बैठक से ठीक पहले खान मंत्री प्रमोद जैन भाया ने भी बैठक लेकर अधिकारियों को अवैध बजरी अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई करने को कहा था. उधर अवैध खनन की बात करें तो पूरा दिल्ली रोड और आसलपुर अवैध खनन की बड़ी टेरिटरी बनता जा रहा है. खान विभाग के अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं. बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हो रही. 

अवैध बजरी खनन सरकार और पर्यावरण के लिए नासूर बन गया 
अवैध बजरी खनन सरकार और पर्यावरण के लिए नासूर बन गया है खान विभाग के अधिकारियों पर मिलीभगत के लग रहे आरोप और देखो खनन माफिया मानो सिस्टम को चुनौती दे रहा है. अब देखना यह है की बेलगाम अधिकारियों और खनन माफियाओं पर जब कल मुख्यमंत्री जवाब मांगेंगे अधिकारी कौन से तर्क देंगे. 

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