VIDEO: पहाड़ी में अवैध खनन का नंगा नाच, सरकारी खजाने के लिए बना दीमक

Nirmal Tiwari Published Date 2019/04/16 09:59

भरतपुर। राजस्थान, हरियाणा सीमा पर अवैध खनन सरकारी खजाने के लिए दीमक और पर्यावरण के लिए नासूर बन गया है। जी हां...हरियाणा की सीमा से लगते भरतपुर के पहाड़ी में अवैध खनन, रॉयल्टी के नाम पर अवैघ वसूली और ओवरलोडिंग धड़ल्ले से चल रही है। इससे सरकार को राजस्व नुकसान तो हो ही रहा है साथ ही पर्यावरण भी तार तार हो रहा है। खास रिपोर्ट:

अवैध खनन के लिए बदनाम मेवात इन दिनों खनन माफिया की टेरेटरी बन गया है। मेवात में अवैध खनन और ओवरलोडिंग जैसे काले कारोबार को खनन, परिवहन व स्थानीय प्रशासन मिलीभगत कर बंद नहीं करवा रहा है। ऐसे में कामां तहसील के पहाड़ी में अवैध खनन, रॉयल्टी की अधिक वसूली और विस्फोटक सामग्री की जमकर बिक्री हो रही है। रॉयल्टी की आड़ में सड़क दुरुस्त करने के नाम पर प्रति ट्रक तीन सौ रुपए की अधिक वसूली हो रही है। पहाड़ी में नांगल जोन बनने के बाद खनन का काम तो बए़ा है लेकिन इसका लाभ पहाड़ी को न होकर सीमा से सटे हरियाणा के फिरोजपुर झिरका, बीवां, पुन्हाना जैसे कस्बों को हो रहा है। 

मेवात में नांगल क्रेशर जोन है, लेकिन यहां खनन का काम भी चलता है जबकि दोनों जोन अलग होने चाहिएं। यही कारण कि यहां रॉयल्टी पिसे माल पर भी होती है। खान से निकलने के बाद पत्थर रॉयल्टी नाके पर जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता। यहां खदान व क्रेशर पास पास होने के चलते पत्थर सीधा ही क्रेशर्स पर पहुंच रहा है। इस क्षेत्र में जीटी पर्ची के नाम पर रॉयल्टी वसूल रहा हैं, इसे अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा है। होना तो चाहिए कि रॉयल्टी नाकों पर सीसीटीवी कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक कांटे होने चाहिएं। इस मामले में स्थानीय पुलिस का कहना है कि अवैध खनन और रॉयल्टी की अवैध वसूली को लेकर औपचारित शिकायत तो नहीं मिली है लेकिन पुलिस अपने सतर पर अनुसंधान कर रही है।

पहाड़ी क्षेत्र में रॉयल्टी का ठेका जिस फर्म को दिया गया है उसे चेता पत्थर पर 38 रुपए 50 पैसे प्रति टन रॉयल्टी वसूलनी चाहिए, लेकिन ठेकेदार यहां प्रति ट्रक 300 रुपए अधिक ले रहा है। इस सबकी जानकारी खान विभाग को होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। रॉयल्टी ठेकेदार के लोग क्रेशर्स पर भी सीधे पत्थर पहुंचवाकर सरकार को भी राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं। सूत्रों की माने तो रोजाना यहां के दर्जनभर क्रेशर्स के अलावा अन्य खदानों से 500 से अधिक ट्रक पत्थर सप्लाई किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन ने खान विभाग से खदानों के जीपीएस नक्शे मांगे तो वो भी उपलब्ध नहीं करवाए गए। यहीं नहीं यहां आरएसी की चौकी तैनात करने को लेकर भी खान विभाग अपनी ओर से अनुमति नहीं दे रहा है। इससे स्पष्ट है कि खान विभाग के अधिकारियों की रॉयलटी वसूली से लेकर अवैध खनन तक में मिलीभगत रही है। ओवरलोडिंग पर तो कोई रोक टोक है ही नहीं। बड़ी बात ये है कि यहां चल रहे अवैध वसूली और लेन देन के खेल पर एसीबी की ओर से भी कोई प्रसंज्ञान नहीं लिया गया है। ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार जल्द ही पूरे मामले पर कार्रवाई कर न केवल अवैध खनन को रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी वरन रॉयल्टी ठेकेदार पर भी अवैध वसूली के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।

... संवाददाता निर्मल तिवारी की रिपोर्ट

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