Maharashtra Ganpati Visarjan: पुणे में बिना जुलूस के हुआ गणेश मूर्तियों का विसर्जन

Maharashtra Ganpati Visarjan: पुणे में बिना जुलूस के हुआ गणेश मूर्तियों का विसर्जन

Maharashtra Ganpati Visarjan: पुणे में बिना जुलूस के हुआ गणेश मूर्तियों का विसर्जन

पुणे: महाराष्ट्र में लगातार दूसरे वर्ष कोविड-19 पाबंदियों के कारण भगवान गणेश की मूर्तियों को दस दिवसीय उत्सव के अंतिम दिन रविवार को सार्वजनिक जुलूस के बिना विसर्जित किया गया. 'गणपति बप्पा मोरया' के जयघोष के बीच, पांच 'मनाचे (प्रमुख) गणपति' - कस्बा गणेश, तांबडी जोगेश्वरी, गुरुजी तालीम, तुलसीबाग और केसरी वाडा की प्रतिमाओं को उनके संबंधित पंडालों में स्थापित कृत्रिम टैंकों में विसर्जित किया गया.

कोविड-19 पाबंदियों को ध्यान में रखते हुए सादगी से मनाया पूरा त्योहार
परंपरा के अनुसार, पहले 'मनाचा गणपति' कस्बा गणेश की मूर्ति को एक पालकी में रखा गया था, जिसे “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष के बीच ले जाया गया. इसे पंडाल परिसर में तैयार पानी के टैंक में विसर्जित किया गया. कस्बा मंडल के न्यासी श्रीकांत कोटे ने कहा कि कोविड-19 पाबंदियों को ध्यान में रखते हुए हमने सादगी से पूरा त्योहार मनाया. कस्बा मंडल अनुशासन में विश्वास करता है. पंडाल परिसर में दस भक्तों की उपस्थिति में विसर्जन हुआ. इस बीच, पुलिस ने तुलसीबाग मंडल के बाहर ढोल और अन्य वाद्ययंत्रों को जब्त कर लिया क्योंकि वहां जमा कुछ भक्तों ने नृत्य करना शुरू कर दिया और जुलूस निकालने की कोशिश की.

कुछ भक्तों ने ढोल बजाए लेकिन उन्हें तुरंत रोक दिया गया
संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) रवींद्र शिसावे ने कहा कि जैसे ही कुछ भक्तों ने ढोल और अन्य वाद्ययंत्र बजाने शुरू किए, हमने उन्हें तुरंत रोक दिया. उन्होंने कहा कि सभी मंडल कोविड-19 नियमों और विनियमों का पालन करते हुए प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं. सामान्य स्थितियों में, 'अनंत चतुर्दशी' त्योहार के अंतिम दिन बड़े जुलूस निकाले जाते हैं. सड़कों पर भीड़ से बचने के लिए रविवार को पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ की नगर निगम सीमा और तीन छावनी क्षेत्रों में गैर-आवश्यक श्रेणी के तहत सभी दुकानें बंद रहीं. सोर्स- भाषा
 

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