पंजाब की राजनीतिक धारा का राजस्थान के चुनाव में महत्व

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/13 11:35

श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले में गंगनहर व आईजीएनपी के पानी के साथ ही राजनीति की धारा भी पंजाब-हरियाणा से बहकर इन दोनों जिलों में आती है । यहां सीटों का मिजाज बाकी राज्य से अलग है,सीटे जरूर राजस्थान की है,लेकिन टिकट घोषणा से लेकर चुनाव जीतने तक पंजाब-हरियाणा के नेताओं का वर्चस्व यहाँ साफ दिखाई देता है । बात टिकट चाहने वालों की करें तो श्रीगंगानगर जिले की सादुलशहर विधानसभा सीट से भाजपा की टिकट के लिए हर बार पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बादल परिवार की दखलअंदाजी रहती है तो वही गंगानगर सीट से इस बार भाजपा के राजस्थान प्रभारी अविनाशराय खन्ना का टिकट दिलाने का सहारा बने हुए है । सादुलशहर और करणपुर में कांग्रेसी और भाजपा दोनों पार्टियों के ही नेता टिकट पाने के लिए पंजाब के बादल परिवार और सीएम अमरिंदर सिंह से सहारा लेते रहे है। उधर हनुमानगढ़,नोहर व भादरा सीट पर भी पंजाब-हरियाणा के नेताओ का समय-समय पर पूरा वर्चस्व रहा है।

राजस्थान का एक ऐसा जिला जो एक तरफ पंजाब बॉर्डर और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगता है। जहां पर दूर-दूर तक हरियाली नजर आती है तो वही गंगनहर का बहता पानी यहां की फिजाओ में खुशिया बिखेरता है। जी हाँ हम बात कर रहे है श्रीगंगानगर जिले की जो पंजाब से लगा होने के कारण अपने पंजाबी कल्चर से पुरे राजस्थान में अलग ही नजर आता है । पंजाब से आने वाली गंगनहर का पानी जिले में जिस तेजी के साथ बहकर आता है उसी तेजी के साथ चुनाव के दौरान यहां की फिजाओ में पंजाब की राजनीती भी अपना प्रभाव दिखाती है। राजस्थान में जब-जब चुनाव का बिगुल बजता है,तब-तब यहाँ के राजनितिक समीकरण पंजाब से जुड़ जाते है । समय-समय पर पंजाब की राजनितिक ताकतों ने यहाँ के चुनावों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तो वही टिकटों के वितरण में कौन किसके लिए वजीर बनकर अपना रोल अदा करता है । चुनाव में पार्टियों के प्रत्याशियों के लिए टिकटों के बंटवारे को लेकर भले ही जयपुर-दिल्ली केंद्र बने रहते है,लेकिन श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले के नेताओ की अधिकांश डोर पंजाब-हरियाणा से जुडी रहती है । श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले का पंजाब-हरियाणा से ना केवल रोटी-बेटी का साथ है बल्कि अधिकतर रिश्तेदारियां होने से राजनति में इच्छा रखने वाले परिवार वहां से टिकट लेने के लिए सिफारिशों से लेकर चुनाव जितने तक के लिए सहयोग लेते है ।

राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले टिकटों को लेकर इस बार भी यही देखने को मिल रहा है । सादुलशहर से कांग्रेस का टिकट चाह रही गगनदीप कौर और बलकरण सिंह बराड़ पंजाब सरकर में वित्त मंत्री मनप्रीत बादल परिवार के करीबी हैं ।  तो वहीं जगदीश जांगिड़ कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता मनीष तिवारी की कृपा से एक बार टिकट हाशिल करने में कामयाब भी हो चुके है। उधर गुरदास मान की तुम्बी बजाने वाले अमन सिद्धू को भी पंजाब से दबाव डलवाकर टिकट हाशिल करने के प्रयाश में है । इसी तरह मौजूदा विधायक गुरजंट सिंह बराड़ इस बार अपने पौत्र गुरवीर बराड़ के लिए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का सहारा लेकर टिकट लेने में कामयाबी हाशिल कर चुके है । बादल परिवार के एक सदस्य इस समय पंजाब की कांग्रेस सरकार में वित्त मंत्री है। उधर पड़ोसी जिले हनुमानगढ़ की सीट से कांग्रेस से टिकट मांग रहे पूर्व विधायक विनोद कुमार लीलावाली पंजाब कांग्रेस के दिग्गज नेता बलराम जाखड़ के भांजे और सांसद सुनील जाखड़ के ममेरे भाई हैं तो वहीँ गंगानगर सीट पर पिछली बार कांग्रेस प्रत्याशी रहे जगदीश जांदू हरियाणा सरकार में मंत्री रहे अपने रिश्तेदार के दबाव से टिकट लेने में कामयाब रहे थे। इसी तरह नोहर से अभिषेक मटोरिया के हरियाणा के चौटाला परिवार से रिश्तेदारी के चलते टिकट वितरण में मजबूती रखते है जिसके चलते इन्हे टिकट में प्राथमिकता मिलती है। उधर कांग्रेस-भाजपा के टिकट वितरण में पंजाब-हरियाणा के हस्तक्षेप होने पर विरोधी इसके पीछे पंजाब-हरियाणा का व्यक्तिगत स्वार्थ बता रहे है। जमीदारा के अध्यक्ष बीड़ी अग्रवाल की माने तो जितने के बाद ऐसे उम्मीदवार पंजाब-हरियाणा के लोगो के लिए काम अधिक करते है ऐसे में वोटरों की उपेक्षा की जाती है ।

वही आप पार्टी के उम्मीदवार अमित कारगवाल आरोप लगाते हुए कह रहे है की दोनों जिलों में पंजाब-हरियाणा के नेताओ की सिफारिशों के बाद कांग्रेस-भाजपा टिकट तय करती है ऐसे में जनता की भावना से तैयार की गयी सर्वे रिपोर्ट इन पार्टियों के लिए कोई महत्व नहीं रखती है । जबकि आप जैसी पार्टी में इंटरव्यू और योग्यता से टिकट तय की जाती है । उधर पंजाब-हरियाणा की सिफारिशों पर टिकट देने के पीछे भाजपा-कांग्रेस नेता इसे अलग कारण बता रहे है । 

भाजपा की ओर से गंगानगर सीट से 4 बार विधायक रहे राधेश्याम गंगानगर भी टिकट के प्रमुख दावेदार हैं । चर्चा यह भी है कि भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दी तो भी निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर सकते हैं । कांग्रेस की ओर से युवा ब्लॉक अध्यक्ष अंकुर मिगलानी का नाम टिकट की दौड़ में है । वजह है उनका अरोड़ा समाज से जुड़ा होना एक और नाम नमीता सेठी भी है । भाजपा की ओर से जलदाय विभाग से रिटायर्ड एससी.अजय बजाज,अजय दावड़ा और डॉक्टर दर्शन आहूजा दावेदारों में है । जिनकी यहां के प्रमुख वोट बैंक अरोड़ा समाज में अच्छी पकड़ है । वही हाउसिंग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अजयपाल सिंह गंगानगर जिले से चुनाव लड़ने के इच्छुक बताए जाते हैं । श्रीगंगानगर की राजनीति में दलित,पंजाबी,अरोड़ा और सिखों का असर रहा है । राजस्थान में दलितों की सबसे ज्यादा आबादी गंगानगर में है । पड़ोसी जिला हनुमानगढ़ दूसरे नंबर पर आता है । दोनों जिलों की विधानसभा सीटों को मिलाकर ही श्रीगंगानगर लोकसभा सीट बनती है । जो एससी के लिए रिजर्व है.जिले की कुल 6 विधानसभा सीटों में से एससी के लिए रिजर्व दो सीटों को छोड़ दे,तो शेष 4 सीटों पर जातीय समीकरण कुछ ऊँचे-नीचे होते रहे हैं । गंगानगर सीट पर सबसे ज्यादा करीब 45 हजार से ज्यादा वोट पंजाबी अरोड़ा वर्ग के हैं । इस वर्ग के राधेश्याम गंगानगर चार बार 1980,1993,1998 और 2008 में यहां विधायक रह चुके हैं । 1993 में तो उन्होंने भाजपा के स्टॉलवर्ट भैरोंसिंह शेखावत को हराया था । लेकिन बहुतायत में होने के बावजूद 2003 और 2013 में गैर अरोड़ा सुरेंद्र सिंह राठौड़ भाजपा से और कामिनी जिंदल जमीदारा पार्टी से यहां चुनाव जीत चुकी है । 
काका सिंह 1st इंडिया न्यूज़ लालगढ़ जाटान श्री गंगानगर 

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