मोदी सरकार के जल शक्ति अभियान में देश के शहरी निकायों को मिली अहम जिम्मेदारी

Abhishek Shrivastava Published Date 2019/07/18 08:06

जयपुर: केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार की ओर से शुरू किए गए जल शक्ति अभियान में जल संरक्षण के लिए देश के शहरी निकायों को अहम जिम्मेदारी दी गई है. अभियान के प्रथम चरण में प्रदेश के 29 जिलों के 111 शहरी निकायों को चिहिन्त किया गया है. इस अभियान में प्रदेश के शहरी निकायों को क्या करना होगा, एक खास रिपोर्ट:

निकायों के लिए गाइडलाइन्स:
पूरे देश में एक जुलाई से जलशक्ति अभियान का पहला चरण शुरू हो चुका है. देश के ग्रामीण इलाके के साथ शहरी इलाकों को भी इस अभियान में शामिल किया गया है. राजस्थान के 29 जिलों के 111 शहर अभियान के प्रथम चरण में शामिल किए गए हैं. इस जल शक्ति अभियान में शहरी निकायों को क्या-क्या काम करने होंगे, किस तरह नियमों में बदलाव करना होगा, नए निर्माण के लिए राशि कहां से आएगी और किस तरह से काम होगा? इन सभी सवालों के जवाब के लिए केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने देश भर की निकायों के लिए गाइडलाइन्स जारी की है. इन गाइडलाइन्स के मुताबिक शहरी निकायों को अपने क्षेत्र की सभी तरह की इमारतों में रैन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर्स का निर्माण सुनिश्चित करना होगा. साथ ही जिन इमारतों में ये स्ट्रक्चर्स  है,उनकी नियमित मॉनिटरिंग करनी होगी ताकि ये वर्षा जल को भूजल स्तर तक पहुंचाने में उपयोगी रहे हैं. इसी तरह शहरी निकायों को ट्रीटेड वेस्ट वाटर के दुबारा इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए भी प्रावधान करने होंगे. आपको बताते है कि केन्द्र सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन्स में इन दोनों मामलों में शहरी निकायों को क्या जिम्मेदारी दी गई है. 

प्रदेश के शहरी निकाय ये करेंगे काम:
—हर शहरी निकाय में एक रैन वाटर हार्वेस्टिंग सैल का गठन होगा
—यह सैल शहर में रैन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए काम करेगी
—यह सैल भूजल के दोहन और भूजल के रिजार्च की मॉनिटरिंग करेगी
—इस बारे में शहर के प्रमुख स्थानों पर शहर के लोगों को जानकारी भी दी जाएगी
—शहरी निकाय सभी प्रकार की इमारतों में रैन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर्स का निरीक्षण करने के लिए अभियान चलाएंगे
—स्ट्रक्चर्स नहीं बने या बने हुए स्ट्रक्चरर्स फंक्शनल नहीं हैं तो इस बारे में आवश्यक कार्यवाही की जाएगी
—फुटपाथ और पार्कों के वाक वे पर पेड़ों के चारों तरफ परफोर्टेड पेवर ब्लॉक्स लगाएं जाएंगे ताकि वर्षा जल भूजल तक जा सके
—सरकारी इमारत, कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स, शिक्षण संस्था, हॉस्पिटल्स व ग्रुप हाउसिंग इमारतों में 
—भवन विनियमों के मुताबिक लगे डुअल पाइपिंग सिस्टम को चैक किया जाएगा
—अगर सिस्टम नहीं लगे हैं तो भवन विनियमों के मुताबिक संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी
—सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले ट्रीटेड वेस्ट वाटर का दुबारा उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा

ट्रेडिशनल वॉटर बॉडीज पर भी खास फोकस:
जलशक्ति अभियान में ट्रेडिशनल वॉटर बॉडीज जैसे पुरानी बावड़ियां, कुएं, तालाब व झील आदि के संरक्षण पर भी खास फोकस किया गया है. साथ ही शहरों में अधिक से अधिक पौधे लगाने को भी प्राथमिकता दी गई है. इसके पीछे कारण यह है कि वर्षा जल के संरक्षण में पेड़ भी बड़ी भूमिका निभाते हैं. आपको बताते हैं कि केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की गाइडलाइन्स में वाटर बॉडीज के संरक्षण और प्लांटेशन को लेकर शहरी निकायों को क्या जिम्मेदारी दी गई है. 

ट्रेडिशनल वॉटर बॉडीज के लिए शहरी निकायों को जिम्मेदारी:
—हर एक शहरी निकाय को कम से एक वाटर बॉडी के रिवाइवल की जिम्मेदारी लेनी होगी
—शहर में मौजूद प्रमुख ट्रेडिशनल वॉटर बॉडीज चिहिन्त करनी होगी।
—इनके संरक्षण के लिए जन जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा
—वाटर बॉडीज को अतिक्रमण से बचाने के लिए उनकी जियो टैगिंग करनी होगी
—निकाय वाटर बॉडीज,सार्वजनिक स्थल,पार्क और सड़क किनारे पौधे लगाएंगे
—पौधरोपण के लिए विभिन संस्थाओं के माध्यम से अभियान चलाए जाएंगे

अमृत योजना में शामिल:
केन्द्र सरकार ने जल शक्ति अभियान को अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन फॉर अरबन टाउन्स (अमृत) से भी जोड़ा है. इससे शहरी निकायों को अभियान के तहत किए जाने वाले कार्यों के लिए फंडिंग में मदद मिलेगी. अमृत योजना में शामिल प्रदेश के 29 शहरों में इसी योजना के प्रावधानों के अनुसार केन्द्रीय सहायता मिल जाएगी. शेष शहरी निकाय शहरी आजीविका मिशन,चौदहवें वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग से फण्ड ले सकेंगे. 

... संवाददाता अभिषेक श्रीवास्तव की रिपोर्ट 

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