गुजरात के कच्छ जिले में भूकंप का हल्का झटका, आमजन को याद आया 2001 का वो तबाही का मंजर.

गुजरात के कच्छ जिले में भूकंप का हल्का झटका, आमजन को याद आया 2001 का वो तबाही का मंजर.

गुजरात के कच्छ जिले में भूकंप का हल्का झटका, आमजन को याद आया 2001 का वो तबाही का मंजर.

अहमदाबाद: गुजरात के कच्छ जिले में सोमवार सुबह 3.2 तीव्रता का भूकंप का झटका महसूस किया गया. ऐसे में लोगों को 2001 का वो मंजर याद आया जब भारत में 26 जनवरी गुजरात के लिए तबाही लेकर आया. विनाशकारी भूकंप कई हजारों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पडा था. लोग सोते के सोते ही रह गए थे. वही पर करीब चार लाख घरों को नेस्तनाबूद कर दिया. सोमवार को आए भूकंप के झटके ने लोगों को एक बार फिर उसी मंजर की याद दिला दी. हालांकि आज आए भूकंप के झटके से किसी भी प्रकार की जन धन हानी होने की सूचना नही है.

  सुबह 7 बजकर 42 मिनट पर महसूस किया गया झटका:
गांधीनगर स्थित भूगर्भीय अनुसंधान संस्थान की वेबसाइट के अनुसार सुबह सात बजकर 42 मिनट पर  भूकंप के झटके ने आए भूकंप का केंद्र कच्छ जिले में दुधई से 13 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में 18.6 किलोमीटर गहराई में था. राज्य आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने कहा कि कच्छ अत्यधिक जोखिम वाले भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है.

कच्छ जिले में 2001 में आया था विनाशकारी भूकंप:
 आज से 20  साल पहले यानी 26 जनवरी 2001 को गुजरात के कच्छ में कुदरत का कहर टूटा था. इसकी याद आज भले ही किसी के मस्तिष्क में हो या न हो, पर गुजरात का कोई भी इंसान आज के दिन को नहीं भूल सकता. और विशेषकर वो लोग तो कतई ही नही भूल सकते जिन्होने अपनो को इस मंजर में खो दिया था. उस दिन कच्छ में 6.9 की तीव्रता का भूकंप आया था. जिसने पूरे कच्छ की सूरत ही बदलकर रख दी. 

2001 में आए भूकंप ने 24 जिलों में मचाई थी तबाही:
2001 में आए भयानक भूकम्प ने गुजरात के 24 जिलों में तबाही का मंजर खड़ा कर दिया था. कच्छ, सुरेंद्रनगर और राधनपुर में अधिक असर देखने को मिला था. इस प्राकृतिक आपदा में 7904 गांव तबाह हो गए थे. 16 हजार 9 सौ 27 लोगों की मौत हुई थी, और 1 लाख 66 हजार 836 लोग घायल हुए थे. इसके अलावा 1 लाख 47 लाख 499 लोग घर से बेघर हुए थे. कच्छ जिले के भुज, अंजार, भचाऊ और नखत्राणा में अधिक तबाही देखी गई थी. भुज में 3000 से अधिक लोगों की मौ हुई थी, 90 प्रतिशत लोगों के घरों को रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 7.6 और 7.7 के बीच आंकी गई, जो बेहद खतरनाक श्रेणी का होता है. करीब 700 किलोमीटर दूर तक झटके महसूस किए गए. गुजरात के 24 जिले जलजले से हिल गए और छह लाख लोगों को बेघर होना पड़ा.

2001 में 52 वां गणतंत्र दिवस मना रहा था देश, 12 हजार से ज्यादा लोगों की गई थी जान: 
भारत जिस वक्त 52वां गणतंत्र दिवस मना रहा था, सुबह पौने नौ बजे गुजरात का भुज भूकंप से हिल उठा. आखिरी आंकड़ों के मुताबिक कच्छ और भुज में 17,000 से ज्यादा लोगों की जान गई. भुज भूकंप के केंद्र से सिर्फ 12 किलोमीटर दूर बसा शहर है. भचाऊ और अंजार भी बुरी तरह प्रभावित हुए. गांव के गांव मिट्टी में मिल गए, ऐतिहासिक इमारतें जमींदोज हो गईं. भुज में 40 फीसदी घर, आठ स्कूल, दो अस्पताल और चार किलोमीटर सड़क स्वाहा हो गए. अमेरिकी अखबार लॉस एंजेलिस टाइम्स ने अगले दिन साइमन केसी ली और जॉन थोर दालब्रुग की रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें लिखा था कि भूकंप के बाद की रात अहमदाबाद की सड़कों के किनारे लोग तंबू लगाने लगे, किसी तरह अलाव जला कर गर्मी हासिल करने की कोशिश करने लगे. राहतकर्मी नंगे हाथों में सर्चलाइट पकड़ कर बचे हुए लोगों को निकालने का प्रयास करने लगे.

तबाही के बाद मलबे से जीवन निकालना नहीं था आसान, इंडियन आर्मी ने निभाई थी अहम भूमिका: 
रिपोर्ट में लिखा गया कि भूकंप पीड़ित लोगों के खून से सने शरीर को राहतकर्मी अपने हाथों से निकाल रहे हैं. कपास उत्पादन की वजह से इस शहर को 'मैनचेस्टर ऑफ ईस्ट' कहते हैं. जहां मलबों में ड्रिलिंग करके जिंदगी की तलाश हो रही है. जैसे ही एक बुलडोजर मलबा साफ करने पहुंचा, पास खड़े लोग स्तब्ध होकर देखने लगे. भूकंप का असर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान पर भी पड़ा. भुज और पास के अहमदाबाद शहरों में तेजी से राहकर्मियों को भेजा गया, लेकिन मलबों से जीवन निकालने का काम आसान नहीं था. इसमें भारतीय सेना की भी मदद ली गई. जबकि कई स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य भी गुजरात पहुंचे. गणतंत्र दिवस और छुट्टी का दिन होने की वजह से लोग घरों पर थे और आम तौर पर टीवी पर गणतंत्र दिवस की झांकियां देख रहे थे.उस वक्त के भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने "युद्ध स्तर पर" राहत की अपील की और पूरे देशवासियों से कहा, "आपको एक साथ मिल कर इस आपदा से लड़ना चाहिए.

2001 के विनाशकारी भूंकप के आंकड़े:
स्थान- कच्छ भुज (गुजरात)
दिन-26 जनवरी 2001
समय-सुबह 8 बजकर 46 मिनट
कंपन- 2 मिनट
ऐरी सेंटर- चोबारी गांव, भचाऊ से 9 कि.मी. और भुज से 20 कि.मी. दूर
तीव्रता- 6.9 रेक्टर स्केल पर
मौत- 17 हजार
घायल- 1, 67,000
मकानों की तबाही- 4 लाख
भूकंप का असर- 700 कि.मी. तक और 21 जिले के 6 लाख लोग बेघर हुए
कच्छ जिले में मौत- 12,290  (भाषा) 


 

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