सख्त रोक के बावजूद हजारों लोगों की मौजूदगी में चित्तौड़गढ़ जिले के कई शक्तिपीठों में हुई पशुबलि

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/10/09 08:10

चित्तौड़गढ़: पशु बलि पर सख्त रोक होने के बावजूद चित्तौडगढ़ जिले के कई शक्तिपीठ पर प्रतिवर्ष की भांति नवरात्रि की नवमी पर पुलिस और हजारों लोगों के साथ जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही भैंसे और बकरों की बलि दिये जाने का मामला प्रकाश में आया है. बलि का आयोजन गांव के ही निवासी पंचायत समिति के उपप्रधान का परिवार करता है और वे खुद भी मौजूद रहते हैं. 

एक भैंसे की मंदिर के सामने बलि दी गई: 
चित्तौड़गढ़ जिले के आकोला थाना क्षेत्र के ताणा गांव स्थित पहाड़ी पर स्थित चामुंडा माता मंदिर पर प्रतिवर्ष की भांति सोमवार को भी ताणा के ठाकुर और भूपालसागर पंचायत समिति के उप प्रधान भीमसिंह झाला के परिवार की ओर से पशु बलि के आयोजन के तहत एक भैंसे की मंदिर के सामने बलि दी गई. क्षेत्र के करीब पांच हजार लोगों की मौजूदगी में स्वयं उप प्रधान और गांव के पूर्व और वर्तमान सरपंच की मौजूदगी में हुए इस बलि के आयोजन के प्रत्यक्षदर्शी पुलिसकर्मी भी बने लेकिन परम्परा के खौफ  के चलते इन्होंने बलि रोकने के कोई प्रयास नहीं किये. परम्परा का हवाला देकर ही ठाकुर परिवार अपनी इच्छा के अनुरूप ही पुलिस बल लगवाता है. थानाधिकारी रमेश मीणा ने बताया कि वहां इस तरह की परम्परा का मैने भी सुना है लेकिन आज मैं कपासन ड्यूटी पर हूं. वहीं आकोला थानाधिकारी रमेश मीणा कहते है कि मंदिर पर हजारों लोगों की उपस्थिति में कानून व्यवस्था नियंत्रण के लिए आज भी आकोला थाने के सहायक थानाधिकारी जगदीश विजयवर्गीय के साथ तीन जवान आकोला थाने से और दो जवान कपासन थाने से लगवाए गये थे, जिनसे इसकी रिपोर्ट ली जाएगी.

कलक्टर ने दिए जांच के आदेश: 
जिला कलेक्टर चेतनराम देवड़ा व पुलिस अधीक्षक अनिल कयाल के संज्ञान में पशु बलि का मामला लाए जाने पर जांच करवाने के निर्देश दिये हैं. दोनों ही अधिकारियों ने मामला गंभीर बताया है. मान्यता है कि बलि के बाद सिर कटा भैंसा अगर चार सौ फीट की पहाड़ी से लुढक़ता हुआ नीचे तक आ जाता है तो अगले वर्ष क्षेत्र में अच्छी बरसात होगी और यदि बीच में ही अटक जाता है तो यह अच्छी बरसात नहीं होने का संकेत माना जाता है. नवरात्रि की नवमी के दिन पशु बलि के दौरान ठाकुर परिवार के ही लोग बंदूकें और अन्य हथियार लिये मौजूद रहते हैं जिससे कोई भी वहां इसका विरोध ना कर पाए.

वर्षों से हो रही पशु बलि, खौफ  के आगे सब चुप....
भूपालसागर के ताणा गांव में पशु बलि दिए जाने का यह पहला मामला नहीं है. वर्षों से लगातार पशु बलि दी जाती रही है परंपरा का रूप देकर इस अमानवीय घटनाक्रम को अंजाम दिया जाता रहा है ठाकुर परिवार द्वारा प्रतिवर्ष भैंसे की बलि दी जाती है और आने वाले साल के समय के अनुमान के नाम पर मूक पशु को तलवार से गर्दन काट कर उसके बाद पहाड़ी से फेंकने का कार्य किया जाता है ऐसा नहीं है कि इस पूरे मामले में प्रशासन को जानकारी नहीं हो प्रतिवर्ष चामुंडा माता मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर मेला आयोजित किया जाता है जिसमें प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहते हैं लेकिन इसके बावजूद पशु बलि दिया जाना प्रशासन की मौन स्वीकृति की ओर इशारा करता है. 

पुलिस रही चुप, नहीं जप्त किया मरा हुआ भैंसा...
क्षेत्र में पशु बलि पर रोक होने के बावजूद भैंसे की बलि दिए जाने के मामले में पूरी तरह पुलिस विफ ल साबित हुई है. नवमी के अवसर पर बली स्वरूप चढ़ाए गए भैंसे के शव को भी पुलिस ने जप्त करने की कवायद नहीं की. ऐसे में साफ है कि वहां तैनात पुलिस के जवान और अधिकारी भी पूरे मामले में जानबूझकर चुप्पी साधे बैठे रहे और इस अमानवीय घटनाक्रम के साक्षी बने रहे. जानकारी में सामने आया है कि मौके पर एक सहायक उपनिरीक्षक और पांच पुलिस के जवानों को मंदिर में मेला ड्यूटी के लिए तैनात किया गया था लेकिन मंदिर में हुई बलि को लेकर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की मौन स्वीकृति का कारनामा प्रतीत हो रही है. 

पूर्व में की समझाइश, लेकिन नहीं लगी रोक....
जानकारी में यह भी सामने आया है कि पूर्व में तत्कालीन उपखंड अधिकारी सोहन लाल सालवी द्वारा कुछ वर्षों पूर्व इस पशु बलि पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी लेकिन गांव के राजनीतिक रसूख और प्रभावशाली परिवार की मिलीभगत होने के चलते इस पूरे मामले पर रोक नहीं लग पाई और वर्षों से परंपरा के नाम पर मूक पशु की बलि दिए जाने का अमानवीय घटनाक्रम अनवरत रूप से अंजाम दिया जा रहा है. ऐसे में मामले को लेकर अब देखने वाली बात होगी कि सरकार या प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई अमल में लाता है. 

अकेले यहीं नहीं जिले के कई मंदिरों में दी गई भैंसों और बकरों की बली....
ऐसे नहीं है कि यह अकले इसी मंदिर पर हुआ हो इसके अलावा जिले के अलग-अलग मंदिरों में बली दी गई, प्रशासन की जानकारी में भी ज्यादातर घटनाक्रम है लेकिन सच्चाई तो यहीं है कि जानकारी के बावजूद परम्परा का हवाला देकर सभी ने चुप्पी साधी हुई, सूत्रों की माने तो इस पशु बली को रोकने के लिए एक परिवाद आईजी उदयपुर रेंज के समक्ष भी पेश हुआ था लेकिन परिवाद पेश होने के बाद भी इन बेजुवानों की बली को नहीं रोका जा सका, कुल मिलाकर पशु बलि को परम्परा का रूप देकर किया जाने वाले यह अमानवीय कृत्य आखिर कब तक चलेगा, यह तो पता नहीं लेकिन धार्मिक स्थानों पर इस करह की बलि देना कितना सहीं और कितना गलत है यह तो हमें और आपको सोचना ही पड़ेगा, अब देखने वाली बात यहीं है कि आने वाले दिनों में इस पर कोई कार्रवाई होती या नहीं यह देखने वाली बात होगी. 

...पीके अग्रवाल, फर्स्ट इंडिया न्यूज़, चित्तौड़गढ़

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