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सीमावर्ती जिले में नहीं थम रहा है आईडी हैक का सिलसिला

सीमावर्ती जिले में नहीं थम रहा है आईडी हैक का सिलसिला

जैसलमेर: सीमावर्ती जिले के लोगों की सोशल मीडिया आईडी हैक होने का सिलसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा है. हालांकि पुलिस द्वारा पूर्व में फेसबुक को लिखकर इसकी जानकारी मांगी गई थी, लेकिन उसके बाद भी कई लोगों की फेसबुक आईडी हैक हो गई है. इस पर अभी तक लगाम नहीं लग पाई है. सदर थाना में कार्यरत पुलिस कांस्टेबल की फेसबुक आईडी हैक हो गई है. 

जानकारी के अनुसार कांस्टेबल आत्माराम की फेसबुक आईडी हैक हो गई है. हैक होने के बाद आईडी में आत्माराम का नाम बदलकर एलेक्स मोर्गन कर दिया गया है. इसके साथ ही उसे क्यूआरटी कमांडों बताया गया है. आईडी में उसका पता बदलकर अफगानिस्तान के काबुल में बताया गया है. गौरतलब है कि इन दिनों सीमावर्ती जिले में आईडी हैक होने का सिलसिला बरकरार है. पिछले दिनों ही एक युवक की आईडी हैक होने की बात सामने आई थी. जिसके बाद उसका फोटो बदलकर अमेरिकी महिला सैनिक की फोटो दिखाई देने लग गई थी.

देश की सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों की आईडी हैक होना चिंता का विषय 
 इससे पूर्व सीमावर्ती नाचना क्षेत्र में कई ग्रामीणों की फेसबुक आईडी भी हैक होने के साथ उसके पासवर्ड व अन्य जानकारियां बदल दी गई थी. देश की सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों की आईडी हैक होना चिंता का विषय है. सुरक्षा कर्मचारियों के सोशल मीडिया पर बाहरी लोगों की विशेष निगाह है. इस पर पुलिस को कार्रवाई करते हुए फेसबुक आईडी कि हैकिंग को रोकने के प्रयास करने चाहिए.  
 

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जैसलमेर: जिले के पोकरण उपखण्ड के वार्ड संख्या दो व तीन के निवासियों के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं ने जलदाय विभाग के अधिशासी अभियंता कार्यालय में बिगड़ी जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया. साथ ही मटकियां फोड़कर जलापूर्ति सुचारु करने की मांग की और अधिशासी अभियंता को एक खाली मटकी भी सुपुर्द की.

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एक माह से जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ाई हुई: 
गौरतलब है कि कस्बे के वार्ड संख्या दो, तीन, कोरियाबास, बागवानों का बास, दाऊ का बास, सेवापुरी कॉलोनी में गत एक माह से जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ाई हुई है. भीषण गर्मी में बिगड़ी जलापूर्ति व्यवस्था के कारण आमजन को पेयजल संकट से रूबरू होना पड़ रहा है. साथ ही ट्रैक्टर टंकियों से पानी खरीदकर मंगवाना पड़ रहा है. इस संबंध में लोगों ने कई बार जलदाय विभागाधिकारियों को अवगत करवाया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर मजबूरन उनकी ओर से बुधवार को विरोध प्रदर्शन किया गया. 

विभाग के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की:
भाजयुमो प्रदेश मंत्री आईदानसिंह भाटी नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व वार्डवासी जलदाय विभाग के अधिशासी अभियंता कार्यालय पहुंचे. यहां उन्होंने विभाग के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की. विरोध प्रदर्शन की सूचना पर अधिशासी अभियंता सुशीलकुमार कश्यप कार्यालय से बाहर समस्या सुनने पहुंचे. इस दौरान गुस्साए लोगों ने उनके समक्ष मटकियां फोड़ी और रोष जताया.  

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जलापूर्ति व्यवस्था से परेशानी हो रही:
उन्होंने बताया कि एक माह से अवगत करवाने के बावजूद जलापूर्ति सुचारु नहीं की गई है. इन बस्तियों में मजदूर वर्ग निवास करता है. जिन्हें बिगड़ी जलापूर्ति व्यवस्था से परेशानी हो रही है. उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि विभाग की ओर से टैंकरों से जलापूर्ति के दावे किए जा रहे है, लेकिन पोकरण कस्बे में न तो पर्याप्त जलापूर्ति हो रही है, न ही अभावग्रस्त वार्डों में टैंकर पहुंच रहे हैं. विरोध कर रहे लोगों ने खाली मटकी व समस्या के निराकरण की मांग को लेकर एक ज्ञापन सुपुर्द कर बताया कि यदि उनकी समस्या का शीघ्र निराकरण नहीं होता है, तो उनकी ओर से धरना शुरू कर उग्र आंदोलन किया जाएगा. 

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जैसलमेर: जिले में अब गर्मी का असर तेज हो गया है. नौतपा के कारण जहां आगामी नौ दिनों में तापमान अपने चढ़ाव पर रहेगा. वहीं आमजन को इस गर्मी से राहत पाने के लिए तरह तरह के जतन करने पड़ रहे हैं. तापमान 46.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. अब तक के सीजन में सर्वाधिक रिकॉर्ड किया गया तापमान है.

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दिन शुरू होने के साथ ही गर्मी अपने प्रचंड रूप में शुरू हो गई:
गौरतलब है कि कल से ही नौतपा शुरू हुआ है. इसके चलते गर्मी अपने रौद्र रूप दिखा रही है. सुबह दिन शुरू होने के साथ ही गर्मी अपने प्रचंड रूप में शुरू हो गई. इससे लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. गर्मी के कारण लोगों की पूरी दिनचर्या बदल गई है. जहां सूर्य देवता अपने रौद्र रूप में है जिससे दिन के साथ साथ रात में भी गर्मी के कारण आमजन को परेशानी हो रही है.

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दिन में कम से कम चार लीटर पानी जरूर पीजिए:
नौतपा में भीषण गर्मी पड़ती है. इस दौरान धूप में बाहर निकलने से बचने के अलावा आपको खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इसलिए दिन में कम से कम चार लीटर पानी जरूर पीजिए. इसके अलावा नारियल पानी, छाछ और लस्सी पीने से भी जल का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है. 

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जैसलमेर: जिले में भारतीय दूर संचार निगम की सेवाओं से आमजन बेहद परेशान है. जैसलमेर शहर के आधे से ज्यादा फोन खराब हुए पड़े लेकिन समाधान करने वाला कोई नहीं है. जैसलमेर  BSNL ने गत 31 जनवरी को फील्ड के सभी कर्मचारियों को वीआरएस देकर घर भेज दिया है बीएसएनल का प्लान था कि कर्मचारियों की छुट्टी कर फील्ड के काम प्राइवेट संस्था से करवा लिए जाएंगे. लॉक डाउन से बीएसएनएल की सारी व्यवस्था फेल हो गई है लॉक डाउन के चलते जैसलमेर के अधिकांश घरों में लैंडलाइन ब्रॉडबैंड कनेक्शन खराब हो गए हैं लेकिन अब उन्हें सही करवाने वाला कोई नहीं है. हालांकि फलसूंड से एक कर्मचारी को जिला मुख्यालय पर लगाया गया है लेकिन फिलहाल बीएसएनएल सरकारी कार्यालयों के अलावा किसी भी कनेक्शन को प्राथमिकता नहीं दे रही है इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. 

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उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा: 
एक तरफ लॉक डाउन होने से लोगों को बाहर जाने की मनाई है वहीं दूसरी तरफ ब्रॉडबैंड कनेक्शन खराब होने के चलते लोग घरों से भी नहीं रुक पा रहे हैं बीएसएनएल द्वारा अपने फील्ड के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति कर घर भेज दिया गया है जिससे अब उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बीएसएनएल ने गत 31 जनवरी को फील्ड में कार्यरत करीब 55 कर्मचारियों को वीआरएस से सेवानिवृत्त कर दिया गया है इससे अब फील्ड में परेशानी खड़ी हो गई है हालांकि बीएसएनएल द्वारा प्राइवेट कंपनियों को काम दिया जाना था इसके लिए 25 मार्च को टेंडर भी होने थे लेकिन उससे पहले ही लॉक डाउन लगने से टेंडर प्रक्रिया नहीं हो पाई और प्राइवेट फॉर्म को काम देना भी अटक गया.

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बीएसएनएल ने सरकारी कार्यलयों को प्राथमिकता पर रखा:
इसके अलावा लोक डाउन के कारण बीएसएनल की लैंडलाइन ब्रॉडबैंड सेवा ठप हो जाने से उन्हें दुरुस्त नहीं कर पा रही है इससे उपभोक्ताओं को परेशानी बढ़ गई है हालांकि बीएसएनएल उपभोक्ताओं को फाइबर के कनेक्शन दे रहा है लेकिन इसके परेशानी यह है कि उपभोक्ता के पुराने नंबर बदल जाएंगे फाइबर कनेक्शन लेने पर उपभोक्ताओं को इंटरनेट की तो अच्छी मिलेगी लेकिन पुराना नंबर बदल जाएगा जिससे लोग फाइबर कनेक्शन लेने से भी कतरा रहे हैं. अब बीएसएनएल की पूरी व्यवस्था फिलहाल मात्र दो कर्मचारियों के भरोसे ही चल रही है इससे एक कर्मचारी को फलसूंड से बुलाया गया है इसके साथ बीएसएनएल ने सरकारी कार्यलयों को प्राथमिकता पर रखा है. घरेलू कनेक्शन जो खराब है उसके सही अभी करने का काम नहीं किया जा रहा है इससे घरेलू उपभोक्ताओं के सामने परेशानी खड़ी हो गई है. जिससे अब आमजन बीएसएनएल के प्रति मोह भंग हो रहा है. 


 

कोरोना के संकट के बीच पाकिस्तान से राजस्थान में फिर टिड्डी हमला, विभिन्न स्थानों पर नियंत्रण की कवायद

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जैसलमेर: पाकिस्तान की ओर से उड़ी टिड्डियों ने एक बार फिर से चिंता पैदा कर दी है. प्रदेश के आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में टिड्डियां अपना आतंक फैला चुकी है. टिड्डियों का दल कई सीमावर्ती इलाको में हमला कर चुका है. ऐसे में अब टिड्डी नियंत्रण दल ने भी इनसे निपटने के लिए कमर कस ली है. पिछले वर्ष के अंत में टिड्डी दलों का हमला झेल चुके राजस्थान के सरहदी जिले एक बार फिर टिड्डी दलों के हमलों से परेशान है. राजस्थान में पिछले वर्ष के अंत में पाकिस्तान से आए टिड्डी दलों ने जम कर नुकसान किया था और सरहदी जिलों की में लाखों हैक्टेयर क्षेत्र की फसल बर्बाद हो गई थी. अब फिर एक बार राजस्थान के पाकिस्तानी सीमा से लगते जिलों पर टिड्डी दलों का प्रकोप दिख रहा है. 

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किसानों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा: 
कोरोना के कहर में ग्रामीणों क्षेत्रों में दूसरी बार टिड्‌डी दल के आने से प्रशासन के साथ- साथ किसानों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जानकारी के अनुसार क्षेत्र के ग्राम पंचायत बांधेवा, राजमथाई, मेकूबा, बलाड़ व धौलासर गांवों टिड्‌डी दल ने दस्तक दी. इससे किसान परेशान हैं. बांधेवा स्थित बूटे खांन की ढाणी में टिड्‌डी के आने के कारण ग्रामीणों ने अपने-अपने स्तर पर इन्हें भगाने के जतन किए. क्षेत्र में फिर से टिड्डी दल ने धावा बोल दिया हैं. पहले कोरोना वायरस ने प्रशासन व ग्रामीणों की नींद उड़ा रखी है. अब टिड्डी दलों ने भी दस्तक देकर आग में घी का काम किया है. बांधेवा, राजमथाई, मेकूबा, बलाड़ व धौलासर गांव में टिड्डी की भरमार देखने को मिली. गांवों के खेतों में टिड्डी ही टिड्डी नजर आ रही थी. इसको लेकर किसान व ग्रामीण परेशान नजर आ रहे हैं. 

भारी संख्या में टिड्डियों ने इलाके में आतंक मचा रखा: 
पड़ोसी देश पाकिस्तान के रास्ते से इलाके में पहुंची भारी संख्या में टिड्डियों ने इलाके में आतंक मचा रखा हैं. किसानों की खड़ी फसलों के साथ साथ टिड्डियां पशुधन के लिए उगे चारों को भी चट कर रही हैं. ऐसे में किसानों व पशुपालकों के लिए टिड्डियां परेशानी का सबब बनी हुई हैं. पाकिस्तान से सटे सरहदी जिले जैसलमेर में जिला कलक्टर नमित मेहता ने इस बारे में सतत् निगरानी, सर्वेक्षण एवं नियंत्रण के लिए अलग अलग स्तरीय टीमें गठित की हैं. टिड्डियों पर प्रभावी नियत्रण के लिए अलग अलग जिलास्तर पर नियंत्रण कक्ष संचालित हैं. साथ ही कृषि विभाग से जारी नबंर भी उपलब्ध करवाए गए हैं. 

टिड्डी नियंत्रण के लिए फिलहाल 10 वाहनों की उपलब्धता: 
अल्पसंख्यक मामलातए वक्फ एवं जन अभियोग निराकरण मंत्री शाले मोहम्मद ने टिड्डी नियंत्रण व कृषि अधिकारियों से कहा है कि जिले में टिड्डी प्रकोप की संभावनाओं के मद्देनजऱ विभागीय गतिविधियों को और अधिक सक्रिय करने के साथ ही जिले भर में व्यापक लोक जागरण व जन सहभागिता के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करें. केबिनेट मंत्री ने कहा कि टिड्डी नियंत्रण के लिए फिलहाल 10 वाहनों की उपलब्धता है, लेकिन विस्तृत परिक्षेत्र को देखते हुए इनकी संख्या को और अधिक बढ़ाए जाने की जरूरत है और इस दिशा में प्रयास किए जाएंगे. 

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सरकार की ओर से कीटनाशकों की नि:शुल्क उपलब्धता:
उन्होंने जिले के किसानों और ग्रामीणों का भी आह्वान किया कि वे टिड्डियों के आगमन पर त्वरित गति से इसकी सूचना प्रशासन और विभाग द्वारा स्थापित नियंत्रण कक्षों पर दें ताकि समय रहते कार्यवाही संभव हो सके. उन्होंने किसानों को बताया कि सरकार की ओर से कीटनाशकों की नि:शुल्क उपलब्धता है और स्प्रे कार्य में प्रयुक्त होने वाले ट्रैक्टरों के ईंधन के लिए सरकार की ओर से समुचित धनराशि की व्यवस्था है. ऐसे में ग्रामीणों और किसानों को सरकारी प्रयासों में और अधिक सहभागिता निभाने के लिए आगे आना चाहिए. उन्होंने जिले भर के किसानों से कहा है कि वे किसी भी प्रकार की चिन्ता न करेंए सरकार पूरी तरह अलर्ट है और इस दिशा में आवश्यकतानुसार ठोस कार्य किए जाएंगे. सरकार चाहती है कि किसानों को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होना चाहिएए इसलिए अभी से प्रयास आरंभ किए जा चुके हैं. 

विदेशों से राजस्थान मूलनिवासियों को लाकर जैसलमेर में करवाएंगे क्वॉरंटीन

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जैसलमेर: देश की पश्चिमी सीमा के अंतिम छोर पर बसे जैसलमेर को एक बार फिर कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में सरकार इस्तेमाल करने जा रही है. केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है कि राजस्थान मूल के विदेशों में बसे लोगों को विशेष विमान के जरिए अगले सप्ताह जैसलमेर लाया जाएगा और यहां उन्हें होटल क्वॉरंटीन करवाया जाएगा. ऐसे लोगों को जैसलमेर की होटलों में 14 दिन क्वॉरंटीन में रहना होगा. होटल के कमरे का आर्थिक भार उन लोगों को ही वहन करना होगा. जिला प्रशासन इन संभावित मेहमानों के रहने के लिए विविध स्तर वाली होटलों के चिह्निकरण के काम में जुट गया है.

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राजस्थानियों को 14 दिन होटल क्वॉरंटीन पर रखा जाएगा:
गौरतलब है कि मार्च माह में जैसलमेर के मिलिट्री स्टेशन में सेना के वेलनेस सेंटर में साढ़े चार सौ से ज्यादा भारतीय नागरिकों को ईरान से लाकर रखा गया था. जिनमें से करीब 30 जने बाद में कोरोना से संक्रमित पाए गए थे. जिन्हें उपचार के लिए जोधपुर भेजना पड़ा था. ईरान से लाकर जैसलमेर रखे गए भारतीय नागरिक जम्मू, कश्मीर घाटी, लेह, लद्दाख के मूल निवासी थे. जानकारी के अनुसार विदेशों में बसे राजस्थान मूल के लोगों को विमानों के जरिए अपने गृह प्रदेश लाया जाना है. इसके तहत प्रदेश के जैसलमेर सहित बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, उदयपुर का चयन किया गया है. जहां विभिन्न देशों से लाए जाने वाले राजस्थानियों को 14 दिन होटल क्वॉरंटीन पर रखा जाना है. संभवत: कुछ दिन बाद आगामी सप्ताह में कभी भी इन प्रवासी राजस्थानियों को लेकर विमान जैसलमेर के सिविल एयरपोर्ट पर उतरेगा. 14 दिन होटल क्वॉरंटीन अवधि पूर्ण होने के बाद रखे जाने वाले सभी प्रवासियों की कोविड-19 की जांच के लिए सेम्पल लेकर जांच के लिए भिजवाए जाएंगे. जांच में नेगेटिव आने वालों को बाद में उनके गृह क्षेत्र में भेजा जा सकता है. 

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होटलों का चिह्निकरण किया जा रहा: 
जैसलमेर जिला प्रशासन के स्तर पर विदेशों से लाए जाने वाले प्रवासी राजस्थानियों को ठहराने की व्यवस्था के मद्देनजर होटलों का चिह्निकरण किया जा रहा है. बताया जाता है कि होटल के एक कमरे में एक ही व्यक्ति को रखा जाएगा. कमरे का किराया संबंधित व्यक्ति ही वहन करेगा और प्रशासन को इसके लिए सभी श्रेणी की होटलों की व्यवस्था करनी होगी. गौरतलब है कि विदेशों से आने वाले लोगों में उच्च आयवर्ग से लेकर मजदूर श्रेणी के लोग भी शामिल होंगे. कुछ जने ऐसे भी हो सकते हैं जो होटल का किराया वहन करने की आर्थिक क्षमता नहीं रखते होंगे, उनके लिए नि:शुल्क कमरे भी मुहैया करवाए जा सकते हैं. प्रशासन ने यूआइटी सचिव के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई है जो इस संबंध में संबंधित होटल संचालकों से बातचीत कर कमरों की व्यवस्था में जुटी है. 

लॉकडाउन-3 में हल्की ढील देने से लोग निकले घरों से बाहर, पुलिस ने वापिस घर जाने की दी हिदायत 

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जैसलमेर: जैसलमेर जिले में लॉकडाउन 3 के पहले दिन बाजार में चहल पहल बढ़ गई. लॉकडाउन 3 के छूट का ज्यादा असर देखने को मिला. यहां तक कि ग्रामीण क्षेत्रों से कई वाहन और ग्रामीण जैसलमेर शहर पहुंचे और दुकानों और आसपास भीड़ नजर आई. पुराने ग्रामीण बस स्टैंड पर सर्वाधिक भीड़ रही.

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जगह-जगह लगाये बेरिकेडिंग:
वहीं बाजार में कुछ क्षेत्रों में कई लोग दिखाई दिए और दुकानें खुली रही. वही शहर में एक भी शराब की दूकान नहीं खुली. गौरतलब है कि जैसलमेर में कोरोना का एक भी मरीज नहीं आया है. ऐसे में लॉकडाउन 3 यहां लागू कर दिया गया. पिछले दिनों की तुलना में सोमवार को कई लोग बाजार में खुलेआम घूमते नजर आए. हालांकि पुलिस की गश्त यथावत थी और जगह-जगह बेरिकेडिंग भी हो रखी थी.

सोशल डिस्टेंसिंग की पूरी पालना:
सुबह तो बाजार में कई दुकानों के आगे आम दिनों की तरह भीड़ भाड़ दिखाई दी. फिर पुलिस ने सख्ताई दिखाई आमजन में घरो की और वापिस भेजा. लॉकडाउन में मामूली छूट है लेकिन लोग इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे हैं. एक साथ 5 से 10 लोग एकत्रित हो रहे हैं. गांव से आने वाले वाहनों में भी 5 से 7 लोग एक साथ एक ही वाहन में पहुंचे. सोशल डिस्टेंस नहीं रखी तो मुश्किल हो सकती है, यह समझने की जरूरत है.

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60 दिन से रामदेवरा में फंसे श्रद्धालुओं का दल कर रहा गुजरात जाने की गुहार

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रामदेवरा(जैसलमेर): बाबा रामदेव की समाधि के दर्शन व 21 दिन के अनुष्ठान करने के लिए आए गुजरात के श्रद्धालुओं का एक दल लॉक डाउन लगने से पहले ही यहां पर फंस गया था जो अभी तक 60 दिनों के पश्चात भी यहीं पर है. ऐसे में 20 दिन इन्होंने अपनी जमा पूंजी खर्च डाली शेष 40 दिन बमुश्किल किसी तरह इधर-उधर से मांग कर खाने-पीने का जुगाड़ किया. अब प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाकर अपने गृह नगर जाने की मांग कर रहे हैं. लेकिन प्रशासन से तीन बार इन श्रद्धालुओं के द्वारा गुहार लगाये जाने के बावजूद अभी तक इनको इनके गृह राज्य में जाने की अनुमति नहीं मिली है. 

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धर्मशाला में गुजराती श्रद्धालुओं का दल शरण लिए हुए: 
गुजरात के हिम्मतनगर जिले के बनासकांठा के रहने वाले गौतम दास बापू उनके साथ चार अन्य जने बाबा रामदेव की समाधि के दर्शन व अपने अनुष्ठान करने के लिए 3 मार्च को रामदेवरा आये थे. इनका 21 दिन का अनुष्ठान 25 मार्च को पूरा हुआ था. तब उन्हें इस बात का पता नहीं था कि ऐसा कुछ लॉक डाउन लगने वाला है. अचानक कोरोना वायरस के सक्रमण के चलते पूरे देश में लॉक डाउन लगा दिया गया तब से रामदेवरा स्थित कुमावत धर्मशाला में ये गुजराती श्रद्धालुओं का दल शरण लिए हुए हैं. उनके पास खाने-पीने का भी सामान नहीं है ना ही कभी सरकार की तरफ से पिछले 60 दिन में इनको कोई सरकारी सहायता मिली. शुरुआत के 20 दिन इनके पास रुपये थे. उससे इन्होने अपना खर्च चलाया था. गत 40 दिनों से ये लोगों के सामने हाथ फैलाने को मजबूर हो रहे हैं. ऐसे में रामदेवरा की बाबो भली करे स्वयंसेवी संस्था की तरफ से प्रतिदिन गरीबों को वितरित किए जाने वाले खाने को मांग कर ये दल अपना जीवन जीने को मजबूर है.  श्रद्धालुओं का दल सुबह शाम के समय खाना मांग कर खा रहे हैं. किसी तरह पिछले 40 दिनों से अपना गुजर-बसर कर विपरीत हालात में अपने आप को जीवित रखे हुए हैं.

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सभी श्रद्धालुओं की उम्र 60 वर्ष के करीब:
गुजरात के हिम्मतनगर में आश्रम के मठाधीश संत गौतम दास ने बताया कि वे तीन चार बार उपखंड अधिकारी के कार्यालय में जाकर अरदास लगा चुके हैं कि उन्हें यहां से जाने की अनुमति दी जाए लेकिन प्रशासन की तरफ से उनकी अरदास को अनसुनी कर दिया गया. दूसरे परदेश में जान पहचान का कोई भी व्यक्ति नहीं है ऐसे में पिछले 60 दिनों से धर्मशाला के बंद कमरे में रहते रहते सभी की तबीयत भी खराब होने लगी है. उनके पास पर्याप्त रुपये भी नही है. प्रशासन की तरफ से आज दिन तक उन लोगों की कोई सुध भी नहीं ली जा रही है. ऐसे में सभी गुजराती श्रद्धालुओं ने पब्लिक एप के माध्यम से जिला प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचा कर शीघ्र से शीघ्र यहां से उन्हें गुजरात जाने की अनुमति देने की मांग की है. पब्लिक एप से बात करते हुए सभी गुजराती श्रद्धालुओं की आंखों से अश्रु धारा बह निकली. किस तरह विपरीत हालात में उन्होंने ये दिन निकाले है. हजारों श्रमिक लोग सहित अन्य सभी यहां से जा चुके हैं वे लोग अभी भी 60 दिनों से यहां पर फंसे हुए मांग मांग कर खाने को मजबूर है. सभी श्रद्धालुओं की उम्र 60 वर्ष के करीब है. ऐसे में प्रदेश में बैठे श्रद्धालुओं के परिजन भी इनकी घर वापसी को लेकर बैचेन हैं. 

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जैसलमेर: राजस्थान के जैसलमेर जिला प्रशासन के बेहतर प्रबन्धों और योजनाबद्ध प्रयासों की बदौलत कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन के कारण जैसलमेर में फंसे हुए लगभग 35 हजार राज्य एवं अन्तर्राज्यीय प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया. श्रमिको ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और जिला प्रशासन का धंन्यवाद दिया. राजस्थान के शेष सभी जिलों से जितने प्रवासी श्रमिकों को अन्यत्र उनके गृह क्षेत्रों में भेजा गया, उनकी कुल संख्या से भी काफी अधिक राज्य एवं अन्तर्राज्यीय प्रवासी श्रमिक अकेले जैसलमेर जिले से उनके अपने गृह क्षेत्रों में भेजे जा चुके हैं.

खाने पीने की की गई व्यवस्था:
लॉकडाउन के बीच राज्य सरकार के निर्देशानुसार जैसलमेर जिले से लगभग 35 हजार प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह क्षेत्रों के लिए भेजा जा चुका है. इनमें लगभग 14 हजार प्रवासी श्रमिक राजस्थान राज्य के तथा लगभग 21 हजार अन्य राज्यों के प्रवासी श्रमिक शामिल थे. इनमें से अधिकतर प्रवासी श्रमिक जैसलमेर जिले के विभिन्न स्थानों पर जिला प्रशासन द्वारा संचालित आश्रय गृहों में ठहराए हुए थे और इनके आवास, भोजन, पानी आदि सभी प्रकार की माकूल व्यवस्थाएं प्रशासन द्वारा काफी दिनों से उपयुक्त ढंग से उपलब्ध कराई जा रही थी. इनमें राजस्थान राज्य के भीतर लगभग 14 हजार प्रवासी श्रमिकों को प्रदेश के विभिन्न 15 जिलों में भेजा जा चुका है. इनमें अधिकतर गंगानगर एवं हनुमानगढ़ मूल के प्रवासी श्रमिक थे.  

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प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी:
जिला प्रशासन द्वारा सभी श्रेणियों के प्रवासी श्रमिकों के लिए उपयुक्त व्यवस्थाएं करने के साथ ही इनकी सुरक्षित रवानगी से पूर्व सभी प्रकार के ऎहतियाती उपाय सुनिश्चित किए. इन्हीं का नतीजा है कि प्रवासी श्रमिकों ने रवानगी से पूर्व आश्रय गृहों में की गई व्यवस्थाओं तथा घर वापसी के लिए किए गए बेहतर प्रबन्धों की सराहना की और इसके लिए राज्य सरकार के साथ ही जैसलमेर जिला प्रशासन और व्यवस्थाओं में जुटे सभी अधिकारियों, कार्मिकों आदि के प्रति दिली आभार जताया. जिला कलक्टर नमित मेहता के निर्देशन में इतना बड़ा और महत्वपूर्ण कार्य सरलतापूर्वक सम्पन्न होने के पीछे सभी प्रशासनिक अधिकारियों एवं पुलिस अधिकारियों का सामन्जस्य और सभी संबंधितों के अथक प्रयासों के साथ ही जिला कलक्टर द्वारा इन राज्यों से संबंधित रूट में आने वाले जिला कलक्टरों व इन प्रदेशों के उच्चाधिकारियों आदि से लगातार संचार सम्पर्क का भी बहुत बड़ा रोल रहा, जिसकी वजह से इतनी बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी का लक्ष्य बिना किसी बाधा के पूर्ण हो सका.

अपने-अपने गृह क्षेत्रों में पहुंचे:
उन्होंने बताया कि राजस्थान के बाहर के, देश के विभिन्न राज्यों के रहने वाले लगभग 21 हजार प्रवासी श्रमिकों को उनके अपने गृह राज्यों में भेजा जा चुका है. इनमें हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तराखण्ड, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं गुजरात राज्यों के प्रवासी श्रमिक शामिल हैं. जैसलमेर जिले में अब बिहार के लगभग 300 प्रवासी श्रमिक बचे रह गए हैं, जिन्हें भेजने की कार्यवाही की जा रही है. जिला प्रशासन की योजनाबद्ध एवं सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली के साथ हर स्तर पर बेहतर प्रबन्धन का ही परिणाम रहा कि इतनी बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों को सहजता और सरलतापूर्वक उनके अपने-अपने गृह क्षेत्रों में पहुंचाया गया.  

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