67 साल के चुनावी इतिहास में प्रदेश की इस सीट पर महिलाओं का नहीं खुला खाता  

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/08 08:53

डूंगरपुर। चुनावों से पहले महिलाओं को राजनीति में बराबर के मौके और संतुलन बरतने के दावे भी खूब होते हैं। पर सच्चाई यह है कि बड़े चुनावी दंगल में महिलाओं को खड़े करने में सभी दल कतराते हैं। हालांकि इस बार प्रदेश की कई सीटों पर दोनों दलों ने महिलाओं को जरुर टिकट दी है, लेकिन आदिवासी बहुल बांसवाडा-डूंगरपुर सीट पर लोकसभा चुनाव के 67 साल के इतिहास में महिलाओं को टिकट देने में दोनों दलों ने रूचि नहीं दिखाई है।  

प्रदेश की आदिवासी बहुल डूंगरपुर-बांसवाड़ा लोकसभा सीट में वर्ष 1952 से 2014 तक 16 बार चुनाव हुए है। इस बार 17वीं बार चुनाव हो रहा है। खास यह कि इन 67 साल के लोकसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस महिला प्रत्याशियों को मौका देने में अधिक रुचि नहीं दिखाई। दोनों ने अब तक सिर्फ एक-एक बार ही महिला प्रत्याशी को मौका दिया हैं। वहीं यहां दुर्भाग्य यह भी है कि दोनों ही बार मिले मौके को महिला प्रत्याशी भुना नहीं पाई और इनको हार का सामना करना पड़ा। 

लोकसभा चुनाव पहली बार वर्ष 1952 में हुए और महिला प्रत्याशी को उम्मीदवार बनाने का पहला मौका भाजपा ने 46 साल बाद वर्ष 1998 में दिया था। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में बांसवाडा की जिला प्रमुख रही लक्ष्मी निनामा को मौका मिला था, लेकिन लक्ष्मी निनामा कांग्रेस के उम्मीदवार महेंद्रजीत सिंह मालविया से सवा लाख वोटों से पराजित हुई थी। वहीं इसके बाद दूसरी महिला उम्मीदवार के लिए 16 साल का इन्तजार करना पड़ा और इस बार मौका कांग्रेस पार्टी ने दिया। वर्ष 2014 के पिछले चुनाव में कांग्रेस से उम्मीदवार जिला प्रमुख रही रेशम मालवीया को मौका मिला था, लेकिन इस बार भी भाजपा के उम्मीदवार मानशंकर निनामा ने 91 हजार मतों से रेशम को पराजित किया।  

इधर महिलाओं को चुनाव में खड़ा करने में कांग्रेस व भाजपा दलों की अरुचि के बारे में दोनों दलों की महिला नेताओं से बात की गई। उन्होंने भी कहा राजनीतिक पार्टी महिलाओं की चुनाव में भागीदारी को लेकर बड़ी-बड़ी बातें तो करती है, लेकिन समय आने पर ये बाते हवा हो जाती है। महिला नेताओं का कहना है पार्टियों को चुनाव में महिला टिकट का भी कोटा होना चाहिए, ताकि महिलाओं को राजनीति में बराबरी का मौका मिल सके। 

बहराल बांसवाडा-डूंगरपुर सीट से इस बार लोकसभा चुनाव में इस बार प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं। दोनों ही दलों ने इस बार किसी भी महिला को टिकट नहीं दिया है। कांग्रेस ने जहां पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा को अपना प्रत्याशी बनाया है, तो वहीं भाजपा ने पूर्व राज्यसभा सांसद कनकमल कटारा को अपना उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में अब आने वाले वर्षों का इंतजार रहेगा की दोनों राजनीतिक दल महिलाओं की चुनाव में भागीदारी को लेकर किस प्रकार के कदम उठाती है। 

... डूंगरपुर संवाददाता पुनीत चतुर्वेदी की रिपोर्ट 

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