पिछले कई वर्षों से हर चुनाव में टोंक को रेलवे लाइन से जोड़ने वादा आज भी अधूरा

Abhishek Shrivastava Published Date 2018/11/14 09:54

टोंक। वादा तेरा वादा,वादे पे तेरे मारा गया....जी हां वर्ष 1972 में आई सुपरस्टार राजेश खन्ना अभिनीत फिल्म दुश्मन के गाने की ये पंक्तियां टोंक जिले की जनता का दर्द ए दिल हूबहू बयां करती हैं। पिछले कई वर्षों से हर चुनाव में टोंक को रेलवे लाइन से जोड़ने के बड़े बड़े वादे कर नेता जनता से वोट बटोरते हैं और फिर कागजी खानापूर्ति कर भूल जाते हैं और जनता हाथ मलती रह जाती है। 

टोंक प्रदेश की एकमात्र मुस्लिम रियासत रही है। टोंक जिला मुख्यालय को रेल से जोड़ने की कवायद रियासत काल मे चौथे नवाब इब्राहिम अली खां के समय शुरू की गई थी। नवाब सआदत अली खान के समय टोंक में रेल लाइव के लिए एक कमेटी बनाई गई और रियासत के खजाने से 4 लाख रुपये भी आरक्षित किये गये। लेकिन ये कवायद परवान नहीं चढ़ सकी। 

वर्ष 1964 में तत्कालीन सांसद केसरलाल कवि और वर्ष 1989 में तत्कालीन सांसद गोपाल पचरेवाल ने टोंक को रेल से जोड़ने की मांग को केंद्र सरकार तक पहुंचाया। तत्कालीन सांसद और मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने रेलवे लाइन बिछाने के लिए सर्वे कराने की केंद्र सरकार से मांग की। दरअसल केंद्र व राज्य में चाहे सरकार भाजपा की रही हो या कांग्रेस की। हर सरकार में इस मामले में कागजी खानापूर्ति की गई है। आपको बताते है पिछले 10 सालों में रेलवे लाइन के लिए सर्वे होने के बावजूद किस तरह मामले में पेच फंसा हुआ है।

-केंद्र की यूपीए 2 सरकार के समय टोंक को रेलवे लाइन से जोड़ने के लिए 873 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गये ।
-इसमें से आधी राशि और भूमि अवाप्ति के 200 करोड़ मिलाकर करीब 600 करोड़ राज्य सरकार को खर्च करने थे ।
-पूरी योजना के राज्य सरकार की ओर से मुफ्त भूमि केंद्र को उपलब्ध करानी थी ।
-पिछली कांग्रेस सरकार में तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत ने विधानसभा चुनाव के एन पहले भूमि देने और राज्य के हिस्से की राशि देने की घोषणा की ।
-चुनाव के बाद आई भाजपा सरकार में सर्वे का काम हुआ । 
-दो साल तक चले सर्वे में कुल 22 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित किये गए ।
-इसके बाद से योजना के लिए भूमि नहीं देने के कारण मामला अटका हुआ है ।
-सीएम वसुंधरा राजे की गौरव यात्रा में भी स्थानीय लोगों ने यह मुद्दा जोर शोर से उठाया । 

टोंक जिले की जनता की पीड़ा है कि रेलवे लाइन नहीं होना इस इलाके के पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण है। रेलवे लाइन नहीं होने के कारण बड़े उद्योग धंधे यहां लग नहीं पाते है। इसके कारण युवा बेरोजगार हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी पार्टी की सरकार हो, नेता केवल वोट लेकर उन्हें बेवकूफ बनाते हैं।

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