VIDEO: बीकानेर संसदीय क्षेत्र के प्रत्याशी के नाम पर कांग्रेस में हुआ मंथन और चिंतन 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/18 10:48

बीकानेर (लक्ष्मण राघव)। लोकसभा चुनाव के लिए चुनावी चौसर पर शह और मात का खेल भले ही अभी पार्टियों के बीच शुरू नहीं हुआ हो, लेकिन पार्टियों के भीतर प्रत्याशी के नाम फाइनल करने के लिए मैराथन मंथन शुरू हो गया है। वहीं अपने ही अपनों को पछाड़ कर प्रत्याशी होने के लिए हर जतन कर रहे हैं। बीकानेर भाजपा में भी सबकुछ ठीक हो ऐसा नहीं है पर कांग्रेस में ये खेल ज्यादा दिलचस्प नजर आ रहा है।

बीकानेर संसदीय क्षेत्र के प्रत्याशी के नाम की रायशुमारी के लिए सीएमआर में कल बुलाई गई बैठक मे सीएम अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने बीकानेर के कांग्रेसी नेताओं को खूब नसीहत दी। इशारो ही इशारो में समझा भी दिया कि एकजुटता के बिना जीत मुश्किल होती है। दरअसल विधानसभा चुनाव में रामेश्वर डूडी सहित पूर्व मंत्री वीरेंद्र बेनीवाल और तीन बार के विधायक मंगलाराम गोदारा की हार का एक प्रमुख कारण कांग्रेस के भीतर की आपसी खींचतान ही रही। कांग्रेस आलाकमान समझता भी है कि सुरक्षित सीट घोषित होने के बाद कांग्रेस यहां खाता नहीं खोल पाई है और इसकी बड़ी वजह जाट नेताओं में आपसी खींचतान भी है। बैठक में नेताओ से भी फीडबैक लिया गया।

बैठक की कुछ खास बातें

—पीसीसी चीफ सचिन पायलट की नसीहत ये मंच आरोप प्रत्यारोप के लिए नहीं है ये तय करने के लिए है कि लोकसभा कैसे जीते।
—कैंडिडेट नहीं कांग्रेस को जिताने का लक्ष्य रखे।
—बीकानेर से बड़ी संख्या में नेताओ को देखकर अशोक गहलोत ने दिया धन्यवाद
—कहा गया कि दुर्भाग्य से श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ , चूरू और बीकानेर  में कुछ सीटे हारे
—वाल्मीकि आयोग की स्थापना का सुझाव
—सम्भाग में कांग्रेस मजबूत थी विधानसभा चुनाव में क्या गलती हुई कि कांग्रेस कमजोर हुई पता करें।
—रामेश्वर डूडी की हार पर भी चर्चा हुई कहा गया 5 साल संघर्ष किया फिर भी हरा दिया। 

गौरतलब है कि अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस 5 बार ही जीत दर्ज कर पाई है। ऐसे में इस बार कांग्रेस जीत की जद्दोजहद में जुटी है।

इन संभावित नामों पर कांग्रेस लगा सकती है दांव 

—सरिता मेघवाल - विधायक गोविन्द मेघवाल की पुत्री, दलितों पर पकड़ लेकिन डूडी की पसंद नहीं होने के चलते किसानों का साथ चुनौती। 
—मदन मेघवाल- IPS से VRS विधायक की टिकट नहीं मिली अब सांसद के लिए दावेदारी, जमीनी सम्पर्क कमजोर सम्भवतया रामेश्वर डूडी की पसंद। 
—बनारसी मेघवाल- मंत्री भंवर लाल मेघवाल की पुत्री, दलितों पर पकड़ लेकिन बाहरी होना कमजोरी।
—रेवंतराम पंवार- दो बार विधायक रहे आजकल रामेश्वर डूडी के यहां आना जाना ज्यादा, हालांकि जिला परिषद का ही चुनाव हार गए थे। युवाओं में लोकप्रियता ना के बराबर।
—इसके अलावा परसराम मोरदिया के पुत्र राकेश मोरदिया, अम्बाराम, किशन लाल मेघवाल ने भी दावेदारी जताई है। वहीं ये भी कहा जा रहा है कि किसी रिटायर्ड IAS अफसर को भी बीकानेर से चुनाव लड़ाया जा सकता है ।

हालांकि बीकानेर में हुई कांग्रेस की बैठक में भी धड़ेबाजी साफतौर पर नजर आई। गोविन्द मेघवाल नाराज दिखे। प्रभारी मंत्री साले मोहम्मद तो समझ ही नहीं पा रहे थे कि क्या किया जाए। गोविन्द मेघवाल को जहां पूर्व मंत्री वीरेन्द्र बेनीवाल और मंगलाराम गोदारा के अलावा अब बी डी कल्ला का भी साथ मिलता दिख रहा है। वहीं रामेश्वर डूडी और भँवर सिंह भाटी एकजुट नजर आ रहे है। कांग्रेस में कौन से ज्यादा बड़ा सवाल ये है कि क्या कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी या फिर अपने अपने खेमो के चक्कर में आलकमान की कोशिशों को पलीता लग जाएगा। 

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