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जुगाड़ पर आयकर विभाग, राज्य में 2821 में से 961 पद पड़े हैं रिक्त

जुगाड़ पर आयकर विभाग, राज्य में 2821 में से 961 पद पड़े हैं रिक्त

जयपुर: केन्द्र सरकार के खजाने में सर्वाधिक राजस्व जुटाने वाले विभागों में से एक आयकर विभाग में कर्मचारियों का टोंटा है. राजस्थान में विभाग की हालत यह है कि यहां स्वीकृत पदों में से एक तिहाई पद रिक्त पड़े हैं. नतीजा यह कि कर्मचारियों को न केवल देर रात तक काम करना पड़ रहा है. बल्कि अवकाश के दिन भी आयकर कर्मचारी व अधिकारी काम करने के लिए पहुंच रहे हैं. 

तीन मुख्य आयकर आयुक्त कार्यालयों में बांटा हुआ: 
आयकर विभाग को राजस्थान में तीन मुख्य आयकर आयुक्त कार्यालयों में बांटा हुआ है. जयपुर की प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त केडर कंट्रोलिंग ऑथोरिटी होने के कारण इन तीनों मुख्य आयकर आयुक्त कार्यालयों की मुखिया है. लेकिन सेवानिवृति व तबादलों के कारण राज्य में तीन में से दो मुख्य आयकर आयुक्त यथा उदयपुर व जोधपुर के पद रिक्त पड़े हैं. स्थिति यह है कि जयपुर की प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त के पास मुख्य आयुक्त उदयपुर व जोधपुर का भी अतिरिक्त प्रभार है. इससे जयपुर की PCCIT श्रीमती नीना निगम को अकेले तीन मुख्य आयकर आयुक्त कार्यालयों का काम देखना पड़ रहा है. हालांकि तीन पदों की जिम्मेदारी के बावजूद वे राज्य में आवंटित आयकर राजस्व के लक्ष्य को प्राप्त करने का दावा तो करती हैं, लेकिन एक व्यक्ति के पास तीन पदों की जिम्मेदारी होने के बावजूद वे कितना काम कर पाएंगी यह आसानी से समझा जा सकता है. 

जिम्मेदारी व काम का दवाब काफी अधिक: 
केवल मुख्य आयकर आयुक्त पद ही नहीं आयकर विभाग में छापेमारी करने वाली अन्वेषण शाखा में राज्य में नम्बर दो की कमान संभालने वाले प्रधान निदेशक आयकर अन्वेषण के पद की भी कमोबेश यहीं स्थिति है. PDI Inv. पद पर वर्तमान में श्याम कुमार नियुक्त है. लेकिन अजमेर के PCIT के रूप में कार्यरत श्याम कुमार को यह जिम्मेदारी इस पद से 31 अगस्त को सेवानिवृत हुए PDI Inv. गजानन्द मीना के स्थान पर मिली है. अब मौजूदा स्थिति यह है कि दोहरी जिम्मेदारी के कारण श्याम कुमार तीन दिन अजमेर और दो दिन जयपुर में मौजूद रहते हैं. चूंकि दोनों ही पदों पर जिम्मेदारी व काम का दवाब काफी अधिक है. अत: श्याम कुमार की स्थिति को आसानी से समझा जा सकता है. कमोबेश यहीं स्थिति राज्य में स्वीकृत 12 प्रधान आयकर आयुक्त पदों पर नियुक्त 8 अधिकारियों की भी है. इनमें से चार के पास अतिरिक्त प्रभार है. इसी तरह अतिरिक्त व संयुकत आयुक्त पद पर कार्यरत 46 अधिकारियों के पास 57 पदों की जिम्मेदारी है. हालांकि आयकर विभाग में उपायुक्त व सहायक आयुक्तों की स्थिति काफी खराब तो नहीं पर फिर भी 68 उपायुक्त व सहायक आयुक्तों के पास 74 पदों की जिम्मेदारी है.

यह रहा राज्य में आयकर अधिकारियों के खाली पदों का हाल:

पद का नाम                                                                      स्वीकृत पद          कार्यरत अधिकारी         रिक्त पद
मुख्य आयुक्त / महानिदेशक आयकर अन्वेषण                       3                       1                               2
प्रधान आयकर आयुक्त / निदेशक आयकर अन्वेषण                12                      8                              4 
अतिरिक्त आयकर आयुक्त / संयुक्त आयकर आयुक्त             57                     46                            11
आयकर उपायुक्त / सहायक आयकर आयुक्त                          74                     68                            6  

आयकर विभाग के फील्ड अधिकारियों की स्थिति भी काफी अच्छी नहीं है. विभाग में आम करदाताओं के कर निर्धारण व रिफण्ड जैसे मामलों का निपटारा करने व आयकर वसूली के लिए सक्रिय रहने वाले आयकर अधिकारी पद पर राज्य में 240 पद स्वीकृत है. इनमें से 233 पदों पर ITO मौजूद है. लेकिन फिर भी 7 ITO तो ऐसे हैं, जिन पर अतिरिक्त प्रभार है. आयकर विभाग राजस्थान में सबसे दयनीय स्थिति यदि किसी पद पर है तो वह प्राइवेट सैकेट्री पद की है, जहां राज्य में स्वीकृत 19 पदों में से शत-प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं. हालांकि वरिष्ठ प्राइवेट सैकेट्री पद की स्थिति को भी अच्छा नहीं कहा जा सकता. इस पद पर राज्य में 16 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इस पद की जिम्मेदारी निभाने के लिए राज्य में केवल 9 अधिकारी ही मौजूद है. आयकर विभाग में कर सहायक व वरिष्ठ कर सहायक भी अतिरिक्त जिम्मेदारी से कार्य कर रहे हैं. राज्य में वरिष्ठ कर सहायकों के 423 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 258 अधिकारी ही राज्य में मौजूद हैं. अर्थात 165 वरिष्ठ कर सहायकों का राजस्थान को इंतजार है. इसी तरह कर सहायकों के राज्य में 445 पद स्वीकृत है. पर राज्य में 122 कर सहायक ही उपलब्ध है. अर्थात 323 कर सहायकों के आगमन की राजस्थान के आयकर विभाग को प्रतीक्षा है.  

यह रहा राज्य में आयकर B व C श्रेणी के खाली पदों का हाल:

पद का नाम                                                                      स्वीकृत पद       कार्यरत अधिकारी         रिक्त पद
आयकर अधिकारी                                                              240                   233                           7
प्रशासनिक अधिकारी - ग्रेड-2                                               32                     14                            18 
वरिष्ठ निजी सचिव                                                            16                      9                               7
निजी सचिव                                                                      19                      0                               19
कार्यालय अधीक्षक                                                              148                    70                             78  
वरिष्ठ कर सहायक                                                             423                   258                           165  
कर सहायक                                                                       445                   122                           323  

राज्य में कुल आयकर कर्मचारी/अधिकारी                          2821                  1860                           961

आयकर विभाग में कर्मचारियों को A, B, व C वर्गों में बांटा जाता है. आयकर विभाग में कर्मचारियों की नियुक्ति SSC व UPSC के माध्यम से होती है. सूत्रों का कहना है कि विभाग की ओर से जितने कर्मचारियों की मांग की जाती है, उतने नहीं मिलते जो मिलते हें उनमें से भी एक बड़ा हिस्सा ज्वाइन करने से पूर्व ही अन्यत्र चला जाता है. बताया जाता है कि विभाग में कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया काफी लम्बी है, अत: जब तक परीक्षा में सफल होने वाला युवा विभाग में नियुक्ति के लिए तेयार होता है, तब तक विभाग के मौजूदा कर्मचारियों की सेवानिवृति हो जाती है. इससे आयकर विभाग में रिक्तियां पूरी ही नहीं हो पाती और कर्मचारियों की कमी समाप्त ही नहीं होती.
 
...विमल कोठारी, फर्स्ट इण्डिया न्यूज, जयपुर

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आवासों के ई ऑक्शन का अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया: 
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यह योजना बोर्ड के इतिहास की सबसे सफल:
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बोर्ड का यह प्रदर्शन किसी जादू से कम नहीं:
कोरोना काल मे जब हर तरह के बाजार की हालत खराब है तब बोर्ड का यह प्रदर्शन किसी जादू से कम नहीं है. इस योजना के अभी तक के 4 बुधवारों में बोर्ड को बहुत भारी रेस्पॉन्स मिला है. कमिश्नर पवन अरोड़ा की तरफ से ग्राहकों को सहूलियत देने के लिए प्रयासों से भी इस योजना में लोगों का रुझान बढ़ा है. कमिश्नर पवन अरोड़ा ने इस बड़ी कामयाबी का श्रेय टीम वर्क को देते हुए कहा है कि ग्राहक बोर्ड के लिए भगवान की तरह है. आने वाले दिनों में भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और UDH मंत्री शांति धारीवाल के हर किसी को आवास उपलब्ध कराने के मिशन को सफल बनाने के लिए बोर्ड ऐसे ही काम करता रहेगा. 

योजना के माध्यम से आवास लेने की लोगों में होड़: 
किश्तों में आवास योजना की बात करें तो ऐसा लगता है कि प्रदेशभर में इस योजना के माध्यम से आवास लेने की लोगों में होड़ लग गई है. आकर्षक लोकेशनों पर सभी मूलभूत सुविधाओं के साथ 50 फीसदी तक की छूट पर 13 वर्ष की आसान मासिक किश्तों में आवास मिलना किसी के लिए भी एक सपने से कम नहीं है. 

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- पहले बुधवार को 381 सम्पत्तियां बिकीं, जिससे 58 करोड 22 लाख रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ. 
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हाउसिंग बोर्ड की किश्तों में आवास योजना में सिर्फ जयपुर या अन्य बड़े शहरों में ही नहीं बल्कि छोटे कस्बों में भी अच्छी संख्या में मकानों की नीलामी हो रही है. कोरोना काल मे भी आवासों की नीलामी से अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़कर नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर बोर्ड ने रियल एस्टेट जगत में अपनी बादशाहत लंबे समय तक कायम रखने के संकेत दे दिए हैं.

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1 दिन की शांति के बाद फिर बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत, जानिए क्या हो गए हैं भाव

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जयपुर: 1 दिन की शांति के बाद पेट्रोल-डीजल ने आज फिर से गर्मी दिखाना शुरू कर दिया. आज पेट्रोल 6 पैसे और डीजल 13 पैसे की बढ़त के साथ शुरू हुआ. भीषण गर्मी और कोरोना संकट के दौर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि जारी है इससे आमजन मुश्किल में पड़ गया है. संकट के इस दौर में पेट्रोल-डीजल आम आदमी की पकड़ से बाहर होता जा रहा है. एक तरफ तो पिछले 23 दिन में कीमतों में वृद्धि का दौर जारी है दूसरी तरफ राज्य सरकार भी लॉकडाउन अवधि में 2 बार पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ा चुकी है. 

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23 दिन से कीमतों में वृद्धि का दौर:  
कोरोना संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भी देश और प्रदेश में पेट्रोल-डीजल के दाम में वृद्धि का दौर जारी है. पिछले 23 दिनों में जिस तरह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि हो रही है उससे ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार का तेल कंपनियों पर नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो चुका है. तेल कंपनियां ढाई महीने शांत बैठने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बाद भी अपना मार्जिन बढ़ाने के लिए पिछले 23 दिन से कीमतों में वृद्धि का दौर शुरू कर चुकी हैं. 

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23 दिन में पेट्रोल 9.77 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ: 
7 जून को पेट्रोल-डीजल में वृद्धि का दौर शुरू हुआ जो आज 29 जून तक जारी है. इस अवधि में पिछले 23 दिन में पेट्रोल जहां 9.77 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है वहीं डीजल की कीमतों में भी 10.94 रुपए की वृद्धि हुई है. पेट्रोल के दाम 87.59 रुपए के स्तर पर पहुंच गए हैं. वहीं डीजल के दाम में भी 81.34 रुपए का मुकाम हासिल किया है. इसका सीधा मतलब है कि भीषण गर्मी और कोरोना संकट के दौर में जहां लोगों के रोजगार छिन रहे हैं, वेतन भत्तों में कमी आई है उस दौर में पेट्रोल-डीजल की दरें बढ़ाकर आम आदमी की मानों कमर तोड़ दी गई है. 

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जैसलमेर: पर्यटननगरी के नाम से मशहूर जैसलमेर के पर्यटन व्यवसाय को विश्वव्यापी महामारी कोरोना के चलते सर्वाधिक नुकसान पहुंचने की आशंका गहराने लगी है. पर्यटन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि जब तक कोरोना के उपचार की वैक्सीन सर्वसुलभ नहीं हो जाती तब तक जैसलमेर में पर्यटन को राहत मिलना संभव दिखाई नहीं देता.

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10 हजार से ज्यादा लोगों के सामने आजीविका का संकट: 
जैसलमेर के होटल व्यवसायी और सम के रिसोर्ट्स संचालकों से लेकर पर्यटन से सीधे जुड़े 10 हजार से ज्यादा लोगों के सामने आजीविका का अपूर्व संकट इस महामारी ने खड़ा कर दिया है. उन्ही में से हेंडीक्राफ्ट दूकान व्यवसाइयो को भारी परेशानी खड़ी हो गई है. 

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लाखों रुपये का सामान दुकानों में धूल फांक रहा:
लाखों रुपये का सामान दुकानों में धूल फांक रहा वही हेंडीक्राफ्ट दूकान व्यवसाइयो के कर्ज के तले दब रहे है दूकान का किराया, बिजली और घर चलाना मुश्किल हो रहा है. करोड़ों रुपए के विदेशों के ऑर्डर पहले ही निरस्त हो चुके थे, साथ ही देश में कोरोना के प्रवेश के साथ ही स्थानीय व्यापारियों ने हाथ खड़े कर दिए. 

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जयपुर: कोरोना संकट में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. इससे आमजन मुश्किले बढ़ गई है. लगातार पेट्रोल-डीजल आम आदमी की पकड़ से बाहर होता जा रहा है. एक तरफ तो पिछले 21 दिन में कीमतों में वृद्धि का दौर जारी है दूसरी तरफ राज्य सरकार भी लॉकडाउन अवधि में 2 बार पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ा चुकी है. आज भी राजधानी जयपुर में पेट्रोल के दाम में 26 पैसे और डीजल के दाम 21 पैसे की बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में अब पेट्रोल 87.53 और डीजल 81.21 रुपए प्रति लीटर हो गया है. 

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7 जून को पेट्रोल-डीजल में वृद्धि का दौर शुरू:  
कोरोना संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भी देश और प्रदेश में पेट्रोल-डीजल के दाम में वृद्धि का दौर जारी है. पिछले 21 दिनों में जिस तरह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि हो रही है उससे ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार का तेल कंपनियों पर नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो चुका है. तेल कंपनियां ढाई महीने शांत बैठने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बाद भी अपना मार्जिन बढ़ाने के लिए पिछले 21 दिन से कीमतों में वृद्धि का दौर शुरू कर चुकी हैं. 7 जून को पेट्रोल-डीजल में वृद्धि का दौर शुरू हुआ जो आज 27 जून तक जारी है. 

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21 दिन में पेट्रोल 9.71 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ: 
इस अवधि में पिछले 21 दिन में पेट्रोल जहां 9.71 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है. वहीं डीजल की कीमतों में भी 10.81 रुपए की वृद्धि हुई है. पेट्रोल के दाम 87.53 रुपए के स्तर पर पहुंच गए हैं. वहीं डीजल के दाम में भी 81.21 रुपए का मुकाम हासिल किया है. इसका सीधा मतलब है कि भीषण गर्मी और कोरोना संकट के दौर में जहां लोगों के रोजगार छिन रहे हैं, वेतन भत्तों में कमी आई है उस दौर में पेट्रोल-डीजल की दरें बढ़ाकर आम आदमी की मानों कमर तोड़ दी गई है.
 

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जयपुर: राजधानी जयपुर में लोगों के लिए खान-पान और आउटिंग का प्रमुख स्थल सरस पार्लर बंद हो गया है. जेएलएन मार्ग स्थित सरस पार्लर कई वर्षों से शहर के लोगों के लिए खान-पान का हॉट स्पॉट बना हुआ था. यहां पर सर्दियों में दूध-जलेबी और गर्मियों में आईसक्रीम-सॉफ्टी के लिए खासी भीड़ रहती थी. लेकिन अब निजी कम्पनी से विवाद के चलते आरसीडीएफ ने सरस पार्लर को खाली करवा दिया है. पार्लर पर ताला लगा देख यहां आ रहे शहरवासी मायूस लौट रहे हैं.

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आरसीडीएफ ने नोटिस देकर पार्लर को खाली करवा लिया: 
आपको बता दें कि सालभर पहले तक सरस पार्लर का संचालन जयपुर डेयरी के पास था. लेकिन डेयरी प्रशासन और आरसीडीएफ प्रबंधन के बीच मतभेदों के चलते जयपुर डेयरी ने सरस पार्लर का संचालन छोड़ दिया था. इसके बाद आरसीडीएफ ने सरस पार्लर का संचालन निजी कम्पनी को सौंपा था. पिछले 3 माह से निजी कम्पनी ने लॉक डाउन का हवाला देकर आरसीडीएफ प्रबंधन को करीब 18 लाख रुपए किराए का भुगतान नहीं किया था. इस पर आरसीडीएफ ने नोटिस देकर पार्लर को खाली करवा लिया है. हालांकि आरसीडीएफ को पहले संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी, जिससे शहरवासियों को परेशानी नहीं होती. आपको बता दें कि आरसीडीएफ के लिए भी सरस पार्लर से अच्छी आय होती रही है. सरस पार्लर का सालाना टर्नओवर 15 करोड़ रुपए तक रहा है. 

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लगातार 20 वें दिन पेट्रोल-डीजल की दर में जबरदस्त उछाल, जानें क्या हो गए रेट

लगातार 20 वें दिन पेट्रोल-डीजल की दर में जबरदस्त उछाल, जानें क्या हो गए रेट

जयपुर: भीषण गर्मी और कोरोना संकट के दौर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि जारी है. इससे आमजन मुश्किल में पड़ गया है. संकट के इस दौर में पेट्रोल-डीजल आम आदमी की पकड़ से बाहर होता जा रहा है. एक तरफ तो पिछले 20 दिन में कीमतों में वृद्धि का दौर जारी है दूसरी तरफ राज्य सरकार भी लॉकडाउन अवधि में 2 बार पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ा चुकी है. आज भी राजधानी जयपुर में पेट्रोल के दाम में 23 पैसे और डीजल के दाम 18 पैसे की बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में अब पेट्रोल 87.27 और डीजल 81.01 रुपए प्रति लीटर हो गया है. 

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7 जून को पेट्रोल-डीजल में वृद्धि का दौर शुरू:  
कोरोना संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भी देश और प्रदेश में पेट्रोल-डीजल के दाम में वृद्धि का दौर जारी है. पिछले 20 दिनों में जिस तरह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि हो रही है उससे ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार का तेल कंपनियों पर नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो चुका है. तेल कंपनियां ढाई महीने शांत बैठने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बाद भी अपना मार्जिन बढ़ाने के लिए पिछले 20 दिन से कीमतों में वृद्धि का दौर शुरू कर चुकी हैं. 7 जून को पेट्रोल-डीजल में वृद्धि का दौर शुरू हुआ जो आज 26 जून तक जारी है. 

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20 दिन में पेट्रोल 9.45 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ: 
इस अवधि में पिछले 20 दिन में पेट्रोल जहां 9.45 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है. वहीं डीजल की कीमतों में भी 10.60 रुपए की वृद्धि हुई है. पेट्रोल के दाम 87.27 रुपए के स्तर पर पहुंच गए हैं. वहीं डीजल के दाम में भी 81.01 रुपए का मुकाम हासिल किया है. इसका सीधा मतलब है कि भीषण गर्मी और कोरोना संकट के दौर में जहां लोगों के रोजगार छिन रहे हैं, वेतन भत्तों में कमी आई है उस दौर में पेट्रोल-डीजल की दरें बढ़ाकर आम आदमी की मानों कमर तोड़ दी गई है.

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