VIDEO: राजस्थान के जंगलों में बढ़ता अतिक्रमण, रणथंभौर में 180 और सरिस्का में 150 स्थानों पर कब्जा, देखिए ये रिपोर्ट

VIDEO: राजस्थान के जंगलों में बढ़ता अतिक्रमण, रणथंभौर में 180 और सरिस्का में 150 स्थानों पर कब्जा, देखिए ये रिपोर्ट

जयपुर: प्रदेश में वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि हो रही है, लेकिन इन वन्यजीवों के घर यानी जंगल मे अतिक्रमण बढ़ते जा रहे हैं. बढ़ते वन्यजीव और सिकुड़ते जंगल को लेकर न तो विभाग ही गम्भीर दिख रहा और न ही स्थानीय प्रशासन. ऐसे में वन्यजीवों के घर से बजरी, पत्थर, पेड़ और यहां तक कि खुद वन्यजीवों की अवैध निकासी से जंगलों में सक्रिय माफिया जमकर चांदी काट रहा है. पेश है जंगल की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर फर्स्ट इंडिया न्यूज़ की खास रिपोर्ट...

एक सामान्य कारण है बढ़ते वन्यजीव और सिकुड़ते जंगल:

इन दिनों आपने इंसान और वन्यजीवों की भिड़ंत और वन्यजीवों के आपसी टकराव यानी टेरिटोरियल फाइट की घटनाएं काफी सुनी होगी. इन सब के पीछे एक सामान्य कारण है बढ़ते वन्यजीव और सिकुड़ते जंगल.जी हां वन्यजीवों के पर्यावास ज्ञानी उनकी जमीन पर प्रदेश में जमकर अतिक्रमण हो रहा है. कहीं विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत है तो कहीं अवैध माफिया विभाग के संसाधनों पर भारी पड़ रहा है. प्रदेश में हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र व जंगल लापरवाही की भेंट चढ़ गए हैं. प्रदेश की वन भूमि पर अतिक्रमण से हरित राजस्थान एक सपना  ही नजर आ रहा है.

प्रदेश में करीब 62000 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण:

वन विभाग की मानें तो प्रदेश में करीब 62000 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण है. गत दिनों रणथंभौर की कुंडेरा रेंज के खानडोज़ वन क्षेत्र में करीब 300 बीघा बेशकीमती वन भूमि पर कब्जा करने का मामला सामने आया था. इसी तरह जयपुर के कूकस, कचेरवाला में भी ऐसे मामले सामने आए हैं. हालांकि वन विभाग की ओर से समय-समय पर वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया जाता है. इसके बावजूद विभाग को अधिक सफलता नहीं मिली. प्रदेश में वन भूमि पर कब्जे और अतिक्रमण के 12 हजार 225 से अधिक मामले हैं.

सबसे ज्यादा बुरे हाल उदयपुर रेंज के:

वहीं प्रदेश में 13458 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमिओं के कब्जे में है. सबसे ज्यादा बुरे हाल उदयपुर रेंज के हैं जहां 2698 स्थानों पर जंगल की जमीन पर अतिक्रमण है. इसी तरह जयपुर में 56, अलवर में 610, दौसा में 294, सीकर में 525, झुंझुनू में 170, अजमेर में दो, भीलवाड़ा में 39, नागौर में 8, भरतपुर में 64, धौलपुर में 15, करौली में 19, बीकानेर में चार, गंगानगर में 256, हनुमानगढ़ में 60, चुरू में 78, सिरोही में 21 पाली में दो, जालोर में आठ, जोधपुर में 182, बाड़मेर में 93, जैसलमेर में 9, बूंदी में 184, बारां में 1432, झालावाड़ में 1291, कोटा में 841, उदयपुर में 2300, उदयपुर नॉर्थ में 398, चित्तौड़गढ़ में दो, डूंगरपुर में 533 और प्रतापगढ़ में तीन अतिक्रमण के मामले हैं. प्रदेश के टाइगर रिजर्व में 300 से अधिक जगह पर अतिक्रमियों, खनन माफिया ने कब्जा कर रखा है.

सरिस्का में 150 से अधिक जगहों पर वन भूमि पर कब्जा:

वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक रणथंभौर में 180 और सरिस्का में 150 से अधिक जगहों पर वन भूमि पर कब्जा किया हुआ है. दरअसल अधिकारियों व कार्मिकों की लापरवाही और लचर रवैये के कारण वन क्षेत्र में अतिक्रमण बहुत ज्यादा बढ़ गया है. वन भूमि को पूरी तरह से अतिक्रमण से मुक्त कराना विभाग के बस की बात नहीं रही. रणथंभौर के कुंडेरा रेंज के खांडोज़ इलाके जहां गत दिनों अतिक्रमण का मामला है था वहां भी बाघिन टी102 अपने साथ वितरण कर रही है. वन भूमि पर अतिक्रमण से वन्यजीवों के शिकार की आशंका भी बढ़ गई है, वन्य जीवो में टेरिटोरियल फाइट और उनका प्रे बेस भी गड़बड़ा रहा है. दर्जनों होटल भी वन्यजीवों की शरण स्थली पर अतिक्रमण करने के दोषी हैं लेकिन उन पर कार्यवाही नहीं की जा रही है. दोनों टाइगर पार्क सहित विभिन्न वाइल्ड लाइफ सेंचुरीज़ में वन्य जीव अधिनियम की जमकर धज्जियां उड़ रही हैं. 

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