नई दिल्ली देश में बढ़ती महिला पुलिसकर्मियों की संख्या पर बोले पीएम मोदी,- कहा पहले धारणा थी कि सेना व पुलिस जैसी सेवाएं केवल पुरुषों के लिए, अब आया बदलाव

देश में बढ़ती महिला पुलिसकर्मियों की संख्या पर बोले पीएम मोदी,- कहा पहले धारणा थी कि सेना व पुलिस जैसी सेवाएं केवल पुरुषों के लिए, अब आया बदलाव

देश में बढ़ती महिला पुलिसकर्मियों की संख्या पर बोले पीएम मोदी,- कहा पहले धारणा थी कि सेना व पुलिस जैसी सेवाएं केवल पुरुषों के लिए, अब आया बदलाव

नई दिल्ली: महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में वृद्धि की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि 2014 में जहां इनकी संख्या 1.5 लाख के करीब थी, वहीं 2020 तक इसमें दोगुने से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. 

प्रधानमंत्री ने आकाशवाणी पर प्रसारित मासिक कार्यक्रम ‘‘मन की बात’’ की ताजा कड़ी में अपने विचार साझा करते हुए उम्मीद जताई कि आगे और भी ज्यादा संख्या में महिलाएं पुलिस सेवा में शामिल होंगी और देश की पुलिस सेवा की नयी पीढ़ी का नेतृत्व करेंगी. उन्होंने कहा कि पहले यह धारणा बन गई थी कि सेना और पुलिस जैसी सेवा केवल पुरुषों के लिए ही होती है, लेकिन आज ऐसा नहीं है. आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या दोगुनी हो गई है. 2014 में जहां इनकी संख्या 1.5 लाख के करीब थी, वहीं 2020 तक इसमें दोगुने से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है और यह संख्या अब 2.15 लाख तक पहुंच गई है. ज्ञात हो कि मोदी 2014 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने थे.

महिलाकर्मियों की मौजूदगी समाज का बढ़ाती हैं हौंसला:
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सुरक्षा बलों में भी पिछले सात सालों में महिलाओं की संख्या लगभग दोगुनी हुई है और आज देश की बेटियां कठिन से कठिन कर्तव्य भी पूरी ताकत और हौसले से पूरा कर रही हैं. इस क्रम में उन्होंने सबसे कठिन माने जाने वाले प्रशिक्षणों में एक विशिष्ट जंगल युद्ध कमांडो के प्रशिक्षण का उल्लेख किया और कहा कि आगे जाकर यह प्रशिक्षित बेटियां कोबरा बटालियन का हिस्सा बनेंगी. उन्होंने कहा कि आज हवाई अड्डों से लेकर मेट्रो स्टेशनों तक या सरकारी दफ्तरों में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की जांबाज महिलाएं हर संवेदनशील जगह की सुरक्षा करते दिखाई देती हैं. उन्होंने कहा कि इसका सबसे सकारात्मक असर हमारे पुलिस बल के साथ-साथ समाज के मनोबल पर भी पड़ रहा है. महिला सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी से लोगों में, विशेषकर महिलाओं में सहज ही एक विश्वास पैदा होता है. वे उनसे स्वाभाविक रूप से खुद को जुड़ा महसूस करती हैं. महिलाओं की संवेदनशीलता की वजह से भी लोग उन पर ज्यादा भरोसा करते हैं. 

नारी शक्ति ने बढ़ाई देश की शक्ति:
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला पुलिसकर्मी आज देश की लाखों और बेटियों के लिए भी आदर्श बन रही हैं. उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों से अनुरोध किया कि वे स्कूलों के खुलने के बाद अपने क्षेत्रों के स्कूलों में जाएं और बच्चियों से बात करें. उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस बातचीत से हमारी नयी पीढ़ी को एक नयी दिशा मिलेगी. यही नहीं, इससे पुलिस पर जनता का विश्वास भी बढ़ेगा. प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि इससे आगे और भी ज्यादा संख्या में महिलाएं पुलिस सेवा में शामिल होंगी और पुलिस सेवा की भावी पीढ़ी का नेतृत्व करेंगी. 

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र स्थापना दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वैश्विक संस्था का एक अनोखा पहलू यह भी है कि उसका प्रभाव और उसकी शक्ति बढ़ाने में भारत की नारी शक्ति ने बड़ी भूमिका निभाई है. इस कड़ी में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधि रहीं हंसा मेहता और लक्ष्मी मेनन का उल्लेख किया और कहा कि लैंगिक समानता के लिए उन्होंने पुरजोर आवाज उठाई. उन्होंने विजया लक्ष्मी पंडित के संयुक्त राष्ट्र आम सभा की पहली महिला अध्यक्ष बनने का भी जिक्र किया. सोर्स-भाषा
 

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