अंतरिक्ष में भारत अपना स्पेस स्टेशन बनाएगा, ISRO प्रमुख के सिवन का बड़ा ऐलान

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/10/03 13:10

नई दिल्ली :ISRO अब ऐसा मिशन करने जा रहा है, जो उसने आज तक नहीं किया. भारत 2029 तक अंतरिक्ष में अपना स्पेश स्टेशन स्थापित करेगा. हाल में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इसका एलान किया..भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO - Indian Space Research Organisation) इस समय एक साथ कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है.एक तरफ जहां वैज्ञानिकों ने अब तक चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) के विक्रम लैंडर (Vikram Lander) से संपर्क की कोशिश में हार नहीं मानी है. वहीं दूसरी ओर भारत के पहले मानव मिशन गगनयान (Gaganyaan) की भी तैयारी जारी है.

इस बीच अब इसरो प्रमुख के. सिवन (ISRO Chief K Sivan) ने एक और बड़े प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी है. यह ऐसा है जो इसरो ने पहले कभी नहीं किया.डॉ. के. सिवन ने अंतरिक्ष में भारत के अपने स्टेशन (Space Station) के बारे में बात की है. 

स्‍पेस स्‍टेशन एक स्‍पेसक्राफ्ट होता है. इसमें अंतरिक्ष यात्री रहकर कई तरह के प्रयोग करते हैं. यह लंबे समय तक अंतरिक्ष में रह सकता है. अंतरिक्ष स्टेशन से दूसरा अंतरिक्षयान भी जुड़ सकता है. अभी इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) सबसे लोकप्रिय है. इसे 1998 में अंतरिक्ष में स्‍थापित किया गया थाकुछ महीने पहले के. सिवन ने बताया था कि भारत अपना स्पेस स्टेशन बनाने वाला है.अब इसके लिए इसरो अगले साल स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट (Spadex - Space Docking Experiment) करने जा रहा है.

इस प्रयोग के लिए इसरो दो सैटेलाइट्स को एक पीएसएलवी रॉकेट (PSLV Rocket) की मदद से अंतरिक्ष में भेजेगा. ये दो सैटेलाइट मॉड्यूल इस तरह तैयार किए जाएंगे, कि ये अंतरिक्ष में रॉकेट से बाहर आने के बाद एक दूसरे से जुड़ सकें. यही सबसे जटिल प्रक्रिया भी होगी.भारतीय अंतरिक्ष स्‍टेशन को पृथ्‍वी से 400 किमी की ऊंचाई पर स्‍थापित किया जाएगा. इसमें अंतरिक्ष यात्री 15 से 20 दिन तक रह सकेंगे. इसरो के प्रमुख के सीवन ने बृहस्पतिवार को घोषणा की थी कि भारत के प्रस्तावित अंतरिक्ष स्टेशन का वजन करीब 20 टन होगा.

इसरो प्रमुख के अनुसार जुड़ने की ये प्रक्रिया ठीक वैसी ही होगी जैसे इमारत बनाने के लिए एक ईंट से दूसरी ईंट को जोड़ना. छोटी-छोटी चीजें जुड़कर बड़ा आकार बनाती हैं। स्पेस स्टेशन बनाने के लिए भी ये प्रक्रिया सबसे अहम है.

इस प्रयोग की सफलता से ही पता चलेगा कि हम स्पेस स्टेशन में जरूरी वस्तुओं और अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित तरीके से पहुंचा सकेंगे या नहीं. बता दें कि पहले 2025 तक ये रॉकेट छोड़ने की योजना थी
अमेरिका (NASA), रूस (ROSCOSMOS), जापान (JAXA), यूरोप (ESA) और कनाडा (CSA)।.इन सभी को मिलकर आईएसएस बनाने में करीब 13 साल लगे थे. इसके लिए भी डॉकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया था. ISS के लिए कुल 40 बार डॉकिंग की गई थी.

इस प्रयोग की सबसे जटिल प्रक्रिया होगी अंतरिक्ष में दो सैटेलाइट्स की गति कम कर उन्हें एक-दूसरे से जोड़ना. क्योंकि अगर गति कम नहीं हुई, तो वे आपस में टकरा जाएंगे. इस प्रयोग के लिए इसरो को सरकार ने फिलहाल 10 करोड़ रुपये दिए हैं.स्‍पेस स्‍टेशन भारत के लिए कई तरह से फायदेमंद होगा. इससे भारत की न केवल अंतरिक्ष में बल्कि पृथ्‍वी की निगरानी की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी

स्पेश स्टेशन की मदद से भारत अपने दुश्‍मन देशों पर आसानी से नजर रख सकेगा. इससे अंतरिक्ष में बार-बार निगरानी उपग्रह भेजने की जरूरत नहीं रह जाएगी. इससे खर्च में भी कमी आएगी.स्‍पेस स्‍टेशन को बनाने से 15 हजार लोगों को रोजगार भी मिलेगा.

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